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कोई लौटा दे रियल एस्टेट के बीते हुए दिन

Last Updated- December 07, 2022 | 6:40 AM IST

रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी की मार के चलते डेवलपर्स कंपनियों को विदेशों से ऋण उगाही करने में दिक्कत आने लगी और इस कारण एनसीआर के डेवलपर्स के पास परियोजनाओं के विकास के लिए अपने संसाधनों और एडवांस बुकिंग से मिली राशि का सहारा बाकी रह गया है।


मैपस्कों बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक राजीव सिंगला ने बिजनेंस स्टैंडर्ड को बताया कि हमारी कंपनी नई योजनाओं को शुरु करने के लिए एंडवास बुकिंग का सहारा ले रही है। इसके लिए हमें आईपीओ को लाने की जरुरत महसूस नहीं हो रही है।

पैरामांउट ग्रुप के विपणन प्रमुख कुलभूषण गौड़ का कहना है कि हमारी कंपनी के पास नई योजनाओं को शुरु करने के लिए पहले से ही पर्याप्त मात्रा में फं ड उपलब्ध है, और हमें निवेश के लिए पैसा जुटाने के लिए देश के बाहर जाने की जरुरत नहीं है।

प्रॉपर्टी पंडितों का मानना है कि भारत के रियल एस्टेट में देश- विदेश का र्कोई बड़ा निवेशक हाथ डालने को तैयार नहीं है। इसके बावजूद एनसीआर की डेवलपर्स कंपनियां रियल एस्टेट में फिर से चमक आने की उम्मीद के साथ नई परियोजनाओं को शुरु कर रहीं है।

श्री ग्रुप के निदेशक सुदीप अग्रवाल का कहना है कि ऋण की बढ़ी हुई दरों को रियल एस्टेट के लिए यथावत ही रखा जा रहा है। इसलिए रेपो रेट और सीआरआर के बढ़ने से ऋण लेने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सुदीप अग्रवाल का कहना है कि इस समय रियल एस्टेट सेक्टर में भले ही मंदी चल रही हो लेकिन जल्द ही यह सेक्टर पहले की तरह ही चमक जाएगा।

कैसी होगी आगे की डगर

एनसीआर की डेवलपर्स कंपनियों ने आने वाले दिनों में गंभीर हालातों से बचने के लिए नई युक्तियों को खोज निकाला है। इस बाबत सुदीप का कहना है कि नई योजनाओं को शुरु करने के लिए जोखिम ऋणों की ओर ध्यान लगाया जा सकता है। अगर हालात और बिगड़ जाते है तो आईपीओ की पहल की जाएगी।

इस बाबत एसवीपी ग्रुप इंडिया लिमिटेड के सीएमडी राजीव जिंदल का कहना है कि अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो भी जाती है तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता क्योकि नई योजनाओं की शुरुआत करने वाली कंपनी को अगर ऋण लेना होगा तो वह लेगी, चाहे ब्याज दर कुछ भी हो।

First Published - June 19, 2008 | 9:36 PM IST

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