facebookmetapixel
Advertisement
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया बैंक के खिलाफ 23 साल पुराना मामलाजल जीवन मिशन 2.0 की सफलता अब आंकड़ों से नहीं, हर घर तक सही तरीके से पानी पहुंचाने से तय होगीएनआरआई निवेश में जबरदस्त उछाल, 7 साल में 5 लाख नए निवेशक जुड़ेक्या 16वें वित्त आयोग ने राजकोषीय संघवाद का संतुलन केंद्र की ओर झुका दिया है?Editorial: विदेशी मुद्रा बढ़ाने की RBI की रणनीति सही, लेकिन FDI के बिना नहीं बनेगी बातमहंगे मकानों का बढ़ा क्रेज, 3 में से 2 खरीदारों ने खरीदा ₹1 करोड़ से महंगा मकानAI से रियल एस्टेट में आएगा बूम? इन कंपनियों के लिए खुल सकता है लाखों करोड़ का मौकाShare Market: शेयर बाजार में फिर बिकवाली! क्या 24,000 के नीचे जाएगा Nifty?क्या होम लोन की लंबी EMI आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग को प्रभावित करती है? एक्सपर्ट से समझेंPM आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव हिरासत में, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

वाहन: कीमत वृद्धि से घटेगी रफ्तार

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 10:56 AM IST

जिंस की ऊंची कीमतों का भार ग्राहकों पर डालने की भारतीय वाहन निर्माताओं की योजना से मांग में सुधार का परिदृश्य कमजोर होगा। कीमतोंं में बढ़ोतरी अगले महीने होनी है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है जब कुछ श्रेणियों की मांग में सुधार और त्योहारी खर्च की उम्मीद धुमिल हो गई और कोरोनावायरस महामारी से पडऩे वाले आर्थिक असर इसकी गवाही देते हैं। फिच रेटिंग्स का ऐसा मानना है।

लॉकडाउन में धीरे-धीरे ढील से मांग थोड़ी सुधरी, जिससे भारतीय यात्री वाहनों की मासिक थोक बिक्री जुलाई 2020 के बाद बढ़त की राह पर लौट आई। यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 13 फीसदी बढ़ी। वाहन निर्माताओं के संगठन सायम के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

त्योहारी मांग ने सितंबर के बाद बढ़त को टिकाए रखने में मदद की  लेकिन नवंबर 2020 में इस बढ़त की रफ्तार सालाना आधार पर घटकर 5 फीसदी रह गई, जो अक्टूबर में 14 फीसदी रही थी। साल 2020 में दीवाली नवंबर में होने के बावजूद ऐसा हुआ जबकि साल 2019 में दीवाली अक्टूबर में थी। रेटिंग एजेंसी ने कहा, इससे संकेत मिलता है कि मंग कम हो रही है।

वाहन क्षेत्र की अन्य श्रेणियोंं में मांग कमजोर बनी रही। भारतीय वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 20 फीसदी घटी। इससे पहले जून तिमाही में 85 फीसदी की भारी-भरकम गिरावट आई थी, जो अत्यधिक फ्रेट कैपेसिटी और वित्त की कमजोर उपलब्धता जैसे कारकों से मिलने वाली चुनौतियों को प्रतिबिंबित करती है।

इसके अलावा मध्यम व भारी वाणिज्यिक वाहनों की मांग पर भी असर पड़ा। अशोक लीलैंड, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा समेत अग्रणी विनिर्माताओं के वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री अक्टूबर व नवंबर में सामान्य स्थिति की ओर बढ़ी। लेकिन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि पंजीकरण में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई।

Advertisement
First Published - December 17, 2020 | 11:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement