आयकर विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में 2 लाख से अधिक कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील्स) (सीआईटी-(ए)) मामलों का निपटान करने का लक्ष्य रखा है। इसमें एक अहम संख्या का निपटान जनवरी तक हो चुका है। वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बजट के बाद बातचीत में कहा कि विभाग ने बीते वर्ष ऐसे 1.72 लाख मामलों का निपटान किया था।
अधिकारी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 20 जनवरी तक विभाग ने पहले ही 1.65 लाख सीआईटी (ए) मामलों का निपटान कर दिया है। वित्तीय वर्ष 25 में लगभग 5.4 लाख अपील मामले लंबित थे। इनमें लगभग 16.75 लाख करोड़ रुपये की विवादित कर मांग शामिल थी।
अधिकारी ने जुर्माने के मामले पर समझाया कि अब एक ही आदेश में मूल्यांकन और जुर्माना कार्यवाही संयुक्त की जाएगी। इससे अलग-अलग मुकदमेबाजी समाप्त हो जाएगी। दरअसल पहले ही 5.4 लाख मामलों में मूल्यांकन और जुर्माने को लेकर अलग अलग मुकदमेबाजी के 1-1.5 लाख मामले हैं। यदि करदाता अंडर-रिपोर्टिंग स्वीकार करते हैं, कर व ब्याज का भुगतान करते हैं और अपील छोड़ देते हैं। ऐसे में 50 प्रतिशत जुर्माना पूरी तरह से माफ कर दिया जाता है।
गलत रिपोर्टिंग मामलों के लिए जुर्माने को 200 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे अतिरिक्त कर के रूप में अधिक स्थान दिया गया है। अधिकारी ने कहा, ‘यदि आप सहमत होते हैं व भुगतान करते हैं तो करदाता को दंडित के रूप में ब्रांड किए बिना मामला बंद हो जाता है।’ उन्होंने कहा कि अपील और अभियोजन केवल तभी विकल्प बने रहते हैं जब विवाद हो।
अनुपालन को बढ़ावा बढ़ावा देने वाला अन्य प्रमुख कारक अपडेटिड रिटर्न सुविधा है। इससे अधिकारी ने ‘बेहद सफल’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के बाद लगभग 1.22 करोड़ अपडेटेड रिटर्न दाखिल किए गए हैं। इसमें करदाताओं को वर्गीकृत शुल्कों के साथ चार साल तक की विसंगतियों को स्वेच्छा से ठीक करने की अनुमति मिलती है।
हाल ही में आईटी और आईटी सक्षम सेवा क्षेत्र के लिए सेफ हार्बर नियमों का विस्तार वास्तव में सभी कंपनियों को कर निश्चितता प्रदान करेगा। अधिकारी ने खुलासा किया कि केवल लगभग 90 कंपनियां ही 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के उच्च टर्नओवर के दायरे से बाहर हो रही हैं।
अधिकारी ने खुलासा किया कि आईटी सेवाओं, आईटी सक्षम सेवाओं, सॉफ्टवेयर विकास और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ) में लागू होने वाला 15.5% का एकीकृत सेफ हार्बर मार्जिन लगभग 6,000 कंपनियों के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद प्राप्त हुआ था। अव्यावहारिक भेदों को समाप्त करने के लिए इन अतिव्यापी क्षेत्रों को अब एक ही छत्र के नीचे लाया गया है।
सीमा पार लेन देन से संबंधित पक्ष में करीब 44,000 कंपनियां हैं और इनमें से करीब 30 प्रतिशत आईटी/आईटीई क्षेत्र से संबंधित हैं। पात्रता सीमा को बढ़ाकर 2,000 करोड़ किए जाने से ज्यादातर कंपनियां सेफ हार्बर का लाभ प्राप्त करने के योग्य हो गई हैं। अधिकारी ने बताया, ‘इससे करीब 90 कंपनियां ही बाहर हैं और इनमें से पहले ही 60 कंपनियों के पास एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (एपीए) है। शेष 30 कंपनियां भी एपीए का विकल्प चुन सकती हैं और इसे हम अगले दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं।’
महत्त्वपूर्ण रूप से सेफ हार्बर मंजूरियां पूरी तरह से सिस्टम-संचालित होंगी। यह निश्चित मापदंडों पर आधारित होंगी। इससे विवेकाधिकार के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। अधिराकी ने कहा ‘यह कर राहत नहीं है। यह कराधान की निश्चितता है। और निश्चितता निवेश को बढ़ावा देती है।’ अधिकारी ने जोर देकर कहा कि यह कदम भारत को वैश्विक तकनीकी सेवा केंद्र के रूप में बढ़ावा देता है।