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नेपाल की राजनीति में ‘जेन ज़ी’ का उभार: विदेशों में बसे नेपाली और नई पार्टियों ने बदला सत्ता समीकरण

नेपाल में सरकार के खिलाफ युवाओं एवं नई पीढ़ी के लोगों (तथाकथित ‘जेन ज़ी’) के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी थी

Last Updated- December 05, 2025 | 9:29 PM IST
Nepal Genz Protests

नेपाल में इस वक्त सरसरी तौर पर सब कुछ सामान्य लग रहा है। काठमांडू के दरबार मार्ग पर रीजेंसी वॉच प्राइवेट लिमिटेड नेपाल में कार्टिये, ओमेगा, ऊब्लो और अन्य लक्जरी ब्रांडों की अधिकृत विक्रेता है। यहां फिर चहल-पहल शुरू हो गई है और लोग खरीदारी के लिए पहले की तरह ही आने लगे हैं। ग्राहक नेपाल की स्टारबक्स कही जाने वाली ‘हिमालयन जावा’ के स्टोरों में भी उमड़ रहे हैं। ‘हिमालयन जावा’ की जिसकी स्थापना 1999 में हुई थी और यहां उपलब्ध गुल्मी में उगाई जाने वाली कॉफी का लुत्फ न केवल स्थानीय धनाढ्य बल्कि भारत और भूटान के लोग भी उठाने लगे हैं। इन दोनों ही कंपनियों को 9 सितंबर, 2025 को स्थानीय प्रशासन से पत्र मिलने के बाद परिचालन बंद करना पड़ा था।

नेपाल में सरकार के खिलाफ युवाओं एवं नई पीढ़ी के लोगों (तथाकथित ‘जेन ज़ी’) के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इन उग्र विरोध प्रदर्शन ने महज 40 घंटे में नेपाल की नींव हिला दी। वहां प्रधानमंत्री को कुर्सी खाली करनी पड़ी, संसद निलंबित कर दिया गया और कई सार्वजनिक स्थानों को आगजनी के हवाले कर दिया गया। नेपाल के उच्चतम न्यायालय की स्याह पड़ी टूटी खिड़कियां और कारों का जला हुआ मलबा उस डरावने उग्र विरोध प्रदर्शन के जख्म का अब भी एहसास करा रहे हैं।

मगर एक बात है जो नेपाल को खास बना देती है। यह देश कितनी ही उथल-पुथल या संकट से क्यों नहीं गुजर रहा हो मगर इसके लोगों के तार बाहरी दुनिया से हमेशा जुड़े रहे हैं। नेपाल के लोग दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय श्रम बल में सबसे अधिक सक्रिय रहे हैं। लगभग 300 से अधिक वर्षों से लाहुरे (वे लोग जो महाराजा रणजीत सिंह की सेना में शामिल हुए और बाद में अपनी युद्ध क्षमता की बदौलत पूरी दुनिया में पहुंच गए) से लेकर खाड़ी देशों और दुनिया के अन्य हिस्सों में श्रमिकों के रूप में उनकी मौजूदगी रही है। विदेश से आने वाली कमाई नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देती है। इसमें भारत में नेपाल का अनौपचारिक श्रम बल शामिल नहीं है जिनका कोई आधिकारिक लेखा-जोखा नहीं है।

‘जेन ज़ी’ प्रदर्शनकारियों ने कई मांगे रखीं जिनमें 5 मार्च को होने वाले आगामी आम चुनावों में प्रवासी नेपाली को मताधिकार का अधिकार दिया जाना भी शामिल था। नेपाल से बाहर रहने वाले इसके लोगों की ताकत का अंदाजा टेलीविजन की मशहूर हस्ती रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उभार से लगाया जा सकता था। इसका गठन जून 2022 में हुआ था। उसी वर्ष नवंबर में हुए आम चुनावों में आरएसपी ने 20 सीटें जीतीं। प्रवासी नेपालियों ने उनकी पार्टी में व्यापक नैतिक और भौतिक निवेश किया मगर इससे भी बढ़कर इस पार्टी ने नेपाली समाज में असंतोष की कमजोर नस पकड़ ली।

मगर लामिछाने के लिए आगे का सफर अच्छा नहीं गुजरा। गृह मंत्री रहते हुए उन पर धोखाधड़ी, सार्वजनिक धन के गबन और अन्य अपराधों के आरोप लगे। इस समय वह जेल में हैं मगर आरएसपी के कार्यकारी अध्यक्ष बने हुए हैं।

जब ‘जेन ज़ी’आंदोलन शुरू हुआ तो लोग तुरंत इस नतीजे पर पहुंच गए कि कहीं न कहीं लामिछाने का प्रभाव ‘जेन ज़ी’आंदोलन को हवा दे रहा है। मगर ऐसा नहीं था। कई राजनीतिक कार्यकर्ता लामिछाने के उदय का गवाह रहे थे उन्हें लगा कि वे भी कुछ ऐसा कारनामा कर सकते हैं। उनमें से एक कुलमान घीसिंग हैं जो फिलहाल ऊर्जा मंत्री हैं। घीसिंग ने इस सप्ताह की शुरुआत में अपनी राजनीतिक पार्टी उज्यालो नेपाल शुरू की थी।

घीसिंग एक प्रौद्योगिकीविद् हैं। वह एक प्रशिक्षित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं जिन्होंने जमशेदपुर में पढ़ाई करने के बाद नेपाल में कई जलविद्युत परियोजनाओं का निरीक्षण किया और बाद में नेपाल विद्युत प्राधिकरण पर निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें मिली। मगर बकाया बिजली बिल की वसूली के मामले पर पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली के नेतृत्व वाली सरकार से तनातनी के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। बिजली बिल के मद में बकाया राशि लाखों में थी। घीसिंग ने उन लोगों की बिजली काटने का आदेश दिया जिन्होंने इसके लिए भुगतान नहीं किया था। ओली ने इस कदम को एक संभावित खतरे के रूप में देखा।

‘जेन ज़ी’ के जनमत संग्रह ने उन्हें वर्तमान सरकार में मंत्री बनने के लिए समर्थन मिल गया। उनकी लोकप्रियता उनकी दक्षता से जुड़ी हुई है। घीसिंग ने नेपाल के निष्क्रिय बिजली क्षेत्र को व्यवस्थित किया और 18 घंटे तक चलने वाली बिजली कटौती समाप्त की। मगर इस कहानी में एक और मोड़ यह है कि मंत्री के रूप में वह अमेरिका समर्थित मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) के प्रमुख भी हैं जिसने नेपाल के भौतिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से बिजली और सड़क क्षेत्र आधुनिक और बेहतर बनाने के लिए अनुदान दिया है। यहां पर यह कहना मुश्किल है कि प्रवासी नेपाली की ताकत काम कर रही है या अमेरिकी शक्ति मगर घीसिंग को दोनों का ही समर्थन हासिल है।

अभी लामिछाने की आरएसपी और उज्यालो नेपाल पार्टी के बीच राजनीतिक समन्वय के लिए बातचीत चल रही है। मगर यह व्यवस्था काम कर गई तो मुख्यधारा के राजनीतिक दल प्रवासी नेपालियों की अदृश्य शक्ति, अमेरिका के अघोषित लेकिन दृढ़ समर्थन और मौजूदा राजनीतिक स्थिति के खिलाफ एक जुट हो सकते हैं। कई लोगों का तर्क है कि यह बड़े पैमाने पर काठमांडू और आसपास के शहरी क्षेत्रों में अधूरी महत्त्वाकांक्षाओं का परिणाम है। लेकिन नेपाल का डिजिटल बुनियादी ढांचा व्यापक है और छोटे गांवों में भी लोग ‘जेन ज़ी’हीरो कुलमान घीसिंग के बारे में जानते हैं। उन्हें काठमांडू के लोकप्रिय मेयर बालेन शाह का समर्थन प्राप्त है।

क्या घीसिंग-लामिछाने के बीच तालमेल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी), नेपाली कांग्रेस और प्रचंड के नेतृत्व वाले 10-दलीय गठबंधन नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर-आधारित संगठन के लिए एक वास्तविक चुनौती पेश कर सकता है? कहना मुश्किल है। लेकिन यह तो कहा ही जा सकता है कि नेपाल में आम चुनाव में मुश्किल से 90 दिन बचे हैं जिसे देखते हुए नेपाल की चुनावी प्रणाली इतने कम समय में व्यवस्थित नहीं हो सकती।

नेपाल की चुनाव प्रणाली में प्रत्यक्ष चुनाव और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली दोनों के प्रावधान हैं। इन परिस्थितियों में किसी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है और यह लगभग तय है कि गठबंधन सरकार ही एक विकल्प रह जाएगा। इसका मतलब राजनीतिक विवाद और निहित स्वार्थ की राजनीति की वापसी होगी। नेपाल में पिछले कुछ महीनों से उठापटक तो बहुत हुई है मगर वास्तविक बदलाव बहुत कम नजर आ रहा है।

First Published - December 5, 2025 | 9:23 PM IST

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