प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
आज के समय में बहुत से लोग अच्छी कमाई करते हैं, लेकिन हर महीने यह महसूस करते हैं कि पैसा जैसे जेब से गायब हो जाता है। उनके पास कोई स्पष्ट योजना नहीं होती कि पैसा कहां जा रहा है और आखिर बचत कैसे करनी चाहिए। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) और रिचनेस एकेडमी के फाउंडर तारेश भाटिया का कहना है कि यह समस्या आज लगभग हर घर में देखने को मिलती है। उनका अनुभव है कि कई लोग सही तरीके से पैसे को मैनेज नहीं करते, जिसकी वजह से ठीक-ठाक कमाई होने के बावजूद आर्थिक तनाव बना रहता है।
तारेश भाटिया बताते हैं, “मैं अधिकतर लोगों में यही गलती देखता हूं कि वो कमाते तो ठीक-ठाक हैं, लेकिन पैसों को संभालने का कोई सिस्टम नहीं बनाते। इससे हर महीने के अंत में पैसे के मामले में निराशा होती है। अगर सही मनी मैनेजमेंट टिप्स अपनाए जाएं, तो कमाई को सही दिशा में लगाया जा सकता है।”
आइए जानते हैं उनके बताए 6 आसान मनी मैनेजमेंट टिप्स, जिन्हें अपनाकर हर भारतीय अपनी कमाई को मजबूत बना सकता है।
तारेश भाटिया का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव है कि सेविंग को पहले रखें और खर्च बाद में करें। ज्यादातर लोग महीने का पूरा बजट बनाने के बजाय जितना बचेगा उतना बचत में डालते हैं। लेकिन यह तरीका अक्सर काम नहीं करता।
उनका सुझाव है कि महीने के पहले दिन ही अपने अकाउंट से एक तय रकम ऑटोमैटिक ट्रांसफर करें। यह रकम बचत खाते या निवेश खाते में जा सकती है। इससे न सिर्फ बचत हो जाएगी बल्कि मन में पैसों को लेकर तनाव भी कम होगा। भाटिया बताते हैं कि “ऑटोमैटिक बचत करने वाले लोग महीने के अंत में पैसे के मामले में ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं और बड़े खर्चों के लिए भी तैयार रहते हैं।”
दूसरा टिप है बजटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करना। कई लोग खर्च सिर्फ याददाश्त या नोटबुक पर रखते हैं, लेकिन इस तरह उनका सही हिसाब नहीं बन पाता। बजटिंग ऐप्स के माध्यम से हर छोटा-बड़ा खर्च रिकॉर्ड करें।
तारेश भाटिया के अनुसार, “जब लोग हर खर्च को ऐप में नोट करते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि पैसा वास्तव में कहां जा रहा है। छोटे-छोटे खर्च जैसे कैफे में कॉफी, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन या अनावश्यक शॉपिंग मिलकर बड़ी रकम बनाते हैं।” ऐप्स आपको खर्च के हिसाब से रिपोर्ट भी देते हैं, जिससे पता चलता है कि किस जगह से बचत की जा सकती है।
तीसरा टिप है कैशबैक और रिवॉर्ड। आजकल लगभग हर बैंक, क्रेडिट कार्ड और पेमेंट ऐप में रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और रेफरल बोनस होते हैं। छोटे-छोटे ऑफर्स को इग्नोर करने से आप अपनी कमाई का हिस्सा गंवा सकते हैं।
तारेश भाटिया कहते हैं, “UPI ऑफर्स, क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड्स और रेफरल बोनस को जोड़कर देखें, तो सालाना लाखों रुपये तक की बचत या स्मार्ट रिटर्न संभव है। यह तकनीक केवल उन लोगों के लिए नहीं है जो बड़ी कमाई करते हैं, बल्कि छोटे खर्च वाले लोग भी इसका फायदा उठा सकते हैं।”
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कई बार लोग पूरी बिलिंग खुद उठाते हैं, चाहे वह डिनर हो, मूवी टिकट हों या ट्रिप का खर्च। चौथा टिप है कि खर्च को आपस में शेयर करें।
आजकल कई ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ऐसे हैं जो दोस्तों के साथ खर्च बांटना आसान बनाते हैं। तारेश भाटिया बताते हैं, “जब आप खर्च शेयर करते हैं, तो न केवल आपकी जेब पर बोझ कम होता है, बल्कि पैसे के इस्तेमाल का हिसाब भी साफ रहता है। इससे अनावश्यक उधारी लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती।”
पांचवां टिप है SIP या लंबी अवधि के निवेश में छोटी बचत को बदलना। अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ बड़ी रकम का निवेश ही फायदा देगा। लेकिन भाटिया बताते हैं कि छोटी रकम भी लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएट कर सकती है।
वो कहते हैं “सिर्फ 500 रुपये महीना भी SIP में निवेश करके 10-15 साल में अच्छी राशि जमा की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आदत बन जाती है और नियमित निवेश से वित्तीय सुरक्षा मिलती है।”
छठा और अंतिम टिप यह है कि पैसे के लिए सिस्टम बनाएं। जब हर महीने का खर्च, बचत और निवेश तय सिस्टम के अनुसार होता है, तो मानसिक तनाव अपने आप कम हो जाता है।
भाटिया कहते हैं, “कई लोग पैसों के मामले में तनाव में रहते हैं, लेकिन जब एक साधारण सिस्टम अपनाया जाता है, जैसे ऑटो सेविंग, खर्च ट्रैक करना और निवेश करना, तो चिंता अपने आप कम हो जाती है। यह तरीका मानसिक शांति के साथ-साथ आर्थिक मजबूती भी देता है।”