वर्ष 2002 में नीतीश कटारा की हत्या के सिलसिले में चचेरे भाई विकास के साथ उम्रकैद की सजा काट रहे विशाल यादव ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के बयान को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के रिकार्ड किया।
विशाल के वकील राम जेठमलानी ने लगातार तीसरे दिन दलील देते हुए न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति जे आर मिधा की पीठ के समक्ष कहा कि पुलिस को मृतक की एक घड़ी और एक हथोड़ा समेत चीजों को जब्त करने से पहले आरोपियों के खुलासे वाले बयान दर्ज करने चाहिए थे लेकिन सामान जब्त करने के बाद ऐसा किया गया।
वकील ने कहा कि आरोपियों के बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि पुलिस किसी स्वतंत्र गवाह या जेल अधिकारी के दस्तखत नहीं ले सकी।
विकास और विशाल के बयानों का जिक्र करते हुए जेठमलानी ने दलील दी, सामान जब्त किये जाने के बाद इकबालिया बयान दिया गया। बयान अविश्वसनीय हैं लेकिन निचली अदालत ने मुकदमे के दौरान पूरी तरह इकबालिया बयान पर भरोसा किया।
अदालत ने पूर्व सांसद डीपी यादव के बेटे विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल यादव के साथ सुखदेव पहलवान की अपीलों पर सुनवाई की, जो तिहाड़ में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
इससे पहले विकास के वकील ने अपील पर अपनी अंतिम दलीलें पूरी कीं।
पीठ ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख मुकर्रर की।