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पंजाब: संकट में छोटे उद्योग

Last Updated- December 08, 2022 | 12:43 AM IST

पंजाब के उद्योग पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में मिल रहे प्रोत्साहन और कच्चे माल की कीमतों में उतार चढ़ाव जैसी समस्याओं का सामना पहले से ही कर रहे हैं।


अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा आर्थिक मंदी के कारण इस राज्य के उद्योगों पर संकट और गहरा गया है।

फेडरेशन ऑफ जालंधर इंडस्ट्रियल ऐंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरशरण सिंह ने कहा, ‘पंजाब के उद्यमी इस्पात और सीमेंट जैसे कच्चे पदार्थों की कीमतों में इजाफे से जूझ रहे थे और अब शेयर बाजार में आई मंदी और डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत में आई गिरावट ने उद्योगों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं। राज्य के उद्योगों को अपनी विस्तार योजनाओं को अंजाम देने के लिए पर्याप्त मात्रा में कर्ज नहीं मिल पा रहा है।’

सख्त वित्त बाजार, रुपये और कच्चे माल की कीमत में उतार-चढ़ाव न सिर्फ निर्यातकों के लिए समस्या बनी हुई है बल्कि इससे स्वदेशी बाजार को घरेलू बाजार पर पकड़ बनाए रखने में बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है, क्योंकि बाजार में चीन के उत्पादों की भरमार आ गई है।उन्होंने कहा कि यदि राज्य के उद्योगों की हालत में सुधार लाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तो वह दिन दूर नहीं जब पंजाब में औद्योगिक विकास दर मौजूदा 5 फीसदी से भी नीचे चली जाएगी।

हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। लेकिन अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में गिरावट आ रही है फिर भी देश में इस्पात को अन्य देशों की तुलना में अधिक उत्पादन लागत का सामना करना पड़ रहा है।

कई देशों ने तेल कीमतों में कमी लाने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल बाजार से ऋण हासिल करना अब, खासकर लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के बाद, बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। लीमन ब्रदर्स के दिवालिया हो जाने से बैंकिंग उद्योग में भय व्याप्त हो गया है।

शहर की एक दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी के प्रबंध निदेशक राजन चोपड़ा ने कहा कि रियल एस्टेट उद्योग को आर्थिक मंदी और बाजार में नकदी का अभाव होने से   बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

First Published - October 19, 2008 | 10:01 PM IST

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