facebookmetapixel
Advertisement
US-Iran तनाव बढ़ने से गोल्ड की सेफ हैवेन डिमांड लौटेगी? क्रूड, फेड के फैसले कैसे डालेंगे असरCBDT ने FY27 के लिए CII बढ़ाकर 384 किया, 1 अप्रैल 2026 से टैक्स कैलकुलेशन के लिए होगा लागूMarket Strategy: मानसून सुधरा, अब कौन से शेयर करा सकते हैं मोटी कमाई? एक्सपर्ट ने बताए टॉप सेक्टरUnion Bank पर अब क्या करें निवेशक? Q1 रिजल्ट के बाद 5 ब्रोकरेज ने बताया आगे का रास्ताPaytm: पहली बार बोनस शेयर देने की तैयारी, 20 जुलाई को फैसला; ब्रोकरेज ने स्टॉक पर दी BUY की सलाहBUY, ADD या REDUCE? Q1 के बाद ICICI Prudential Life और ICICI Lombard पर क्या बोले ब्रोकरेजSouth Indian Bank Q1 Results: जून तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, NII में 23% की छलांग; NPA घटाकिरायेदारों के ₹1.26 लाख करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसे, नोब्रोकर की रिपोर्ट में Gen Z पर बड़ा खुलासाWest Asia संकट का असर: 2026 की दूसरी तिमाही में घटी इंडस्ट्रियल व वेयरहाउसिंग डिमांडNSE लाया नया डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट, 12 अगस्त से Nifty India FPI 150 Index पर होगी ट्रेडिंग

बिहार में अधिक मतदाता छूटे तो दखल देंगे: शीर्ष अदालत

Advertisement

पीठ ने बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 12 और 13 अगस्त की तारीख तय कर दी है।  

Last Updated- July 29, 2025 | 10:20 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि यदि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के बाद 1 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन में बड़ी संख्या में मतदाताओं को  छोड़ा गया तो वह अवश्य दखल देगा। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और माना जाता है कि यह कानून के अनुसार कार्य करती है। लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर सूची से बाहर होने पर अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।

देश की सर्वोच्च अदालत ने याचियों से कहा, ‘संवैधानिक संस्था होने के नाते चुनाव आयोग कानून के अनुसार कार्य करने के लिए जाना जाता है। यदि कोई गलत काम किया जाता है, तो आप इसे अदालत के ध्यान में लाएं। हम आपकी बात सुनेंगे।’ न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची के पीठ ने बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 12 और 13 अगस्त की तारीख तय कर दी है।  

याचियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि 1 अगस्त को निर्वाचन आयोग द्वारा प्रकाशित की जाने वाली मसौदा सूची से अनेक लोगों को बाहर किया जा रहा है। इससे वे अपने वोट देने का अधिकार खो देंगे। भूषण ने कहा कि आयोग ने कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 65 लाख लोगों ने गणना फॉर्म जमा नहीं किए, क्योंकि या तो वे मर चुके हैं अथवा स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं। हालांकि आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि मसौदा सूची प्रकाशन के बाद भी गणना फॉर्म दाखिल किए जा सकते हैं। पीठ ने तब दोनों पक्षों को 8 अगस्त तक अपने जवाब दाखिल करने के लिए कहा। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बिहार में मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

Advertisement
First Published - July 29, 2025 | 10:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement