टेलीविजन के सामने तालियों की गड़गड़ाहट, शोर-शराबा, आश्चर्य, सीटियों की आवाजें और खुशी के आंसुओं के साथ अगर आप थक गए होंगे तो फिर सोचिए कि मुंबई की झोपड़पट्टी में सोमवार की सुबह क्या कुछ हुआ होगा क्योंकि इसे वैश्विक पहचान मिली है।
स्लमडॉग मिलियनेयर के जरिए भारतीयों को कुल आठ ऑस्कर मिले हैं। हालांकि 10 करोड़ डॉलर का कारोबार करने वाली यह फिल्म ब्रितानी निर्मित है और उसका स्टाइल भले ही हॉलीवुड का है, पर आत्मा बॉलीवुड की ही है।
स्लमडॉग के कई असंभव अभिनेता हैं – कूटनीतिक लेखक, एक ऐसा बच्चा जो पड़ोस के पार्क में फुटबॉल पर किक लगाते ज्यादा देखा जाता है, बनिस्बत पड़ोसी के घर में टीवी स्क्रीन पर चमकते हुए। कम मशहूर यानी अनजानी सी अभिनेत्री, जिसका परदे से बाहर चेहरा ज्यादा चमकता है और झोपड़पट्टी के बच्चे, जो सचमुच झोपड़पट्टी के लगते हैं।
और रहमान एवं उनके साथी सचमुच स्टार हैं क्योंकि उन्होंने दुनिया को दिखाया कि बॉलीवुड के पास भी अच्छा संगीत है। भारत को यह पुरस्कार उस समय मिला है जब अर्थव्यवस्था में मंदी की बदौलत उसका खुद का विश्वास डगमगाने लगा है क्योंकि वह आगे की दिशा सही तरीके से देख नहीं पा रहा।
यह वैसे समय में भी आया है जब सिनेमा फेयर ज्यादा प्रायोगिक हो गया है क्योंकि अभिनेता अब चॉकलेट बॉक्स हीरो और अभिनेत्री कैंडी फ्लॉस हीरोइन नहीं रह गई हैं। ऐसे समय में भी जब निर्देशक बॉक्स ऑफिस पर छोटे बजट की फिल्म महत्वाकांक्षी नजरिए के साथ असंभव रूप से बनाने लगे हैं।
इनमें सभी सफल नहीं हो पाए हैं, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री की किस्मत बौध्दिकता, अच्छी कहानी और अच्छे दर्शकों की बदौलत चमकी है। स्लमडॉग को मिले पुरस्कार के बाद बॉलीवुड को वह पहचान मिली है, जो सालों से उसे नहीं मिली थी।
इस सफलता से हालांकि यह भी पता चल गया है कि भारत में प्रतिभा का खजाना मौजूद है, अच्छे अभिनेता हैं, संगीत है, कहानी है और सिनेमा में इतनी क्षमता है कि वह भौगोलिक सीमा, भाषायी सीमा और संस्कृति की सीमा को पार कर अपना जौहर दिखा सकता है।
लॉस एंजलिस के स्टूडियो में भारतीय बिजनेस हाउस का निवेश तथा हिंदी सिनेमा के महारथियों की हॉलीवुड तक पहुंचने की कोशिशों और भारतीय प्रॉडक्शन में अंतरराष्ट्रीय स्टार के इस्तेमाल पर पिंक और येलो दोनों तरह के प्रेस बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं दिखे थे।
कुछ साल पहले निर्देशक शेखर कपूर ने, जिन्होंने भारत और हॉलीवुड दोनों के लिए फिल्में बनाई हैं, कहा था कि भारत और चीन की आबादी में बढ़ोतरी के मद्देनजर वैश्विक सिनेमा को इनकी जरूरतों का ख्याल भी रखना होगा।
स्लमडॉग मिलियनेयर को मिले अथाह सम्मान की बदौलत हॉलीवुड और बॉलीवुड के बीच मेलजोल बढ़ने की उम्मीद है। कुछ साल पहले तक हमारी ब्यूटी क्वीन में कुछ नहीं देखने वाले दुनिया के लोगों को जिस तरह की सुंदरता देखने को मिली, वैसा ही हम अपने स्टार और कहानी की बदौलत कर सकते हैं।