भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को शेयर बाजार के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के विश्लेषकों का कहना है कि यह समय शेयरों में निवेश करने का है। उनका अनुमान है कि निफ्टी 50 इंडेक्स साल के अंत तक 28,100 अंक तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से करीब 8 प्रतिशत ज्यादा है।
बर्नस्टीन के मैनेजिंग डायरेक्टर वेनुगोपाल गरे ने को-राइटर निखिल अरेला के साथ लिखी रिपोर्ट में कहा कि हाल के महीनों में कमजोर कंपनियों की कमाई और साधारण बजट के कारण बाजार दबाव में था। लेकिन अब ट्रेड डील के बाद बाजार का माहौल (सेंटिमेंट) बेहतर होगा और यही तेजी की वजह बनेगा। उन्होंने कहा कि निफ्टी पहले 26,500 के स्तर तक जा सकता है और फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ेगा। साल के अंत तक उनका टारगेट 28,100 बना हुआ है।
बर्नस्टीन ने यह भी चेतावनी दी कि बड़ी कंपनियों द्वारा ज्यादा फंड जुटाने और कमाई में ज्यादा सुधार की गुंजाइश न होने से तेजी के बाद रिटर्न सीमित रह सकते हैं।
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सेक्टर के लिहाज से बर्नस्टीन ने कहा कि बैंकिंग (फाइनेंशियल्स), आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में निवेश करना बेहतर रहेगा। उनका कहना है कि ट्रेड डील की शर्तों का इन सेक्टरों पर खास असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड से जुड़े शेयरों में भी कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की थी। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी टैक्स 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। बर्नस्टीन ने कहा कि कुछ सेक्टर जैसे ऑटो और मेटल्स पर अलग से टैक्स रहेगा, लेकिन कुल मिलाकर टैक्स दर 20–25 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। इससे भारत की स्थिति आसियान देशों के बराबर हो जाती है और चीन के मुकाबले मजबूत होती है।
बर्नस्टीन ने 2026 की शुरुआत में आईटी सेक्टर को लेकर जो ओवरवेट राय दी थी, वह अब भी कायम है। उनका कहना है कि आईटी सेक्टर का अमेरिका से सबसे ज्यादा जुड़ाव है। बेहतर भारत-अमेरिका रिश्तों से आईटी सेवाओं पर अतिरिक्त जांच और नए टैक्स का खतरा कम होगा।
बर्नस्टीन ने कहा कि इस साल डॉलर के हिसाब से भारत का रिटर्न कमजोर रहा है, जिसका एक बड़ा कारण हाल के महीनों में रुपये की गिरावट भी है। ट्रेड डील के बाद रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है। इससे ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनेगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगी।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।