प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
क्या सरकार ने बजट 2026 में सीनियर सिटीजन के लिए कुछ किया है? यह सवाल बजट के बाद से सीनियर सिटीजन और दूसरे लोगों के मन में घूम रहा है। इसपर एक्सपर्ट का कहना है कि बजट 2026 में सीधे या फिर कहें तो परोक्ष रूप से सीनियर्स के जीवन को आसान बनाने की कोशिश की गई है। वे आगे अब शायद पुराने और बोझिल डॉक्यूमेंट्स, लंबी कतारें और टैक्स के झंझट थोड़े कम महसूस करेंगे। इसके अलावा डॉक्टर की अपॉइंटमेंट्स, निवेश की चिंता और मेडिकल खर्च, सब थोड़ा-बहुत आसान, थोड़ा शांतिपूर्ण हो सकता है। आइए समझते हैं कि कौन से कौन बदलाव का फायदा सीनियर सिटीजन को भविष्य में मिलने वाला है।
केयर हेल्थ इंश्योरेंस के COO मनीष डोडेजा कहते हैं, “जब टैक्स के नियम आसान होते हैं, तो बुजुर्गों की आर्थिक और मानसिक चिंता भी कम होती है। कम मुश्किल प्रक्रियाओं की चलते से वे टैक्स की उलझनों में फंसने के बजाय अपने इलाज और हेल्थ प्लानिंग पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं। इससे मेडिकल खर्च, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और लंबे समय के इलाज की योजना बनाना उनके लिए ज्यादा आसान हो जाता है।”
वहीं NPV & Associates LLP की पार्टनर प्रियल शाह कहती हैं, “टैक्स में दी गई राहत और ऑटोमेशन से बुजुर्गों के लिए टैक्स से जुड़े काम आसान हो जाएंगे। लेकिन यह तभी सही मायने में काम करेगा, जब सीनियर्स को डिजिटल सुविधाएं आसानी से मिलें और उन्हें इसकी सही जानकारी हो, क्योंकि आज भी कई बुजुर्गों को टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने में परेशानी होती है।”
शाह कहती हैं, “आयातित दवाओं पर छूट से सीनियर्स के लिए जरूरी और जीवन बचाने वाले इलाज ज्यादा किफायती बनेंगे। इससे लंबे समय में हेल्थकेयर से जुड़ा तनाव भी कम हो सकता है।”
जबकि मनीष कहते हैं, “कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से बुजुर्गों के इलाज का खर्च कम हो सकता है। इससे परिवारों पर पैसों का दबाव घटेगा और महंगे इलाज तक पहुंच थोड़ी आसान हो जाएगी।”
Also Read: Budget 2026: आरडीआई फंड में 20,000 करोड़ रुपये का बड़ा इजाफा, रिसर्च और इनोवेशन पर सरकार का जोर
मनीष के मुताबिक, “लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम होने से बुजुर्गों की आमदनी ज्यादा स्थिर रहेगी। इससे उन्हें सही समय पर पैसे मिल पाएंगे और इलाज या बचाव से जुड़ी हेल्थकेयर पर खर्च करना आसान हो जाएगा।”
प्रियल कहती हैं, “ऑटोमेशन से जरूरत से ज्यादा टैक्स कटने की अनिश्चितता कम होगी और बार-बार फॉलो-अप की झंझट भी घटेगी। इससे रिटायर हो चुके लोगों की नकदी स्थिति बेहतर होगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।”
मनीष कहते हैं कि सिंगल-विंडो फाइलिंग से बुजुर्ग निवेशकों के लिए अपने पैसों का मैनेजमेंट करना आसान हो जाएगा। इससे हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल खर्चों के लिए उन्हें नियमित रूप से फंड मिलते रहेंगे।
वहीं प्रियल शाह का कहना है, “केंद्रीकृत फाइलिंग से गलतियां और बार-बार फॉर्म जमा करने का जोखिम कम होगा। हालांकि यह व्यवस्था तभी सही तरह से काम करेगी, जब इसे यूजर-फ्रेंडली बनाया जाए और सभी पेयर्स से जोड़ा जाए।”
मनीष डोडेजा बताते हैं, “ITR रिवाइज की डेडलाइन बढ़ाने से बुजुर्गों को हेल्थ संबंधी बाधाओं या एडवाइज़र पर निर्भरता के बावजूद बदलाव करने की सुविधा मिलेगी। इससे गलतियों और पेनल्टी का डर कम होगा।”
प्रियल शाह का कहना है, “31 मार्च तक की एक्सटेंशन से सीनियर्स को समय मिलेगा कि वे इंटरेस्ट इनकम, फॉर्म 26AS मिस्टमैच या लेट सर्टिफिकेट सुधार सकें। इससे उनकी आय सुरक्षित रहेगी और मानसिक तनाव घटेगा।”
मनीष डोडेजा कहते हैं,“ITR रिवाइज करने की तारीख बढ़ने से बुजुर्गों को यह सुविधा मिलेगी कि वे स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों या एडवाइजर पर निर्भर रहने के बावजूद जरूरी सुधार कर सकें। इससे गलतियों और पेनल्टी का डर भी कम होगा।”
वहीं प्रियल शाह का कहना है, “31 मार्च तक की मोहलत मिलने से सीनियर्स को इंटरेस्ट इनकम, फॉर्म 26AS में गड़बड़ी या देर से मिले सर्टिफिकेट को ठीक करने का समय मिलेगा। इससे उनकी आमदनी सुरक्षित रहेगी और मानसिक तनाव भी कम होगा।”
निष्कर्ष यही निकलता है कि दोनों एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि कुल मिलाकर बजट 2026 में टैक्स और हेल्थकेयर से जुड़े फैसले बुजुर्गों को बड़ी राहत देते हैं। टैक्स की आसान प्रक्रिया, दवाओं पर मिली छूट, ऑटोमेटेड TDS सिस्टम और फाइलिंग में सहूलियत से उनके पैसे और सेहत दोनों को संभालना पहले से आसान हो सकता है।