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फार्मास्युटिकल्स विभाग वित्त वर्ष 27 में बल्क ड्रग्स, मेडिकल उपकरणों और फार्मास्युटिकल के लिए पीएलआई योजना के तहत उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य बना रहा है। इन योजनाओं के लिए इस साल आवंटन में 2.24 प्रतिशत की अधिक वृद्धि की गई है। वित्त वर्ष 27 के लिए बजट अनुमानों में तीन योजनाओं के लिए संयुक्त आवंटन 2,499.84 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि वित्त वर्ष 26 के बजट अनुमान में यह आवंटन 2,444.93 करोड़ रुपये था।
बजट के दस्तावेजों के अनुसार फार्मास्युटिकल्स विभाग वित्त वर्ष 27 में बल्क ड्रग्स के विनिर्माण के लिए 500 टन क्षमता जोड़ने का लक्ष्य बना रहा है, जिससे इस वर्ष 1,250 करोड़ रुपये के ड्रग्स का कुल उत्पादन होगा।
इस योजना का मकसद उन जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआई) का देश में ही उत्पादन करना है, जिनका इस्तेमाल खास दवाएं बनाने में होता है और जिनके कोई विकल्प नहीं हैं। इससे एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता के कारण आपूर्ति में रुकावट का खतरा कम होगा। यह कदम तब उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने चीनी विनिर्माताओं द्वारा आक्रामक रूप से किए जा रहे दामों में कमी और डंपिंग से निपटने के लिए पेनिसिलिन-जी, एमोक्सिसिलिन और 6-एपीए जैसे एपीआई के लिए न्यूनम आयात मूल्य (एमआईपी) की सीमा तय की थी।
विभाग बल्क ड्रग्स योजना के दायरे में नहीं आने वाले फार्मास्युटिकल के लिए पीएलआई योजना के तहत वित्त वर्ष 27 में 1.08 लाख करोड़ रुपये की दवाओं के उत्पादन करने भी लक्ष्य बना रहा है। पिछले साल इस योजना के लिए 90,000 करोड़ रुपये के उत्पादन लक्ष्य से यह वृद्धि हुई है, जो बायोफार्मास्युटिकल्स, जटिल जेनेरिक ड्रग्स, पेटेंटेड ड्रग्स या पेटेंट समाप्ति के करीब वाली दवाओं, ऑटो-इम्यून ड्रग्स और एंटी-कैंसर ड्रग्स जैसी उच्च-मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
यह पिछले साल इस योजना के लिए 90,000 करोड़ रुपये के उत्पाद लक्ष्य की तुलना में ज्यादा है। इसमें बायोफार्मास्युटिकल, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक दवाएं, पेटेंट वाली दवाएं या जिन दवाओं का पेटेंट खत्म हो चुका है, ऑटो-इम्यून वाली दवाएं और कैंसर रोधी दवाओं जैसी अधिक मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। बीएस