उस नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों और राज्य पुलिस के एक जवान की मौत हो गयी थी। जवान संपत लाल इस हमले में 77वें शहीद थे। वह नक्सली हमले में फंसे दस्ते की मदद के लिए बुलेटप्रूफ वाहन चला कर ले जा रहे थे।
लाल का वाहन सड़क के नीचे लगाए गए आईईडी की चपेट में आ गया था जिससे हुए विस्फोट में लाल की मौत हो गयी थी। लाल ने यह जानते हुए भी अपनी जान की परवाह नहीं की कि उनके आगे बढ़नेे में काफी खतरा है।
इस घटना के तीन साल बाद लाल को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के घायल जवानों को बाहर निकालने के क्रम में अदम्य साहस का प्रदर्शन किया था।