प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
Major Rule Changes Coming in 2026: नया साल 2026 अपने साथ आम लोगों की जेब, सैलरी और रोजमर्रा की बैंकिंग आदतों से जुड़े कई बड़े बदलाव लेकर आया है। इस साल कई नए बदलाव लागू होंगे जो सीधे नौकरीपेशा लोगों, पेंशनर्स, टैक्सपेयर्स, किसानों और क्रेडिट कार्ड यूजर्स आदि को प्रभावित करेंगे। कहीं सैलरी और पेंशन बढ़ने की उम्मीद जगी है, तो कहीं बैंकिंग नियमों में सख्ती और नई शर्तों के लिए तैयार रहना होगा।
कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर जहां 8वें वेतन आयोग और EPF पर टिकी है, वहीं टैक्स भरने वालों के लिए ITR फाइल करना पहले से आसान होने वाला है। बैंकिंग सिस्टम में भी ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका असर लोन, क्रेडिट स्कोर और कार्ड से मिलने वाले फायदों पर पड़ेगा। किसानों के लिए पहचान और बीमा से जुड़े नियम बदले जा रहे हैं, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत कई जरूरी और असरदार बदलावों के साथ होने जा रही है, जिनकी जानकारी हर किसी के लिए जरूरी है।
सबसे बड़ा बदलाव 8वें वेतन आयोग को लेकर है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट मई 2027 तक आने की संभावना है। लेकिन यदि इसे पिछली परंपरा के अनुसार रेट्रोस्पेक्टिव (पूर्व प्रभाव) से लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है।
यह 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा, जिसका कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है। इससे केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगी, बेसिक सैलरी बढ़ेगी और महंगाई से राहत देने के लिए महंगाई भत्ते (DA) में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
साथ ही 8वें वेतन आयोग का फायदा पेंशन पाने वालों को भी मिलेगा और उनकी पेंशन में भी बदलाव किए जाएंगे। इससे सरकारी कर्माचारियों और पेंशनर्स के लिए बढ़ती महंगाई का असर कुछ हद तक कम होगा।
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जनवरी 2026 से क्रेडिट ब्यूरो अब 15 दिन की जगह हर हफ्ते डेटा अपडेट करेंगे। इससे लोन की किश्त चुकाने या चूक करने की जानकारी जल्दी क्रेडिट स्कोर में दिखेगी, जिसका असर लोन मिलने और ब्याज दरों पर भी जल्द पड़ेगा।
इसके अलावा, ज्यादातर बैंकिंग और सरकारी सेवाओं का फायदा लेने के लिए पैन-आधार लिंक कराना जरूरी होगा। जिन खातों में पैन और आधार लिंक नहीं होंगे, उन पर लेनदेन में रोक लग सकती है या कुछ सेवाएं बंद की जा सकती हैं।
टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने का तरीका भी बदलेगा। जनवरी 2026 से नए डिजाइन के ITR फॉर्म आने की उम्मीद है, जिसकी घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है। इममें बैंकिंग ट्रांजैक्शन, आमदनी और खर्च से जुड़ी जानकारी पहले से भरी हुई होगी। इससे रिटर्न फाइल करना आसान होगा, गलतियों की गुंजाइश कम होगी और टैक्स नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
जनवरी से फरवरी 2026 के बीच कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव करेंगे। SBI कार्ड 10 जनवरी से घरेलू एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का नया प्रोग्राम शुरू करेगा। HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए वाउचर आधारित लाउंज एक्सेस सिस्टम लाएगा, जिसमें खर्च की नई शर्तें लागू होंगी।
इससे अलावा इस साल UPI पेमेंट नियमों को लेकर भी कुछ बदलाव होंगे। डिजिटल भुगतान पर अब निगरानी और बढ़ाई जाएगी, बैंक UPI लेनदेन की जांच को मजबूत करेंगे और मैसेजिंग ऐप धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोकने के लिए सिम वेरिफिकेशन नियमों को सख्त करेंगे।
ICICI बैंक भी कई बदलाव करने जा रहा है, जिनमें रिवॉर्ड पॉइंट्स, मूवी बेनिफिट, ऐड-ऑन कार्ड फीस और ट्रांजैक्शन चार्ज शामिल हैं। तय सीमा से ज्यादा ट्रांसपोर्ट से जुड़े ट्रांजैक्शन पर 1% शुल्क लगेगा और कुछ कार्ड कैटेगरी में रिवॉर्ड पॉइंट्स की लिमिट तय की जाएगी।
BookMyShow के जरिए मिलने वाले मूवी टिकट बेनिफिट के लिए अब हर तिमाही न्यूनतम खर्च जरूरी होगा और फरवरी से कुछ कार्ड्स पर यह सुविधा बंद भी की जा सकती है। इसके अलावा, ऑनलाइन गेमिंग, ज्यादा रकम वाले वॉलेट टॉप-अप और कुछ खास ऐड-ऑन कार्ड्स पर अतिरिक्त चार्ज भी लगाए जाएंगे।
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इस साल से EPF खाताधारकों के लिए बड़ी राहत की खबर आ सकती है। अब तक प्रॉविडेंट फंड निकालना आपको लंबी प्रक्रिया और कागजी झंझट वाला काम लगता था, तो जल्द ही यह तस्वीर बदल सकती है। श्रम मंत्रालय एक ऐसी सुविधा लाने की तैयारी में है, जिससे EPF की रकम ATM और UPI के जरिए निकालना संभव हो जाएगा। यह बदलाव मार्च 2026 से लागू हो सकता है।
बता दें कि अक्टूबर 2025 में EPFO ने कई बदलाव मंजूर किए थे, ताकि प्रॉविडेंट फंड का कामकाज ज्यादा पारदर्शी और आसान हो जाए। इसका मुख्य उद्देश्य था कि निकासी के क्लेम जल्दी सेटल हों और रिजेक्शन न हों।
पहले निकासी के नियम काफी उलझे हुए थे। हर कैटेगरी के अपने अलग शर्तें और लिमिट थीं। इससे लोगों को कन्फ्यूजन होता था और गलतियां हो जाती थीं। अब उन 13 अलग कैटेगरी को मिलाकर एक सरल ढांचा बना दिया गया है। इससे प्रोसेसिंग का समय कम हुआ और गलत आवेदनों की संख्या घटी है।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को PM-Kisan योजना का लाभ लेने के लिए यूनिक किसान ID का इस्तेमाल करना होगा। अगर किसान रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं, तो किस्त मिलने में देरी हो सकती है या भुगतान रुक सकता है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान फसल बीमा योजना के तहत अब जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान को भी कवर किया जाएगा, लेकिन इसके लिए नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर दावा करना जरूरी होगा।