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व्यापार गोष्ठी: बीएस हिंदी का एक वर्ष

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:10 AM IST

आज से ठीक एक बरस पहले हिन्दी पत्रकारिता में ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने जो बिरवा रोपा था, वह एक बरस का हो गया है। 

इस अवधि में हिंदी में आर्थिक पत्रकारिता के नए सोपान कायम करने वाला यह देश के एकमात्र ऐसा अखबार है, जो एक साथ सात बड़े शहरों से निकलता है। यही वजह है कि आज यह समूचे उत्तर भारत ही नहीं बल्कि पश्चिम में महाराष्ट्र और पूर्व में पश्चिम बंगाल में भी बिजनेस की धड़कन बन चुका है।
जो भी कहेंगे, सच ही कहेंगे

इस एक साल में अर्थजगत की होनी-अनहोनी, दीवाली-दिवाला, मंदी-मंडी, शेयर फीवर-फियर, तेल और तेल की धार, महंगाई जैसी स्तब्धकारी घटनाओं का गवाह यह अखबार रहा है। फरवरी में शुरुआत के वक्त तेजी की जिस गड़गड़ाहट पर जब सब उम्मीदों के आसमान में डोर फैला रहे थे, गुलाबी सपने दिखा रहे थे, तब हम अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति बता रहे थे। 

बिजनेस स्टैंडर्ड ही देश का वह पहला अखबार था, जिसने मार्च में ही यह आगाह कर दिया था कि डेरिवेटिव सौदों में भारतीय कंपनियों और बैंकों की टांग फंसी हुई है और यह घाटा उनको अगली तिमाहियों में भारी पड़ने वाला है और इसका असर शेयर बाजारों पर भी पड़ना तय है। यह हुआ भी और जो लोग ख्वाबों में थे, उन्हें तगड़ा झटका लगा। लेकिन हमने आपके सामने सही तस्वीर पेश की।

…ताकि भटक न जाएं मुसाफिर 

हमने पाठकों को कंपनियों के विश्लेषण और बाजार के रुझान बताए। यह भी कि बाजार नियामक सेबी के किस कदम से क्या असर होगा? सरकार के किसी फैसले का असर किस सेक्टर की किस कंपनी पर कैसा होने जा रहा है, यही हमने बताया। 

हमने अपने पाठकों को ‘स्मार्ट इन्वेस्टर’ बनाने का प्रयास किया- देश दुनिया की हर घटना का बारीक विश्लेषण करके। हमने लगभग रोजाना ही वायदा और विकल्प का अगले दिन का रुख बताने की कोशिश की। सच पूछिए तो बिजनेस स्टैंडर्ड पाठकों के लिए ‘दिशासूचक’ बना।

नजर आएगी मुकम्मल तस्वीर  

हमने पूरे साल न केवल शेयर बाजार बल्कि कमोडिटी बाजार का भी तफसरा पेश किया। हर जिंस, चाहे कृषि हो या औद्योगिक, को हमने छुआ। उसके उत्पादन, मांग, आपूर्ति, खपत, भंडार और आगे की संभावनाओं को हमने अपने व्यापारी पाठकों के लिए पेश किया। चीनी, सीमेंट, प्लास्टिक, केमिकल, बेस मेटल, तेल, चावल-चीनी, गेहूं से लेकर चाय-कॉफी, रबर या मसाले हर जिंस के बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड ने यथार्थपरक रपट और विश्लेषण किए।
छोटी नावों के लिए भी है पतवार

व्यापार जगत की दिक्कतें, परेशानियां, उनके मुद्दे और मांगों को हमने यथोचित जगह देने की कोशिश की है और आगे भी करते रहेंगे। लीमन का दिवाला पिटने पर जब अमेरिका से मंदी का तूफान आया तो भारत में भी बड़े-बड़े जहाज हिलने लगे थे। 

छोटी नावें उलट-पुलट हो रही थीं। तब हर कोई बड़े जहाजों के लिए सरकार से राहत की गुहार लगा रहा था। पर हमने छोटी नावों का दर्द भी सबके सामने रखा। छोटे और मझोले उद्योगों की पीड़ा जोरदार तरीके से उठाई। नतीजा यह हुआ कि न केवल सरकार बल्कि रिजर्व बैंक भी उनकी मदद के लिए आगे आया।
गागर में छलकता ज्ञान का सागर

देश का एकमात्र संपूर्ण आर्थिक दैनिक होने की बात को सही साबित करते हुए बिानेस स्टैंडर्ड ने अगर गंभीर मसलों पर जिरह आयोजित की तो ज्ञान गागर से युवा छात्र वर्ग को बिजनेस से अद्यतन करने का प्रयास किया। हमने अपने पाठकों को तकनीक के क्षेत्र में देश-दुनिया में हो रहे बदलावों से रूबरू करवाया। 

हर सप्ताह वाहनों और टेक्नोलॉजी तथा कारोबारी शिक्षा की अलख जगाई। यह निर्विवाद है कि प्रतिष्ठित और दूरदर्शी लेखकों ने संपादकीय पृष्ठ पर देश-दुनिया की आर्थिक हलचल पर जो विश्लेषण किया, वह बेजोड़ है और एक तरह से यह बताता रहा कि अर्थव्यवस्था या किसी मसले विशेष पर कैसी साफ या धुंधली तस्वीर बन रही है और चीजें किस दिशा में जा रही हैं। प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने बिानेस स्टैंडर्ड के पाठकों को हमेशा ही स्तरीय, जानकारीपरक और विश्लेषणात्मक नजरिये से समृद्ध किया है। 

पाठकों का अनमोल प्यार

पाठकों ने एक साल में हमें कितना प्यार दिया है, यह ‘व्यापार गोष्ठी’ के लिए हर सप्ताह नियमित रूप से मिलने वाले ढेरों पत्रों से पता चलता है। 

हर विषय पर पाठकों ने दिल खोल कर अपनी राय व्यक्त की और यह बता दिया कि देश का आम पाठक राजनीतिक रूप से जितना परिपक्व है, उतना ही वह आर्थिक रूप से भी समझदार है। वह अर्थ, अर्थ तत्त्व, आर्थिक घटना और अर्थव्यवस्था को बखूबी समझता है और खुल कर अपनी राय प्रकट करना जानता है। व्यापार गोष्ठी इसे साबित करती है।

साथी हाथ बढ़ाना…

अगला साल चुनौतियों से भरा है। इसमें चुनाव होने हैं, मंदी का असर और छंटनी का कहर होना है। दुनिया की दशा से भारत की दिशा तय होनी है या भारत की दशा दुनिया की दिशा तय करेगी। हम पाठकों के साथ हैं। 

हम आपको इस संकटकाल में बगैर लाग-लपेट के सही खबर देते रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे। हमें आपका प्यार और विश्वास चाहिए।
अखबार ने जगाया आत्मविश्वास

बैंकिंग क्षेत्र के ट्रेड यूनियन से जुड़े रहने की वजह से मुझे हमेशा से वित्तीय समाचारों और आंकड़ों के बारे में जानने की उत्सुकता बनी रहती थी। 

एक दिन मैंने एक मित्र के घर पर बिजनेस स्टैंडर्ड (हिंदी) देखा और उसे पढ़ा। उस दिन के बाद से मुझमें एक गजब का आत्मविश्वास आ गया। बिानेस स्टैंडर्ड हिन्दी दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की करे, ऐसी कामना है।

निसार अहमद खान
द्वारा- पंजाब ऐंड सिंध बैंक, रातु रोड, मेट्रो गली, रांची, झारखंड

उम्मीद से बेहतर- क्या कहना!

इसमें कोई शक नहीं है कि पत्र ने पाठकों के दिल को छुआ है। पाठकों के पत्र के साथ-साथ व्यापार गोष्ठी, जिरह, ज्ञान गागर, तकनीकी तरकश आदि पाठकों से तारतम्यता स्थापित करने का अनूठा तरीका है। संपादकीय मंडल के लिए बस इतना कहूंगा-

धूप चाहे रंग बदले,
डोर ये पतंग बदले,
जब तलक जिंदा है कलम,
हम तुम्हें मरने न देंगे।

हर्षवर्द्धन कुमार
बी-62, सिंगल स्टोरी, विजय नगर, दिल्ली- 110009

उत्साहित करता है बिजनेस स्टैंडर्ड

बिजनेस स्टैंडर्ड के एक वर्ष पूर्ण होने पर संपादक मंडल को ढ़ेरों बधाइयां। इस अखबार से आम आदमी भी आर्थिक दुनिया से जुड़ गया है। दुनिया भर की आर्थिक जानकारियों से आम आदमी वाकिफ होने लगा है। यकीन मानिए, सुबह ही जब मैं बिानेस स्टैंडर्ड पढ़ता हूं, तो तरोताजा हो जाता हूं। हालांकि मेरा कारोबार छोटा है, फिर भी बिानेस स्टैंडर्ड हमारी काफी मदद करता है।

सतीश कुमार भाटिया
अमृतसर, पंजाब
मध्य प्रदेश

खबरों की व्यवस्थित प्रस्तुति

बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी व्यवसाय, कारोबार, उद्योग क्षेत्र की राष्ट्रीय और विदेशी खबरों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करता है। इसमें क्षेत्रीय समाचार, साप्ताहिक विशेष कॉलम, बाजार के उतार चढ़ाव की खबरें, महत्वपूर्ण विषयों पर विद्वानों के आलेख पढ़ने को मिलते हैं। व्यापार गोष्ठी के माध्यम से निर्धारित विषय पर विभिन्न विचारों से अवगत होने का अवसर मिलता है। 

प्रो. के. डी. सोमानी
सी437, ऋषिनगर विस्तार, उौन, मध्य प्रदेश

मेरी राय में बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी ने हम पाठकों को व्यापार गोष्ठी, आपका पक्ष, संपादकीय और कई ज्ञानवर्द्धक लेखों के जरिये जानकारी और सुझाव दिया है। 

अच्छी सेवा भाव और निष्पक्ष रहकर बिजनेस स्टैंडर्ड ने पाठकों के साथ न्याय किया है। व्यापार गोष्ठी, आपका पक्ष आदि कॉलमों के जरिये पाठकों को अखबार में शामिल होने का मौका मिलता है। अखबार से जुड़े हर लोगों का मैं आभारी हूं। 

ओ. पी. मालवीय
वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन, क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश

रविवार को भी दें मानसिक खुराक

आर्थिक पत्रकारिता का दैदीप्यमान नक्षत्र है बिजनेस स्टैंडर्ड। एक बड़े हिन्दी भाषी वर्ग को जटिल आर्थिक मुद्दों की सहज और आकर्षक प्रस्तुति देकर जागरुकता बढ़ाने का मिशन बन गया है यह पत्र। 

राजनीति और प्रशासन अब तक इसी कमजोरी की वजह से अपना स्वार्थ सिद्ध कर पा रहा है। अपेक्षा यह है कि महत्वपूर्ण आंकड़ों के लिए सप्ताहांत में कम से कम आधा पेज तो होना ही चाहिए। शिकायत यह है कि छह दिनों की बेहतरीन मानसिक खुराक के बाद रविवार को भूखा रहना बेहद अखरता है।

डॉ. जी. एल. पुणताम्बेकर
रीडर, वाणिज्य विभाग, डॉ. हरिसिंह गौर वि. वि., सागर, मध्य प्रदेश

अलग पहचान बनाई है बीएस ने

सर्वप्रथम तो बिजनेस स्टैंडर्ड के हिंदी संस्करण की पहली वर्षगांठ पर हमारी बधाई स्वीकार करें। भोपाल में पहले दिन से हम बिजनेस स्टैंडर्ड के नियमित पाठक और प्रशंसक हैं। 

व्यापार गोष्ठी और आज का सवाल पाठकों की भागीदारी सुनिश्चित तो करते हैं, किं तु विलंब से। मेरा निवेदन या सुझाव, आप जो भी समझें, यह है कि हमारे अपने अखबार में निवेश विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों को और अधिक प्रोत्साहन और स्थान दिया जाना चाहिए। 

रमेश चन्द्र मनयां
चेयरमैन, कल्पतरू मल्टीप्लायर लि., शेयर ब्रोकर, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर ऐंड डी पी, भोपाल, मध्य प्रदेश
राजस्थान

आर्थिक पत्रों की संभावना बढ़ी

शुरुआत से ही अंग्रेजी समाचार पत्रों का दबदबा रहा है। लंबे समय से हिन्दी आर्थिक समाचार पत्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस वर्ग की जरूरत को समझा। पत्र ने अपनी उत्कृष्ट सामग्री और विश्लेषण विशेषज्ञता की वजह से एक साल में ही अपना एक मुकाम हासिल किया है। 

नरेंद्र शर्मा
ग्राम-पोस्ट- भलोठ, झुंझुनु, राजस्थान, पिन- 333515

आर्थिक गतिविधियों का आईना

भ्रष्टाचार, बलात्कार, कत्ल जैसे जुर्म से संबंधित समाचारों के बीच एक वर्ष पहले बिानेस स्टैंडर्ड हिंदी का आगमन ऐसा हुआ कि आम आदमी भी आर्थिक गतिविधियों को आसानी से समझने लगा। अनमोल अखबार देने के लिए बिजनेस स्टैंडर्ड के संचालकों और पूरी टीम का हार्दिक आभार।

विकास कासट
373, विवेक विहार, सोडाला, जयपुर, राजस्थान

गर्व होता है श्रेष्ठ अखबार से जुड़कर

एक वर्ष पहले बिजनेस स्टैंडर्ड सहित अंग्रेजी के दैनिकों पढ़ते देख कर अन्य लोगों सेर् ईष्या और स्वयं में आत्म लघुता का बोध पैदा हो गया था। बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी जैसे कारोबार से जुड़े दैनिक ने इस अभाव की पूर्ति कर एक शून्य को भरा है। आज हिन्दी भाषा के बीएस-हिंदी का पाठक स्वयं को अन्यों के बराबर पाता है। 

एक वर्ष से आपका पक्ष, व्यापार गोष्ठी आदि बहुत से स्तंभ पाठकों को अपने विचार रखने का अवसर सुलभ करवाते हैं। हमारे इस दैनिक का रंग, आकर्षक साज , प्रभावपूर्ण लेखन, सुन्दर मुद्रण हमें आह्वलादित करता है कि हम एक श्रेष्ठ पत्र से जुड़े हुए हैं। मेरी और मेरे पाठक परिवार की ओर से प्रथम वर्षगांठ पर बिजनेस स्टैंडर्ड हिन्दी को बधाइयां। 

ठाकुर सोहन सिंह भदौरिया
सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी, भदौरिया भवन, मुख्य डाकघर, बीकानेर, राजस्थान
आर्थिक जगत का खवैया

बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी दैनिक पत्र एक साल बखूबी पाठकों के बीच प्रसारित होता रहा। संपादक मंडल शुभकामनाओं के पात्र हैं।  अपनी भाषा और लिपि में आर्थिक जगत की महत्वपूर्ण जानकारी को शब्दों में व्यक्त कर इस दैनिक ने विश्व आर्थिक जगत को नजरों के सामने रख दिया।  वह दिन दूर नहीं, जब आम हिन्दीवासी अपनी राय से विश्व आर्थिक जगत को प्रभावित करने में समर्थ होगा। 

राजेन्द्र प्रसाद मधुबनी
व्याख्याता, मनोविज्ञान, स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, मधुबनी, बिहार
कारोबार के लिए हिन्दी एक सौगात

श्रीमती कलावती
टेक्सटाइल डिजाइनर, जैन समाधि गली, टोहाना, फतेहाबाद, हरियाणा
बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी के बारे में जितना भी कहूं, कम है। इसने एक साल इसने कारोबार के रुझान जानने की उत्सुकता पैदा किया है। स्त्रियां इस क्षेत्र में कुछ करना चाहती है। उनके लिए यह अखबार सोने पर सुहागा बन कर आया है। मैं तो यही कहूंगी कि-

जबसे है हिंदी संस्करण आया,
हमारे लिए हजारों खुशियां लाया,
जो थे सपने अब तक हमारे रंगहीन,
उनको इसने कर दिया है रंगीन,कहां तक करूं मैं शब्दों में बयां,
बस इतने में ही मानो पूरा जहां।
यह है एक संपूर्ण आर्थिक अखबार

रमेशचंद्र कर्नावट
ए-426, एमआईजी-1, महानंदानगर, उज्जेन, मध्य प्रदेश
न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के आर्थिक परिदृश्य की ताजातरीन जानकारी देने में इस पत्र ने अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। अत्यंत सरल, सुग्राह्य भाषा में प्रभावी तरीके से प्रस्तुत आलेख और अन्य जानकारी मूलक पठनीय सामग्री ने बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी को लोकप्रियता के शीर्ष पर पहुंचा दिया है।

पाठकों के विचारों की सक्रिय सहभागिता ने इसके आकर्षण में चार चांद लगा दिए हैं। समाचार पत्र का एक वर्ष कब बीत गया, पता ही नहीं चला। साल के हर दिन सोमवार के अंक की प्रतीक्षा रही।
मातृभाषा का किया है सम्मान

राजेश कपूर
एसबीआई, एल.एच.ओ. लखनऊ, उत्तर प्रदेश
अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुए 60 साल से अधिक हो गए, परंतु आर्थिक समाचार पत्रों में आज भी अंग्रेजी का वर्चस्व भारत में बरकरार है। बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी ने हमारी देश की मातृभाषा का सम्मान ही नहीं किया है, बल्कि अंग्रेजी न जानने वालों तक अपनी पहुंच बनाई है। 

इस दौरान बिजनेस स्टैंडर्ड ने जो काम किया है, उसकी जितनी भी सराहना की जाए, कम है। बधाई के साथ इसके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। इसकी लोकप्रियता पूरे देश में फैल रही है। खेद सिर्फ इस बात का है कि यह कदम एक दशक पहले क्यों नहीं उठाया गया।
…और यह है अगला मुद्दा
सप्ताह के ज्वलंत विषय, जो कारोबारी और कारोबार पर गहरा असर डालते हैं। ऐसे ही विषयों पर हर सोमवार को हम प्रकाशित करते हैं व्यापार गोष्ठी नाम का विशेष पृष्ठ। 

इसमें उस विषय पर उमड़ते-घुमड़ते आपके विचारों को आपके चित्र के साथ प्रकाशित किया जाता है। साथ ही, होती है दो विशेषज्ञों की राय। 

इस बार का विषय है- 

अंतरिम बजट आपकी उम्मीदों पर खरा उतरा है ? 

अपनी राय और अपना पासपोर्ट साइज चित्र हमें इस पते पर भेजें:

बिजनेस स्टैंडर्ड (हिंदी),
नेहरू हाउस, 4 बहादुरशाह जफर मार्ग, 
नई दिल्ली-110002
फैक्स नंबर- 011-23720201 

या फिर ई-मेल करें
goshthi@bsmail.in

आशा है, हमारी इस कोशिश को देशभर के हमारे पाठकों का अतुल्य स्नेह मिलेगा।

First Published : February 15, 2009 | 11:20 PM IST