दुनिया भर में बढ़ते तनाव और भारत के सामने खड़ी सुरक्षा चुनौतियों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि अब तैयारी अधूरी नहीं रहेगी। वित्त वर्ष 2026–27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 7.84 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह कुल केंद्रीय बजट का 15 प्रतिशत है और पिछले साल के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। यह रकम देश की अनुमानित जीडीपी का करीब 2 प्रतिशत बैठती है। संदेश साफ है कि भारत अपनी सुरक्षा पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
इस बार बजट का सबसे मजबूत हिस्सा कैपिटल खर्च है। हथियार, लड़ाकू विमान, युद्धपोत, मिसाइल, रडार और आधुनिक सैन्य तकनीक पर खर्च को 21.8 प्रतिशत बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब कुल रक्षा खर्च का 28 प्रतिशत हिस्सा सीधे सेना की ताकत बढ़ाने में लगेगा। यह बदलाव खर्च की क्वालिटी में सुधार का संकेत देता है। मौजूदा भू राजनीतिक हालात को देखते हुए रिपोर्ट मानती है कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए यह बढ़ोतरी बेहद जरूरी थी और आने वाले वर्षों में रक्षा कैपेक्स में लगातार दो अंकों की बढ़त देखने को मिल सकती है।
सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि वित्त वर्ष 2026–27 के कैपिटल एक्विजिशन बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कंपनियों से ही खरीदा जाएगा। इसका मतलब यह है कि हथियार और सिस्टम अब बड़े पैमाने पर भारत में ही बनाए जाएंगे। एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट कहती है कि इंडस्ट्री से बातचीत में संकेत मिले हैं कि बजट अब किसी भी तरह से हथियार खरीद में रुकावट नहीं बनेगा। यानी आने वाले समय में ऑर्डर की रफ्तार तेज हो सकती है और घरेलू रक्षा उद्योग को सीधा फायदा मिलेगा।
वित्त वर्ष 2026 में अब तक डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दे दी है। यह पिछले साल के 2.2 लाख करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है। ये मंजूरियां DAP 2020 के तहत दी गई हैं, जिनका मकसद घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा देना है। इनमें लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक, माइन काउंटर मेजर वेसल, आर्टिलरी के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम, गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम, भारतीय सेना के लिए ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और अस्त्र एमके टू मिसाइल जैसे अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं। इससे साफ है कि सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अब तेज हो चुकी है।
यूनियन बजट 2026–27 ने सरकार के इरादों को दोहराया है और रक्षा मंत्रालय अब ऑर्डर देने की प्रक्रिया में लगने वाला समय घटाने पर काम कर रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि इसका असर अगले चरण में दिखेगा और वित्त वर्ष 2027–28 में बड़े रक्षा ऑर्डर जमीन पर उतर सकते हैं। यानी अभी मंजूरी का दौर चल रहा है और जल्द ही ऑर्डर की बारिश होने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक HAL के लिए तेजस एलसीए एमके वन ए के 97 विमानों का बड़ा ऑर्डर, तेजस एमके टू और एएमसीए जैसे भविष्य के फाइटर प्रोजेक्ट बेहद अहम हैं। Mazdock के लिए P75I के तहत छह पनडुब्बियों का प्रोजेक्ट करीब 700 अरब रुपये का बताया गया है। इसके अलावा P75 के तहत तीन अतिरिक्त पनडुब्बियां और P17B के तहत फ्रिगेट्स भी पाइपलाइन में हैं। यह सब नौसेना की ताकत बढ़ाने के साथ साथ घरेलू शिपयार्ड्स के लिए बड़ा मौका है।
रिपोर्ट कहती है कि BEL के लिए क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम, नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट और तेजस विमानों के लिए एवियोनिक्स पैकेज जैसे बड़े ऑर्डर सामने आ सकते हैं। PTC Industries ने टाइटेनियम मेटल के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ा ली है और अब देश में ही एविएशन ग्रेड टाइटेनियम बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। वहीं Solar Industries के लिए पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम और गोला बारूद की मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज का मानना है कि 3.3 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अप्रूवल के बाद रक्षा कंपनियों के सामने मजबूत ग्रोथ का रास्ता खुल चुका है। इसी भरोसे के साथ ब्रोकरेज ने HAL, BEL, Mazdock, Solar Industries, PTC Industries समेत कई रक्षा शेयरों पर खरीद की सलाह बनाए रखी है और इनके लिए ऊंचे टारगेट प्राइस तय किए हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक HNAL का टारगेट प्राइस 6,346 रुपये, BEL का 532 रुपये, Mazdock का 3,407 रुपये, Solar Industries का 16,600 रुपये और PTC Industries का टारगेट प्राइस 23,005 रुपये रखा गया है। इसके अलावा BDL के लिए 1,667 रुपये, BEML के लिए 2,453 रुपये और ZEN Technologies के लिए 1,800 रुपये का टारगेट दिया गया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।