पहले बैंक हुआ करता था और फिर बारी आई माइक्रो फाइनैंस की। या फिर यह कुछ और था।
आदेश चाहे जो हो, आज के दौर में बैंकों को माइक्रो क्रेडिट की तरफ नजर दौडाने को मजबूर किया जा रहा है क्योंकि माइक्रो फाइनैंस इकाइयों को मजबूत करने की गरज से बैंकों से संपत्तियां निकाली जा रही हैं। आज माइक्रो फाइनैंस इकाइयों का कुल कर्ज पोर्टफोलियो 6000 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू गया है।
ऐसे में बैंक इसमें अपनी हिस्सेदारी के लिए कतार में खड़े दिख रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यस बैंक ने कुछ व्यक्तियों को सीधा कर्ज देने की बाबत समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जबकि यूनियन बैंक व भारतीय स्टेट बैंक जैसे बैंकर स्वयंसहायता ग्रुप को कर्ज दे रहे हैं।
यस बैंक के ग्रुप अध्यक्ष (कॉरपोरेट फाइनैंस व डेवलपमेंट बैंकिंग) सोमक घोष ने कहा – इसमें अभी तक नुकसान की खबर नहीं है और मुंबई के चेंबूर, ठाणे और वर्ली स्थित उनकी तीन शाखाओं में डिफॉल्ट की दर सिर्फ दो फीसदी है।
माइक्रो फाइनैंस के लिए बैंक के समर्पित डिविजन संपन्न ने अब तक 2500 लोगों को 50 हजार रुपये तक की उधारी दी है और लेनदार को इसका भुगतान एक साल में करना होता है। इसने लैटिन अमेरिकी माइक्रो फाइनैंस इकाई ऐक्शन के साथ गठजोड़ किया है, जिसे ग्रामीण बैंक मॉडल से इतर व्यक्ति विशेष को उधार देने की विशेषज्ञता हासिल है।
ग्रामीण बैंक मॉडल के तहत मुख्य रूप से ग्रुप को रकम उधार दी जाती है। सम्पन्न द्वारा नियुक्त किए गए कामगारों को ऐक्शन ट्रेनिंग देती है। इसके तहत उधार लेने वालों की पहचान और भुगतान करने की उनकी क्षमता की सूचना हासिल करने की बाबत सिखाया जाता है।
पूरे साल के दौरान उन्हें अलग-अलग मॉडल के बारे में बताया जाता है। पहले रोजाना कलेक्शन से शुरुआत की जाती है, फिर से साप्ताहिक में बदला जाता है, इसके बाद पखवाड़े में और फिर महीने में।
पिछले महीने इसने उधार लेने वालों को जमा करने (डिपॉजिट) की सुविधा देने की शुरुआत की है और अब संपन्न के खाताधारकों के लिए माइक्रो बीमा पैकेज के संबंध में बीमा कंपनियों से बातचीत कर रही है।
घोष का कहना है कि मुंबई का संपन्न पायलट प्रोजेक्ट की तरह है और इसके बाद अगले दो साल के भीतर दिल्ली, पुणे और इसके आसपास के इलाकों को घेरे में ले लिया जाएगा। साफ तौर पर यस बैंक उधार लेने वालों से लिए जाने वाले ब्याज दर के बारे में बात नहीं करता।
उसका कहना है कि दूसरी माइक्रो फाइनैंस इकाइयां कितना ब्याज ले रही हैं, वह उससे तुलना जरूर करता है। घोष का कहना है कि प्राथमिकता वाले क्षेत्र के लिए लक्ष्य पूरा करने का यह सीधा तरीका है, जैसा कि हर बैंक से लक्ष्य पूरा करने की अपेक्षा की जाती है।
माइक्रो फाइनैंस के थिंक टैंक साधन के मैथ्यू टाइटस ने कहा – अगर नियामक की पाबंदियां हटा दी जाए तो बैंक भी माइक्रो फाइनैंस द्वारा दिए गए कर्ज पोर्टफोलियो की उपलब्धि आसानी से हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शाखाओं के लिए पूंजी की जरूरत से संबंधित मुद्दा है, जिसके लिए अलग-अलग तरह के क्लाइंट केलिए अनुभाग के हिसाब से रास्ता खोजा जाना चाहिए। लेकिन उनका कहना है कि जैसा यस बैंक ने अपने संचालन के लिए किया, वैसा सभी बैंक शायद ही करें।
यस बैंक ने अपने काम को बैंकिंग और माइक्रो फाइनैंस में बांट दिया है। उनका कहना है कि वे और ज्यादा आसानी से इसे अंजाम दे सकते हैं अगर माइक्रो फाइनैंस इकाइयों या फिर स्वयंसहायता समूह को उधार देने की बात हो।
इस बाबत यस बैंक ने अद्भुत यात्रा या घटनाक्रम की मिसाल कायम की है जैसा इनका पीछा करने वालों के पास पाया भी जा सकता है और नहीं भी। छह महीने पहले माइक्रो फाइनैंस इकाई बंधन ने मुंबई में अपना संचालन शुरू किया है।
इस दौरान करीब 7 हजार लोगों ने इसका फायदा उठाया है और लोन पोर्टफोलियो चार करोड़ रुपये का है। इस तरह कुल लोन पोर्टफोलियो 600 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है और 50 लाख ग्राहकों का आधार भी बना है। हर महीने यह 150 करोड़ रुपये उधार दे रहा है और 75 हजार लेनदारों (उधार लेने वालों) को भी जोड़ रहा है।
बंधन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्र शेखर का कहना है कि बैंक तब तक ऐसा करने में सक्षम नहीं हो सकते जब तक कि वे समानांतर संचालन न करें।
एचडीएफसी, एबीएन एमरो और स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे बैंक माइक्रो फाइनैंस इकाइयों को प्राथमिकता वाले सेक्टर में अपना लक्ष्य पूरा करने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रहे हैं। उनमें से कुछ स्वयंसहायता समूह को उधार दे रहे हैं।
एसकेएस के कंसल्टेंट रहे सीताराम राव ने कहा – वित्तीय अन्तर्वेशन जिंदाबाद यानी बैंकों के माइक्रो फाइनैंस के आइडिया को हमारा सलाम। उन्हें सीधे उधार देना चाहिए, जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दर पर पाबंदी नहीं लगाता। यह काफी दिलचस्प होगा।