facebookmetapixel
Advertisement
नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सक्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयासऑरिफ्लेम बेचेगी भारत में अपना विनिर्माण कारोबार, अकुम्स ड्रग्स की सहायक कंपनी प्योर एंड क्योर से हुआ समझौता₹9,200 करोड़ के IPO से कर्जमुक्त होगी मणिपाल हेल्थ, उत्तर भारत में विस्तार पर कंपनी का जोर: दिलीप जोस

इस बारिश ने भी बुंदेलखंड को प्यासा ही रखा

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 2:01 AM IST

मानसून पहले की बारिश ने जहां उत्तर  प्रदेश के किसानों के चेहरों पर  रौनक ला दी है। वहीं बुंदेलखंड का भाग्य अभी भी रूठा हुआ है।


मई के अंतिम पखवाड़े मे हुई बरसात ने पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान के लिए अनुकूल हालात पैदा कर दिया है। कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को समय से धान की पौध लगाने की सलाह दे रहे हैं। अफसोस की धूप की तपिश के बीच बारिश ने बुंदेलखंड को अपनी मेहरबानी से अलग रखा है।

बीते तीन दिन की बरसात में बुंदेलखंड के झांसी जिले में 0.4 मिली मीटर पानी बरसा जबकि बांदा, ललितपुर और महोबा में आंधी के बाद की बारिश ने केवल जमीन को भिगोने भर का काम किया है। बुंदेलखंड के जालौन जिले में बारिश अन्य जिलों से थोड़ी ज्यादा हुई पर धान की फसल के लिए यह नाकाफी है।

मौसम विभाग के निदेशक आर के कुलश्रेष्ठ ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि झांसी में 0.4 मिली मीटर की वर्षा रिकार्ड की गई है। मशहूर भू वैज्ञानिक डॉ. ओ पी शर्मा के अनुसार जालौन जिले में पानी तो बरसा पर केवल जमीन को हल्का नम करने के  लिए ताकि किसानों के फायदा पहुंचने के लिए। श्री शर्मा ने कहा कि धान की फसल इस साल भी किसानों के लिए बुंदेलखंड में सपना ही रहेगी।

गौरतलब है कि बुंदेलखंड में बीते 6 साल से जबरदस्त सूखा पड़ रहा है और लगभग सभी जिलों में बारिश सामान्य से आधा भी नहीं हो रही है। बुंदेलखंड में सूखे के कारण पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। लगातार सूखे को देखते हुए और भूजल के गिरते स्तर के मद्देनजर राज्य सरकार ने बुंदेलखंड में कृत्रिम बारिश का सहारा लेने फैसला किया है।

समूचे क्षेत्र में कृत्रिम वर्षा के लिए रूसी वैज्ञानिकों का एक दल मई के पहले हफ्ते में बुंदेलखंड का दौरा कर चुका है। दल की रिपोर्ट के मुताबिक कृत्रिम वर्षा के लिए जून के आखिरी हफ्ते से लेकर जुलाई के बीच तक का समय सबसे बेहतर है। राज्य सरकार बुंदेलखंड में लगभग 20 मिली मीटर कृत्रिम बारिश के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च करेगी। जहां बुंदेलखंड में बारिश ने किसानों फिर से ठगा है वहीं बाकी प्रदेश के किसान धान के पौधे लगाने की तैयारी में हैं।

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के  महानिदेशक प्रो चंद्रिका प्रसाद ने किसानों को धान के पौधों को र्सनई और ढैंचा के साथ लगाने की सलाह दी है। उनके मुताबिक मौजूदा समय धान के  लिए बेहद अनुकूल है।

Advertisement
First Published - May 27, 2008 | 10:55 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement