facebookmetapixel
Advertisement
उदारीकरण के 35 साल: 1991 में सेंसेक्स में थीं जो 30 कंपनियां, उनमें अब 7 ही बचीं; बेंचमार्क सूचकांक में आया बड़ा बदलावबिज़नेस स्टैंडर्ड सर्वेक्षण: रीपो दर में बदलाव के नहीं आसार, अगली बैठक में हो सकता है बड़ा फैसलानिवेश में जोरदार उछाल या आंकड़ों का भ्रम? 4 परमाणु परियोजनाओं ने बदल दी पूरी तस्वीर45% घटा हाईवे निर्माण, पश्चिम एशिया संकट और बिटुमन की कमी बनी बड़ी वजहनई ईपीएफ योजना में बदला कायदा क्या है नुकसान और क्या है फायदा?IT Funds: जुलाई की रिकॉर्ड तेजी के बीच निवेशकों ने निकाला पैसा, मुनाफावसूली या रणनीति में बदलावMaruti Suzuki: रिकॉर्ड बिक्री से राजस्व चमका, लेकिन मार्जिन पर बढ़ती लागत का दबावEditorial: तेल, महंगाई और वैश्विक संकट के बीच ब्याज दरों पर विराम के आसारRBI की ‘इंतजार करो और देखो’ की रणनीति, ब्याज दरें स्थिर रहने के आसारजेनज़ी ने उजागर की खामी क्या लाभ ले पाएगा विपक्ष?

खाली पड़े होटलों के कमरे

Advertisement
Last Updated- December 09, 2022 | 10:32 PM IST

होटल उद्योग के लिए बुरे दिन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। महंगे और सुविधा युक्त होटलों का मुनाफा खासतौर पर घटने की आशंका है।


इनमें पांच सितारा डीलक्स होटल और पांच सितारा होटल भी शामिल हैं और यहां खाली पड़े कमरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

क्रिसिल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक होटल के कारोबार में सेंध लगने की वजह एक तो कमरों की मांग में आई कमी है और दूसरा यह कि विभिन्न शहरों में बड़ी तेजी से नए नए होटल खुलते जा रहे हैं।

इस रिपोर्ट में 12 शहरों को शामिल किया गया जिनमें आगरा, अहमदाबाद, जयपुर, कोलकाता, मुंबई, एनसीआर, पुणे समेत कुछ दूसरे शहर भी हैं।

इस शोध में पाया गया कि जहां पिछले कुछ सालों में होटल का कारोबार काफी फल फूल रहा था, वहीं इस बार कारोबार में जबरदस्त गिरावट आई है।

वर्ष 2008-09 में अब तक होटलों के कमरे जितने खाली रहे हैं, उतना पिछले एक दशक में कभी भी देखने को नहीं मिला है।

Advertisement
First Published - January 20, 2009 | 8:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement