हमारे समाज में अक्सर माना जाता है कि लाइफ इंश्योरेंस 30 या 40 साल की उम्र में लेने की चीज है और 60 साल में रिटायर होते ही इसकी जरूरत खत्म हो जाती है। लोग सोचते हैं कि जब कमाई बंद हो गई और बड़ी जिम्मेदारियां पूरी हो गईं, तो फिर इंश्योरेंस पर पैसे क्यों खर्च किए जाएं? लेकिन बदलते वक्त और लोगों की बढ़ती उम्र ने इस सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या 60 साल की उम्र के बाद भी सीनियर सिटीजंस के लिए लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है? बुजुर्गों की देखभाल और सीनियर लिविंग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिटायरमेंट के बाद इंश्योरेंस की जरूरत खत्म नहीं होती, बल्कि इसका मकसद और इसे देखने का नजरिया बदल जाता है।
आजकल बेहतर मेडिकल सुविधाओं की वजह से लोगों की औसत उम्र लगातार बढ़ रही है। अब लोग आसानी से 90 साल या उससे ज्यादा उम्र तक जी रहे हैं। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। रिटायरमेंट के बाद इंसान के सामने करीब 20 से 30 साल का लंबा समय होता है, जब उसकी रेगुलर कमाई पूरी तरह बंद हो जाती है। ऐसे में इतने लंबे समय तक सिर्फ पुरानी सेविंग्स यानी बचत के भरोसे जिंदगी चलाना बड़ा जोखिम हो सकता है।
इस मुद्दे पर Epoch Elder Care की CEO और को-फाउंडर नेहा सिन्हा कहती हैं, “आज भी हम लाइफ इंश्योरेंस को ऐसी चीज मानते हैं, जिसे 30 साल की उम्र में खरीदा और 60 की उम्र तक आते-आते भुला दिया जाता है। सबसे बड़ी कमी यहीं है। कोई यह प्लानिंग नहीं करता कि अगर रिटायरमेंट की बचत खत्म हो गई तो आगे क्या होगा। आज लोग 90 साल से ज्यादा उम्र तक जी रहे हैं। यानी बिना किसी तय आमदनी के 20 से 30 साल गुजारने पड़ सकते हैं। यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि जिंदगी के कई दशक हैं, जिनके खर्चों की हमने कोई तैयारी ही नहीं की होती।”
सिन्हा के मुताबिक, अब बुजुर्ग होने का मतलब सिर्फ अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी या अस्पताल के भारी बिल तक सीमित नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ कई लोग सालों तक पुरानी और गंभीर बीमारियों से जूझते रहते हैं। कई बार रोजमर्रा के छोटे-बड़े कामों के लिए भी उन्हें हर समय किसी की मदद या फुल-टाइम देखभाल की जरूरत पड़ती है। ये सभी सुविधाएं काफी महंगी होती हैं और रिटायरमेंट के बाद भी इन पर होने वाला खर्च लगातार जारी रहता है।
सीनियर सिटीजंस के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि जब बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं, तो फिर बीमा का प्रीमियम भरकर पैसे क्यों खर्च किए जाएं? लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि 60 साल की उम्र के बाद लाइफ इंश्योरेंस को देखने का नजरिया बदलना जरूरी है। अब इसका मकसद सिर्फ यह नहीं है कि इंसान के जाने के बाद परिवार के लिए क्या बचेगा या उन्हें क्या मिलेगा। बल्कि यह भी जरूरी है कि जब तक इंसान जिंदा है, उसे अपने खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
सिन्हा कहती हैं, “परिवार अक्सर हमसे पूछते हैं कि क्या 60 साल की उम्र के बाद भी लाइफ इंश्योरेंस जरूरी है? हमारा जवाब हमेशा यही होता है कि अब इसकी अहमियत पहले से भी ज्यादा है, बस इसे देखने का नजरिया बदल गया है। अब लाइफ इंश्योरेंस का मतलब सिर्फ अपने जाने के बाद परिवार के लिए कुछ छोड़ना नहीं है। इसका मकसद यह भी है कि इंसान जब तक जिंदा रहे, सुरक्षित और आराम से जिंदगी जी सके और उसे किसी दूसरे पर निर्भर न रहना पड़े। हमारी सोच में यह बदलाव बहुत पहले आ जाना चाहिए था।”
जब कोई युवा लाइफ इंश्योरेंस लेता है, तो उसका सबसे बड़ा मकसद यह होता है कि अगर उसके साथ कुछ हो जाए, तो परिवार की आमदनी पर असर न पड़े। लेकिन 60 साल की उम्र के बाद लाइफ इंश्योरेंस की भूमिका बदल जाती है। इस उम्र में यह एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच और भविष्य की आर्थिक योजना का हिस्सा बन जाता है। कई सीनियर सिटीजंस पर इस उम्र में भी कुछ लोन या दूसरी देनदारियां होती हैं। वहीं, कई लोग यह भी चाहते हैं कि उनके बाद उनका जीवनसाथी आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर रहे।
इस बारे में Primus Senior Living के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आदर्श नरहरि कहते हैं, “60 साल की उम्र के बाद भी लाइफ इंश्योरेंस की अहमियत बनी रहती है, लेकिन इस उम्र में इसका मकसद बदल जाता है। अब यह सिर्फ कमाई की भरपाई का जरिया नहीं रहता। बल्कि यह जीवनसाथी को आर्थिक सुरक्षा देने, आप पर निर्भर लोगों की जरूरतें पूरी करने, बचे हुए लोन या देनदारियों को संभालने और विरासत की प्लानिंग में मदद करता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि बढ़ती उम्र में भी व्यक्ति आर्थिक रूप से सम्मान के साथ जिंदगी जी सके।”
नरहरि का कहना है कि भारत में लोग अब पहले से ज्यादा लंबा और स्वस्थ्य जीवन जी रहे हैं। ऐसे में रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा की जरूरत खत्म नहीं हो जाती। सही इंश्योरेंस कवर सीनियर सिटीजंस के परिवार पर अचानक आने वाले आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे बुजुर्गों को यह सुकून भी रहता है कि उनके न रहने पर उनके अपनों को पैसों की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
कुल मिलाकर, दोनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि 60 साल के बाद इंश्योरेंस सिर्फ जोखिम से बचने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सीनियर सिटीजंस को आत्मविश्वास, आजादी और आर्थिक सुरक्षा के साथ सम्मान से जिंदगी जीने में मदद करता है।