facebookmetapixel
Advertisement
क्या ईरान पर सबसे बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले: हम ‘लॉक्ड एंड लोडेड’, पर बातचीत भी जारी‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयासऑरिफ्लेम बेचेगी भारत में अपना विनिर्माण कारोबार, अकुम्स ड्रग्स की सहायक कंपनी प्योर एंड क्योर से हुआ समझौता₹9,200 करोड़ के IPO से कर्जमुक्त होगी मणिपाल हेल्थ, उत्तर भारत में विस्तार पर कंपनी का जोर: दिलीप जोसजून में लगातार दूसरे महीने क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2 लाख करोड़ पार, HDFC Bank और SBI का दिखा दबदबाICICI Bank ने डॉलर बॉन्ड से जुटाए $1 अरब, 2017 के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक बॉन्ड इश्यूओडिशा में बनेगा देश का पहला AI-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर, HCLTech करेगी ₹14,257 करोड़ का निवेशबंगाल को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, केंद्र के साथ तालमेल और निवेश पर रहेगा हमारा जोर: स्वप्न दासगुप्ता

हिमाचल में दवा बनाई, गुजरात में मुश्किल आई

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 1:05 AM IST

जिन दवा कंपनियों की हिमाचल प्रदेश में उत्पादन इकाइयां हैं, गुजरात में उनकी सेहत ठीकठाक नहीं दिख रही हैं।


गुजरात सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कानूनी मामला दायर किया है। मामला कुछ इस तरह है कि इन कंपनियों की हिमाचल प्रदेश के बद्दी में उत्पादन इकाइयां हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि बद्दी की इकाइयों से ये दोयम दर्जे की दवाइयां बना रही हैं।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में इन कंपनियों को इकाई लगाने के लिए कर में छूट मिली हुई है। जिसके चलते इन कंपनियों ने इस इस पहाड़ी प्रदेश का रुख किया है। गुजरात के खाद्य एवं दवा विभाग ने 2007-08 में गुजरात से 2,349 नमूने इकट्ठे किए हैं और वडोदरा की प्रयोगशाला में इन नमूनों का परीक्षण किया गया।

इन नमूनों में 2,025 नमूने ठीक पाए गए जबकि 324 नमूने गुणवत्ता के पैमाने पर खरे नहीं उतर पाए। इस तरह कुल उत्पादन में घटिया उत्पादों का अनुपात 13.79 फीसदी तक पहुंच गया। दूसरी ओर इस प्रयोगशाला में हिमाचल प्रदेश के बद्दी से 245 नमूने लिए गए जिनमें से 190 ठीक पाए गए जबकि 55 नमूने घटिया किस्म के पाए गए। इस तरह यहां पर बनने वाली दवाओं में घटिया दर्जे की दवाइयों का अनुपात 22.45 फीसदी हो गया।

इसी तरह 2006-07 में कुल 2,955 नमूनों का परीक्षण किया गया। इनमें से 2,570 तो गुजरात से लिए गए जिनमें से 385 नमूनों में कमी पाई गई। इस तरह उस साल क्वालिटी में 13.03 फीसदी की गिरावट आई। इसके उलट हिमाचल में बनी दवाओं में से 125 नमूने लिए गए जिनमें से 95 नमूने सही पाए गए तो 30 नमूनों की क्वालिटी का स्तर बहुत ही खराब पाया गया। इस तरह हिमाचल में बनी दवाओं की क्वालिटी में लगभग 24 फीसदी की कमी  पाई गई।

Advertisement
First Published - May 23, 2008 | 10:49 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement