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टारगेट मैच्योरिटी फंड से उठाएं ऊंची यील्ड का लाभ

ब्याज दरें घटने पर टारगेट मैच्योरिटी फंड से मिल सकता है पूंजीगत लाभ भी

Last Updated- February 05, 2024 | 8:24 AM IST
टारगेट मैच्योरिटी फंड से उठाएं ऊंची यील्ड का लाभ, Investors can lock into current high yields with target maturity funds

ब्याज दरें अभी चढ़ी हुई हैं मगर 2024 की दूसरी छमाही तक उनमें गिरावट शुरू होने का अनुमान है। ऐसे में निवेशक बढ़िया यील्ड हासिल करने अथवा पूंजीगत लाभ कमाने के लिए टारगेट मैच्योरिटी फंड (टीएमएफ) आजमा सकते हैं।

आदित्य बिड़ला सन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के को-हेड (फिक्स्ड इनकम) कौस्तुभ गुप्ता उम्मीद जताते हैं कि 2024 के मध्य में केंद्रीय बैंक अपने रुख में ढील देना शुरू कर देगा। इसीलिए टीएमएफ में निवेश से आकर्षक यील्ड हासिल करने का उन्हें यह सही समय लगता है।

फंड्सइंडिया के उपाध्यक्ष और शोध प्रमुख अरुण कुमार भी कहते हैं, ‘ब्याज दरों में नरमी आने पर डेट फंड का रिटर्न चढ़ता है और दरें चढ़ने पर घटता है। अगर आपको लगता है कि दरें घटेंगी तो पांच साल से अधिक अवधि के टारगेट मैच्योरिटी फंड आपके लिए अच्छा मौका हो सकते हैं।’

टीएमएफ परिपक्वता की तय तारीख वाले बॉन्ड फंड हैं। आम तौर ये उस बॉन्ड इंडेक्स पर चलते हैं, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार और बढ़िया सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) के बॉन्ड तथा एएए रेटिंग वाली कंपनियों के बॉन्ड होते हैं।

फंड मैनेजर का पोर्टफोलियो उसी इंडेक्स के हिसाब से होता है और बॉन्ड परिपक्वता तक रखे जाते हैं। उन पर मिलने वाला ब्याज भी सूचकांक में मौजूद बॉन्डों के साथ परिपक्व होने वाले बॉन्डों में निवेश कर दिया जाता है। टारगेट मैच्योरिटी फंडों की मियाद कुछ महीनों से 10 साल तक हो सकती है।

इन फंडों में कई फायदे हैं – कम एक्सपेंस रेश्यो, फंड मैनेजर का जोखिम नहीं और क्रेडिट जोखिम भी नहीं। गुप्ता बताते हैं, ‘लगभग सभी टारगेट मैच्योरिटी फंडों में सरकारी बॉन्ड, राज्य विकास ऋण (एसडीएल) और एएए बॉन्ड ही होते हैं। इसलिए इनमें क्रेडिट एवं तरलता का जोखिम बहुत कम होता है। अगर ये फंड परिपक्वता तक रखे जाएं तो दरें घटने-बढ़ने का जोखिम भी खत्म हो सकता है।’

टीएमएफ में रिटर्न का अनुमान पहले से ही लगाया जा सकता है। कुमार का कहना है कि परिपक्व होने तक इनमें निवेश रखा जाए तो रिटर्न शुद्ध यील्ड के आसपास ही होगा। फिलहाल ब्याज दरें चरम के करीब हैं, इसलिए टीएमएफ निवेशकों को मौजूदा बॉन्ड यील्ड दिला सकते हैं। साथ ही पूंजीगत लाभ भी मिल सकता है।

निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट्स) अमित त्रिपाठी भी बताते हैं, ‘परिपक्व होने तक निवेश रखा जाए तो टारगेट मैच्योरिटी फंड आपको लगभग वही यील्ड देंगे, जो निवेश के समय थी। ब्याज दरें गिरने पर भी आप निवेश बनाए रखते हैं और तेजी होने पर बॉन्ड बेच देते हैं तो मझोली से लंबी अवधि में अतिरिक्त रिटर्न भी मिल सकता है।’

मगर सावधि जमा (एफडी) के मुकाबले ये बेहत हैं या कमतर? बड़े वाणिज्यिक बैंक 1 से 3 साल की एफडी पर लगभग 7 फीसदी ब्याज दे रहे हैं। मगर लंबी अवधि के टारगेट मैच्योरिटी फंड इससे ज्यादा शुद्ध यील्ड देते हैं।

इन फंडों में आपको आपको तरलता का भी फायदा मिलता है। गुप्ता समझाते हैं, ‘ओपन-एंडेड होने के कारण इन फंडों को किसी भी समय खरीद या बेच सकते हैं। इससे आपात स्थिति में आप बिना जुर्माना टीएमएफ से रकम निकाल सकते हैं। अगर आप एफडी बीच में तुड़वाते हैं तो आपको कम ब्याज मिलेगा। इसके अलावा आपको जुर्माना भी देना पड़ सकता है।’

टारगेट मैच्योरिटी फंड में आपको पूंजीगत लाभ भी मिल सकता है। कुमार का कहना है कि ब्याज दरों में कमी के दौर में लंबी अवधि वाले टीएमएफ आपको एफडी से ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं। मगर इन दोनों पर मिलने वाला ब्याज कर के दायरे में आता है।

सवाल यह है कि सही टारगेट मैच्योरिटी फंड कैसे चुना जाए? निवेशकों को उन टीएमएफ में निवेश करना चाहिए, जो उतने समय में ही परिपक्व हों, जितने समय तक वे निवेश रखना चाहते हैं। अगर आप तीन साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो वे फंड ही चुनें, जो अगले तीन साल में परिपक्व हो रहे हों।

अधिक जोखिम लेने की क्षमता वाले निवेशक लंबी अवधि वाले टारगेट मैच्योरिटी फंड में निवेश कर सकते हैं और ब्याज दरें गिरने पर पूंजीगत लाभ लेने के बाद उन्हें बेच सकते हैं। मगर ऐसा करने पर ब्याज दरों का जोखिम हो सकता है।

First Published - February 4, 2024 | 10:56 PM IST

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