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विदर्भ का दर्द, बढ़ रहा कर्ज का मर्ज

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:45 AM IST

वर्धा के किसानों के हालात तमाम कोशिशों के बाद भी जस के तस बने हुए हैं।
कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार द्वारा बनाई नई नीतियों के बाद भी यहां के किसानों के  हालात नहीं बदले हैं। मानो यहां के किसानों की किस्मत में जिंदगीभर कर्ज में डूबे रहना ही लिखा है।
चार महीने पहले ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 40 फीसदी बढ़ाया था। साल 2004 में हुए चुनाव में विदर्भ में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को कुल 11 सीट मिली थीं। सूखाग्रस्त और किसानों की बढ़ती आत्महत्यों के बाद सरकार को उम्मीद थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से उनकी सीटों की संख्या में भी इजाफा होगा।
हालांकि सरकार को इससे कोई फायदा मिलने के आसार नहीं हैं, क्योंकि इस साल भी सूखे के कारण किसानों की एक तिहाई फसल ही हो पाई जिससे किसान फिर से कर्ज में ही डूबे रह गए। कपास की खेती की लागत अधिक होने के कारण कई किसानों ने सोयाबीन का रुख कर लिया है।
पिछले कुछ साल में किसानों की सबसे अधिक आत्महत्या वाले जिले वर्धा में खेती की सूरत ही बदल गई है। 2008 के खरीफ सीजन में वर्धा में लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि पर सोयाबीन की खेती हुई जबकि कपास को केवल 3 लाख हेक्टेयर जमीन ही नसीब हुई।
वर्धा जिले के अर्वी गांव के देवराव हाते ने कहा, ‘पिछला खरीफ सीजन  शुरू होने से पहले ऋण माफी योजना के बाद मुझे कर्ज मिल गया था। लेकिन इस साल सूखे जैसे हालात के कारण प्रति हेक्टेयर 1.5-2 क्विंटल की फसल ही हो पाई है जबकि अच्छी बरसात होने पर प्रति हेक्टेयर 4-5 क्विंटल तक फसल होती है।’
उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को सरकार से मुआवजा मिला है लेकिन विदर्भ के किसानों को सरकार ने कोई मुआवजा नहीं दिया है। हालांकि वोट किसे देंगे, पूछने पर वह कहते हैं, ‘अब ऋण और सूखा कोई मायने नहीं रखते हैं। पूरा गांव मिलकर यह फैसला करेगा कि किसे वोट करना है।’
यवतमाल जिले के एलोना गांव के किसान दिवाकर चवरे ने बताया कि किसानों का दुख तो अब भी पहले जैसा ही है। विदर्भ के किसानों को सिंचाई की सुविधा चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक अच्छी बरसात नहीं होगी या फिर सिंचाई का अच्छा बंदोबस्त नहीं होगा, तब तक इस क्षेत्र के किसानों के हालात नहीं सुधरेंगे।

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First Published - April 15, 2009 | 10:30 PM IST

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