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टीका आपूर्ति में सुधार जरूरी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:47 AM IST

अमेरिका सरकार ने घोषणा की है कि उसके जिन नागरिकों ने टीके की दो खुराक ले ली हैं उन्हें उनकी पिछली खुराक के आठ महीने बाद नि:शुल्क बूस्टर खुराक दी जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि समय के साथ टीकों का प्रभाव कम हुआ है, हालांकि प्रमाण ये भी हैं कि टीकों की दो खुराक लेने वाले लोगों की कोविड-19 से मृत्यु के मामलों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। अमेरिका का निर्णय उस समय आया है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि अमीर देशों को निकट भविष्य में टीकों की अतिरिक्त खुराक की अनुशंसा नहीं करनी चाहिए ताकि विकासशील देशों को भी टीका आसानी से मिल सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस कदम को ‘अनैतिक’ और ‘नितांत अनुचित’ बताया है। निश्चित रूप से इससे यह बहस एक बार पुन: शुरू हो जाएगी कि कैसे अमीर देशों, खासतौर पर जो बाइडन के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया भर में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में गैरजिम्मेदारी का परिचय दिया है। जिन देशों में कम टीकाकरण हुआ है वहां महामारी के प्रसार को लेकर ऐसी लापरवाही उचित नहीं।

बाइडन प्रशासन के इस कदम के बीच भारत सरकार को भी इस बात को याद करना चाहिए कि टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के मामले में पर्याप्त पहल नहीं की जा रही हैं। बीते कुछ सप्ताहों में देश की टीकाकरण संबंधी गतिवधियों में तेजी आई है। उदाहरण के लिए ग्रामीण भारत में जहां पहले टीकाकरण को लेकर हिचक ज्यादा थी वहां अब तेजी से टीके लग रहे हैं। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा है कि भारत की टीका आपूर्ति अगस्त तक 26.6 करोड़ और दिसंबर तक 28.5 करोड़ खुराक के अधिशेष में होगी।
यह आंकड़ा चौंकाता है क्योंकि यह सरकार द्वारा पहले जताए गए अनुमान से करीब 10 करोड़ खुराक अधिक है जबकि सरकार महीने के अंत तक टीकों की 51.6 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने के लक्ष्य को हासिल करने से चूक गई है। निश्चित तौर पर टीकाकरण की गति में भी तेजी आई है। बीते सप्ताहों के दौरान छुट्टियों और सप्ताहांत के अलावा केवल एक दिन ऐसा रहा जब 45 लाख से कम टीके लगे। हालांकि अगर इस वर्ष के अंत तक वयस्कों का टीकाकरण पूरा करना है तो इसके लिए टीकाकरण की गति को दोगुना करना होगा।

टीका आपूर्ति की मुख्य समस्या यह है कि सरकार चुनिंदा भारतीय टीका उत्पादकों पर अत्यधिक निर्भर है। टीकों के मामले में आत्मनिर्भरता की अवधारणा पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है। हाल ही में नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि एमआरएनए टीके तथा जॉनसन ऐंड जॉनसन के टीके जल्दी ही भारत में लगाए जाएंगे। जॉनसन ऐंड जॉनसन के टीकों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमारा इरादा इन तीन विदेशी टीकों को भारत में लाने का है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और सहयोग में हमारे भरोसे को दर्शाता है।’ यदि ऐसा होता है तो यह अच्छा बदलाव है। पहले ही काफी समय गंवाया जा चुका है। सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आपूर्ति शृंखला की वे दिक्कतें दूर हुईं या नहीं जिनके चलते नोवावैक्स टीका नहीं आ सका जबकि इस समय तक उसकी लाखों खुराक उत्पादित होने की संभावना जताई गई थी। निश्चित रूप से यह अत्यंत अविवेकपूर्ण बात है कि देश में टीका निर्माण की भारी क्षमता का इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि लाइसेंसिंग या विधिक दिक्कतों ने राह रोक रखी है। यह लालफीताशाही बहुत पहले समाप्त हो जानी चाहिए थी। भारत को टीका आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसा न केवल अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी है बल्कि शेष विश्व को टीका निर्यात करने के लिए भी यह जरूरी है।

First Published : August 20, 2021 | 12:08 AM IST