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दोपहिया की गजब चाल, घर में फिसड्डी मगर निर्यात में कमाल

Last Updated- December 11, 2022 | 7:56 PM IST

पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारतीय वाहन उद्योग में अजीब उलटबांसी दिखी है और यह उलटबांसी केवल दोपहिया के दम पर हुई है। 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष 2021-22 में दोपहिया वाहन देसी बाजार में इस कदर सुस्त रहे कि पिछले छह साल में सबसे कम घरेलू बिक्री का रिकॉर्ड बना डाला। उस दौरान डीलरों को कंपनियों से इतने कम दोपहिया भेजे गए, जितने छह साल में कभी नहीं भेजे गए थे। इस वजह से समूचे वाहन उद्योग की बिक्री छह साल में सबसे कम रही। लेकिन इसी दौरान निर्यात के मामले में दोपहिया ने पिछले छह साल का रिकॉर्ड तोड़ डाला।
वाहन उद्योग की सभी श्रेणियां आपूर्ति की दिक्कतों से जूझ रही हैं, जिसका असर उत्पादन और बिक्री पर भी दिख रहा है। मगर भारतीय वाहन निर्माताओं के संगठन सायम द्वारा आज जारी आंकड़ों के हिसाब से दोपहिया का निर्यात पिछले छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल, 2021 से मार्च, 2022 के बीच 56 लाख वाहनों का निर्यात हुआ, जबकि उससे साल भर पहले आंकड़ा 41 लाख ही था। मोटरसाइकलों और स्कूटरों का निर्यात 44 लाख पर पहुंच गया जो वित्त वर्ष 2016 के बाद से अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
वाहनों की कुल बिक्री और इनके उत्पादन में मोटरसाइकलों एवं स्कूटरों की हिस्सेदारी 77 प्रतिशत है, इसलिए इनका निर्यात बढऩा अचंभे की बात नहीं है। मगर उस वित्त वर्ष में घरेलू बाजार में वाहनों की बिक्री 6 प्रतिशत कम होकर 17,513,596 रह गई, जो एक साल पहले 18,620,233 थी। डीलरों को बाइक और स्कूटरों की आपूर्ति 11 प्रतिशत कम होकर 1,34,66,412 रह गई। इसकी कई वजह हैं मसलन कीमतें बढऩा, ईधन महंगा होना और सुस्त आर्थिक हालात में कम आय वर्ग की माली हालत बिगडऩा। सायम के अध्यक्ष केनिची अयुकावा ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से मार्च, 2020 में शुरू हुई वाहन उद्योग की चुनौतियां अब भी खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021-22 काफी चुनौतियों भरा रहा है और इस दौरान वाहन उद्योग को नई चीजें भी सीखने को मिलीं। देसी वाहन उद्योग ने इन चुनौतियों से निपटने और अपनी रफ्तार बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत की है। वाहन उद्योग ने कल-पुर्जों के स्थानीय स्तर पर निर्माण से लेकर लागत कम रखने और नई तकनीकों में निवेश के लिए कई प्रसास किए हैं। इसके साथ ही निर्यात बढ़ाने के उपाय करने से भी पीछे नहीं रहा है।’ उन्होंने कहा कि आगे की तिमाहियों में उत्पादन भी चुनौती भरा रहेगा क्योंकि फिलहाल यह नहीं पता कि सेमीकंडक्टर की किल्लत कितनी जल्दी दूर हो पाएगी। अयुकावा ने कहा कि  ईंधन के दाम बढऩे से कम कीमत वाले वाहनों  की बिक्री पर असर हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग कम रहने से भी दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया बाजार में बिक्री पर असर हुआ है। वर्ष 2021-22 बिक्री में गिरावट का तीसरा साल है। घर में बिक्री कम रहने से दोपहिया कंपनियां निर्यात पर अधिक जोर दे रही हैं। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2022 में दोपहिया वाहनों का निर्यात 44 लाख के आंकड़े के साथ पिछले छह साल के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2021 में 32 लाख दोपहिया का ही निर्यात हुआ था। बजाज ऑटो दोपहिया कंपनियों में सबसे आगे रहीं और उसने 21 लाख वाहनों का निर्यात किया। टीवीएस मोटर, होंडा मोटरसाइकल ऐंड स्कूटर इंडिया, हीरो मोटोकॉर्प ने भी साल भर पहले की तुलना में अधिक वाहनों का निर्यात किया।
वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात भी दो साल के उच्चतम स्तर 92,297 पर पहुंच गया। इससे देश से वाहनों के कुल निर्यात में तेजी दर्ज हुई। सेमीकंडक्टर की उपलब्धता बढऩे के कारण देसी बाजार में मांग मजबूत रहने से यात्री वाहनों की बिक्री भी बढ़कर 5,77,875 हो गई जो एक साल पहले 4,04,000 रही थी। हालांकि वित्त वर्ष 2020 में दर्ज आंकड़ा हासिल करने में अब भी काफी कसर बाकी है।

First Published - April 13, 2022 | 11:14 PM IST

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