अर्थव्यवस्था

निर्यात प्रोत्साहन के लिए घटा धन, कपड़ा और चमड़ा उद्योग पर दबाव बढ़ा

आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं पर खर्च में भारी कटौती

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श्रेया नंदी   
Last Updated- February 03, 2026 | 9:41 AM IST

केंद्रीय बजट 2026-27 में कुछ प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं पर खर्च कम कर दिया गया है। यह ऐसे समय में किया गया है, जब निर्यातक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, जिसमें अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां शामिल हैं। बजट दस्तावेजों के मुताबिक वाणिज्य विभाग की प्रमुख रेमिशन ऑफ ड्यूटीज ऐंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (आरओडीटीईपी) योजना के लिए आवंटन में 45 प्रतिशत की कटौती करके वित्त वर्ष 2027 के लिए 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने 18,233 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

गारमेंट्स और मेड-अप्स के लिए इसी तरह की योजना रिबेट ऑफ स्टेट ऐंड सेंट्रल टैक्सेज ऐंड लेवीज (आरओएससीटीएल) पर केंद्र से कुल व्यय आगामी वित्त वर्ष में आधा होकर 5,000 करोड़ रुपये हो गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान संशोधित अनुमान 10,010 करोड़ रुपये था, जबकि वर्ष की शुरुआत में बजट अनुमान 10,170 करोड़ रुपये था।

दोनों योजनाओं का उद्देश्य निर्यातकों द्वारा को इनपुट दिए गए कर की प्रतिपूर्ति करना है। ये योजनाएं इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि करों का निर्यात नहीं किया जाना चाहिए। इन करों की पहले प्रतिपूर्ति नहीं की जाती थी। हाल ही में स्वीकृत एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) के लिए आवंटन 2,300 करोड़ रुपये था। नए बजट के मुताबिक इस मिशन पर 2,250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और पहली बार निर्यातकों और श्रम केंद्रित क्षेत्रों जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग वस्तुओं और समुद्री उत्पादों का समर्थन करने के उद्देश्य से छह साल की अवधि के लिए ईपीएम को मंजूरी दी थी, जो अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के कारण चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

ईपीएम को दो उप-योजनाओं के माध्यम से कार्यान्वित किया जाना है, जिसमें वित्तीय सहायता के लिए 10,401 करोड़ रुपये का निर्यात प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाने के लिए 14,659 करोड़ रुपये की योजना शामिल है। अभी तक तीन योजनाएं शुरू की गई हैं।

First Published : February 3, 2026 | 9:41 AM IST