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सेवा उद्योग पर उन्नयन शुल्क की पड़ी मार

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Last Updated- December 11, 2022 | 5:16 PM IST

दिल्ली में अब उन सभी नौ तरह की सेवाओं पर आधारित उद्योगों को 5,000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से बुनियादी ढांचा उन्नयन शुल्क देना होगा, जिन्हें औद्योगिक क्षेत्रों में संचालन की अनुमति लेनी है। इन सेवा गतिविधियों में सॉफ्टवेयर, आईटी सेवा, आईटीईएस, मीडिया, बायोटेकनॉलोजी/ मेडिकल, शोध एवं अनुसंधान और डिजाइन, शिक्षा सेवा और अन्य उद्योग (पैकेजिंग, सेनिटेशन सर्विस, टीवी व दूसरे इलेक्ट्रॉनिक की सर्विस/मरम्मत आदि) से जुड़ी गतिविधियां शामिल है।
इन 9 तरह की सेवा गतिविधियों को वर्ष 2020 में दिल्ली मास्टर प्लान 2021 की उद्योग सूची में शामिल कर उद्योग का दर्जा देकर दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में चलाने की अनुमति दी गई थी। इस अनुमति के लिए इन सेवा उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा उन्नयन शुल्क लेने का प्रावधान था और इसकी दर 5,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई थी। उत्तरी और पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इसी दर से यह शुल्क लागू किया। लेकिन दक्षिणी नगर निगम ने पिछले साल अगस्त महीने में यह शुल्क 5,000 रुपये से घटाकर 1,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया था। जिससे दक्षिणी नगर निगम के उद्यमियों को राहत मिली थी। हालांकि दिल्ली नगर निगम का एकीकरण होने के बाद अब दक्षिणी नगर निगम ने भी बुनियादी ढांचा शुल्क बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने का निर्णय लिया है। जिससे ओखला, मायापुरी, केशोपुर, तिलक नगर, मोहन कोऑपरेटिव जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सेवा गतिविधियों के संचालन की अनुमति लेने वाले उद्यमियों पर बढ़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर उन्नयन शुल्क का बोझ पडेगा।
लघु उद्योग भारती की दिल्ली इकाई के सचिव संजय गौड़ ने कहा कि उद्यमी उत्तरी और पूर्वी दिल्ली में भी यह शुल्क घटाकर 1,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने की मांग कर रहे थे। लेकिन एकीकृत नगर निगम ने राहत देने की बजाय दक्षिणी दिल्ली के उद्यमियों को मिल रही राहत को ही खत्म कर दिया। जबकि उद्योग इस समय बढते खर्चों से जूझ रहे हैं। अब 100 मीटर के के ही औद्योगिक भूखंड पर एक लाख की जगह पांच  लाख देने होंगे।

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First Published - July 27, 2022 | 1:07 AM IST

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