प्रतिस्पर्धा मामलों की निगरानी करने वाली संस्था सीसीआई चाहती है कि उसके पास बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार एवं बिजली समेत सभी क्षेत्रों के प्रतिस्पर्धा मामलों का नियमन का अधिकार बना रहे क्योंकि इसमें क्षेत्राधिकार के टकराव जैसी कोई स्थिति नहीं है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग :सीसीआई: के अध्यक्ष अशोक चावला ने प्रेट्र से कहा जब भी कोई नया नियामक आता है तो लोग उस नियामक के दायरे से बाहर रहना चाहते हैं। दलील यह दी जाती है कि कुछ क्षेत्रों में पहले से ही इस क्षेत्र से जुड़े नियामक हैं लेकिन अवधारणात्मक ढांचा बिल्कुल साफ है कि उन नियामकों के उक्त क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेष काम है लेकिन बाजार गतिविधियों से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
उन्होंने कहा अवधारणात्मक और अनिवार्य तौर पर दो नियामकों को एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए और हमारा मानना है कि क्षेत्राधिकार के टकराव जैसी कोई स्थिति नहीं है और निश्चित तौर कुछ क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धा आयोग से बाहर रखने का कोई मामला नहीं बनता।
चावला ने कहा कि जब सरकार ने प्रतिस्पर्धा कानून लाया और एक बाजार नियामक की सिफारिश की तो इसे सब पर लागू होना चाहिए जब तक किसी गंभीर नीति के लिहाज से कुछ क्षेत्रों को बाहर रखने की जरूरत हो।
प्रतिस्पर्धा कानून की धारा तीन और चार के तहत सीसीआई को को प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों और प्रभावशाली कंपनियों द्वारा अपनी स्थिति के दुरुपयोग पर लगाम लगाना शामिल है। इस निगरानी संस्था के पास बड़े विलय और अधिग्रहण की जांच और इसे मंजूरी देने का भी अधिकार है जिनका असर बाजार में प्रतिस्पर्धा पर हो सकता है।
सरकार ने प्रतिस्पर्धा कानून में संशोधन की भी पहल की है जिसके तहत कंपनियों के लिए सीसीआई की मंजूरी प्राप्त करने की सीमा आदि में संशोधन किया जाना है। प्रतिस्पर्धार् विधेयक को मंत्रिसमूह के पास भेजा गया है क्योंकि आयोग के क्षेत्राधिकार के संबंध में सहमति नहीं बन सकी।
भाषा