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बाध्यता हो पूरी, तभी मिलेगी बैंक गारंटी से छूट

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Last Updated- December 05, 2022 | 9:11 PM IST

हमें अपने उस सामान का रीइम्पोर्ट करवाना पड़ा, जिसे हमने एक्सपोर्ट किया था। इस बाबत हमने 14 नंवबर, 1995 को जारी हुए नोटिफिकेशन नंबर 15895 के तहत क्लीयरेंस मांगा था।


हमने 17 अगस्त 2007 को बिल ऑफ इंट्री दायर की थी, लेकिन कस्टम विभाग को उस सामान के एग्जमिनेशन में थोड़ा वक्त लग गया। उन्होंने वह सामान 18 सिंतबर 2007 को ही छोड़ा। इसके बाद हमने वह सामान अपनी फैक्टरी में लाया और उसे ठीक किया।


लेकिन जब हम उस सामान को रीएक्सपोर्ट करने की अनुमति मांगी तो हमसे कस्टम विभाग ने कहा कि रीएक्सपोर्ट के लिए दी गई छह माह की समय-सीमा पूरी हो चुकी है। हमें बताएं कि छह महीने की अवधि कब से तय की जाती है, बिल ऑफ इंट्री दायर करने के समय से या सामान के छोड़े जाने के दिन से?


केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने अपने तीन जून, 1997 को जारी हुए सर्कुलर संख्या 1497 में साफ किया है कि नोटिफिकेशन में रीएक्सपोर्ट के लिए बताई गई छह माह की समय सीमा सामान को छोड़े जाने के दिन से तय होनी चाहिए, न कि बिल ऑफ इंट्री के दायर किए जाने के दिन से। अगर इसके उलट हो भी जाता है तो भी सामान को रीइम्पोर्ट करने के छह माह के भीतर रीएक्सपोर्ट कर देना चाहिए।


वैसे, कस्टम कमिश्नर इस तारीख में छूट दे सकता है, लेकिन तब भी रीएक्सपोर्ट, रीइम्पोर्ट के साल भर के भीतर हो जाना चाहिए। इसलिए अगर आपके छह माह की अवधि की बीत चुकी है, तब भी आप संबंधित अधिकारी से संपर्क करके उससे एक्सटेंशन की गुहार कर सकते हैं। अगर अनुमति मिल गई तो आप अपने सामान को रीएक्सपोर्ट कर सकते हैं।


हमारा एक एक्सपोर्ट हाउस हैं। हमें एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) स्कीम के तहत कस्टम के सामने बैंक गारंटी पेश करने से छूट मिली हुई है। हमारे कस्टम्स हाउस एजेंट का कहना है कि कस्टम विभाग हम से एक हलफनामा मांग रहा है कि पहले जारी किए गए किसी निर्यात लाइसेंस की निर्यात बाध्यता (एक्सपोर्ट ऑबलिगेशन) को पूरा करने में हम नाकामयाब नहीं रहे हैं। क्या इस तरह का कोई नियम है कि हमारे लिए वह हलफनामा देना जरूरी है?


सीबीईसी ने अपने सर्कुलर नंबर 582004 में साफ कहा है कि बैंक गारंटी पेश करने से छूट तभी मिल सकती है, जब निर्यात लाइसेंस के होल्डर ने पहले जारी किए गए एडवांसईपीसीजी लाइसेंस के तहत दी गई सभी निर्यात बाध्यताओं को पूरा किया हो। अगर डीजीएफटी या कस्टम विभाग को ऐसे किसी लाइसेंस का पता चल गया, जिसके तहत निर्यात बाध्यताओं को पूरा नहीं किया गया है तो बैंक गारंटी को पेश करने से मिली छूट वापस ले ली जाएगी।


नावा शेवा कस्टम विभाग ने 13 मार्च, 2008 को जारी अपने नोटिस संख्या 252008 में साफ-साफ शब्दों  में कहा है कि ईपीसीजी के तहत लाइसेंस होल्डर को यह हलफनामा देना पड़ेगा कि वह पहले जारी किए गए किसी ईपीसीजी या एडवांस लाइसेंस की निर्यात बाध्यता को पूरा करने में विफल नहीं रहा है।


साथ ही, उसे उस हलफनामे में यह भी लिखना पड़ेगा कि उस सीमा शुल्क कानून, 1962, केंद्रीय उत्पाद कानून, 1944, विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) , 1999, विदेशी व्यापार (विकास व नियंत्रण) कानून, 1992 के तहत पिछले तीन सालों में कोई सजा नहीं मिली है। 


क्या हम रूस में किए गए निर्यात के आधार पर डयूटी फ्री इम्पोर्ट ऑथोराइजेशन (डीएफआईए) की मांग कर सकते हैं? हमने यह निर्यात रुपये में भुगतान की शर्त पर किया था।


बिलकुल। डाइरेक्टर जर्नल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने एक अक्टूबर, 2007 को जारी अपनी पॉलिसी सर्कुलर नंबर 132007 के जरिये साफ किया है कि आपको अपने निर्यात के आधार पर डीएफआईए मिल सकता है। लेकिन इसके लिए आपको कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ेगा।

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First Published - April 10, 2008 | 11:35 PM IST

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