facebookmetapixel
सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं, 2026 के लिए एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की स्ट्रैटेजीतरुण गर्ग बने ह्युंडै मोटर इंडिया के MD & CEO, पहली बार भारतीय को मिली कमानरुपये की कमजोरी, बाजार की गिरावट का असर; 2025 में सिमटा भारत के अरबपतियों का क्लबVodafone Idea Share: 50% टूट सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने चेताया; AGR मामले में नहीं मिली ज्यादा राहत2026 में 1,00,000 के पार जाएगा सेंसेक्स ? एक्सपर्ट्स और चार्ट ये दे रहे संकेतसिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएं

बेहाल दिल्ली के केमिकल कारोबारी

Last Updated- December 08, 2022 | 12:04 AM IST

चीन के ओलंपिक समाप्त होने के बाद भी यहां के केमिकल्स कारोबारियों का भय बरकरार है। रुपये की तुलना में डॉलर के मजबूत होने और तैयार माल की मांग न होने के कारण दिल्ली और उत्तर प्रदेश के केमिकल्स कारोबारियों के होश उड़ गए हैं।


दिल्ली की केमिकल मर्चेन्टाइल एसोसिएशन के अधिकारियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि रुपये के कमजोर होने से हमें आयात में ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर मांग में कमी आने से हमारे कारोबार पर दोतरफा मार पड़ रही है। पेइचिंग ओलंपिक के समय चीन ने पर्यावरण प्रदूषण के डर से केमिक ल्स के निर्यात पर रोक लगा रखी थी।

ऐसे में हमें यूरोपीय देशों से डेढ़ गुना मंहगी कीमत पर केमिकल का आयात करना पड़ रहा था। इससे केमिकल के कच्चे माल की कीमतों में  30 से 35 फीसदी की बढ़ोत्तरी होने के कारण हमारी मांग में उसी अनुपात में कमी आ गई थी। अब जबकि ओलंपिक की समाप्ति के बाद चीन द्वारा निर्यात शुरु किया जा चुका है।

मांग न होने से हमें तैयार माल की कीमतों में कमी करनी पड़ रही है। बची हुई कसर रुपये के कमजोर होने से पूरी हो गई है। हालात ये हैं कि तैयार माल को बेचने के लिए हमें अपने मार्जिन में 60 फीसदी तक की कमी करनी पड़ी है।

दिल्ली में केमिकल्स का कारोबार क रने वाले मुन्ना भाई बताते है कि दिल्ली के आस-पास के औद्योगिक इलाकों में भी केमिकल्स की आपूर्ति रुकी हुई है। ऐसे में विदेशों से मंहगा आयात कर लेने के बाद हमारे माल को खरीदने के लिए उपभोक्ता नहीं मिल रहे हैं। पिछले एक साल में हमारा कारोबार लगभग 50 फीसदी तक घट गया है।

नोएडा स्थित न्यू दिल्ली केमिकल्स कॉर्पोरेशन के अजय ने बताया कि मंदी से सभी उद्योग प्रभावित हैं। ऐसे में पेंट और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योग भी केमिकल्स की मांग नहीं कर रहे है।

First Published - October 15, 2008 | 10:18 PM IST

संबंधित पोस्ट