केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया और इंटरनेट कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर आने वाली सामग्री की जिम्मेदारी लें ताकि बच्चों, महिलाओं और अन्य ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट को सुरक्षित बनाया जा सके।
डिजिटल न्यू पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) कॉन्क्लेव 2026 में वैष्णव ने कहा, ‘इन मंचों को सतर्क होना होगा और यह समझना होगा कि हजारों वर्षों में मानव समाज ने जिन संस्थाओं में विश्वास बनाया है उसे मजबूत करना कितना जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि जो सोशल मीडिया मंच अपने उपयोगकर्ताओं को हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाएंगे, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
वैष्णव ने कहा, ‘अगर इन सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया तो उन्हें निश्चित रूप से जिम्मेदार माना जाएगा क्योंकि अब इंटरनेट की प्रकृति बदल चुकी है। किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या व्यक्तित्व का उपयोग कर बिना उसकी अनुमति के सिंथेटिक सामग्री नहीं तैयार की जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अब बड़े बदलाव का समय आ गया है और समाज को जिस बदलाव की जरूरत है उसमें सभी मंच को सहयोग करना चाहिए।
इससे पहले इसी महीने एआई इम्पैक्ट सम्मेलन के दौरान वैष्णव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया था कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों और इंटरनेट मध्यस्थों के साथ बातचीत कर रही है। इस बातचीत का उद्देश्य एक निश्चित उम्र से कम बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर आयु-आधारित पूर्ण प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार करना है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘अब यह कई देशों द्वारा स्वीकार किया जा चुका है कि आयु-आधारित नियमावली होनी चाहिए। यह हमारे डीपीडीपी (डिजिटल निजी डेटा सुरक्षा) अधिनियम का हिस्सा था जब हमने युवा लोगों के लिए उपलब्ध सामग्री में आयु-आधारित अंतर तय किया।’
उन्होंने बताया कि सिर्फ बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंच पर प्रतिबंध ही नहीं बल्कि सरकार इंटरनेट मध्यस्थों के साथ डीपफेक सामग्री को को रोकने के बेहतर समाधान पर भी चर्चा कर रही है। एक निश्चित उम्र से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध की मांग उस समय तेज हुई जब ऑस्ट्रेलिया इस तरह का प्रतिबंध राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने वाला पहला देश बन गया। आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने भी राज्य में इस नियम को लागू करने की संभावना के संकेत दिए, जिसके बाद अन्य राज्यों ने भी इसे अपनाने पर विचार करने की बात कही।
इस महीने की शुरुआत में, मंच को अपने यहां पोस्ट की गई सामग्री के लिए अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2021 के मध्यस्थता दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता में संशोधन किया। इसके तहत सोशल मीडिया और इंटरनेट मध्यस्थों को आपत्तिजनक और अवैध सामग्री हटाने का समय 36 घंटे से घटाकर सिर्फ तीन घंटे कर दिया गया। नए नियम 20 फरवरी से प्रभावी हो गए।
गुरुवार को, वैष्णव ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट मंच को कंटेंट क्रिएटर्स के साथ राजस्व साझा करना चाहिए ताकि पारंपरिक मीडिया, बड़े और छोटे इन्फ्लूएंसर्स, प्रोफेसर, शोधकर्ता और न्यूज चैनल, जो अपनी सामग्री इन मंचों पर अपलोड करते हैं लेकिन दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं, उन्हें इनका लाभ उचित रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अब हर जगह यह सिद्धांत होना चाहिए और सामग्री बनाने वाले लोगों के साथ राजस्व की उचित हिस्सेदारी साझा होनी चाहिए।’