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SIP बार-बार बदलेंगे तो रिटर्न से हाथ धो बैठेंगे, एक्सपर्ट्स से जानें क्या करें और क्या नहीं

निवेशकों को अपने एसआईपी को एक फंड से दूसरे फंड में लगातार बदलने से बचना चाहिए। इसका एक कारण ‘रिवर्सन टू मीन’ नामक अवधारणा है।

Last Updated- June 27, 2024 | 11:07 PM IST
SIP

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2024 में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के बंद होने का अनुपात 0.88 की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।

यह आंकड़ा लंबी अवधि के औसत 0.51 के मुकाबले काफी अधिक है। यह अनुपात दर्शाता है कि किसी एक महीने के दौरान खुलने वाले हरेक एसआईपी पर कितने बंद हो गए।

चुनावी अनिश्चितता

एसआईपी योजनाओं के बंद होने के अनुपात कई कारणों से बढ़ा है। सैंक्टम वेल्थ के प्रमुख (निवेश योजना) आलेख यादव ने कहा, ‘चुनावों के नतीजों को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव रहा।’ उन्होंने कहा कि कई निवेशकों ने मुनाफावसूली की, क्योंकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का मूल्यांकन काफी अधिक हो गया था।

ग्राहक को जानो (Kyc) मानदंडों के कारण होने वाले व्यवधानों ने भी इसमें योगदान किया है। गोलटेलर के सह- संस्थापक विवेक बांका ने कहा, ‘जिन निवेशकों ने आधार सत्यापन के बिना केवाईसी काफी पहले कर लिया था, उन्हें दोबारा इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।’

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के सहायक निदेशक (शोध प्रबंधक) हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, ‘कुछ फंडों के खराब प्रदर्शन में वित्तीय लक्ष्यों में बदलाव के कारण नए सिरे से आवंटन, आय में कमी अथवा खर्च में वृद्धि जैसे कारकों की भी भूमिका हो सकती है।’

एसआईपी को रोकना

अगर फंड खराब प्रदर्शन कर रहा है तो यह एसआईपी को बंद करने का एक कारण हो सकता है। श्रीवास्तव ने कहा, ‘मगर प्रदर्शन का आकलन करते समय यह निर्धारित करना आवश्यक है कि क्या यह रणनीति अस्थायी तौर पर अनुकूल नहीं है अथवा फंड में ढांचागत तौर पर कुछ खामियां हैं। अगर ढांचागत खामी तो उससे दूर होना ही बेहतर है।’

एक अन्य कारण फंड की संभावनाओं अथवा जोखिम भुनाने के उसके प्रोफाइल में बुनियादी बदलाव हो सकता है। हो सकता है कि उसी बदलाव के कारण फंड निवेशक के पोर्टफोलियो में फिट न बैठता हो। इसके अलावा निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव होने से भी फंड की प्रासंगिकता प्रभावित हो सकती है।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘आय में कमी अथवा खर्च में अचानक वृद्धि जैसी निवेशक की व्यक्तिगत वित्तीय चुनौतियों के कारण भी उनके लिए अपनी आय में से एक खास रकम को बार-बार अलग करना मुश्किल हो सकता है।’

यादव ने कहा कि अगर एसआईपी से जुड़ा वित्तीय लक्ष्य हासिल हो जाता है तो उसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘सेवानिवृत्ति, स्थानांतरण (अनिवासी बनना), वित्तीय परिसंपत्तियों से भौतिक परिसंपत्तियों की ओर रुख करना अन्य वास्तविक कारण हो सकते हैं।’

एसआईपी को कब न रोकें

लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार में गिरावट के दौरान एसआईपी को कभी नहीं रोकना चाहिए। यादव ने कहा, ‘बाजार में गिरावट के दौरान आपके एसआईपी की हरेक किस्त फंड की अधिक यूनिट खरीदती है। इससे लंबी अवधि में अधिक रिटर्न मिलता है।’

श्रीवास्तव ने कहा कि बाजार में गिरावट के दौरान रुपये बनाम लागत का औसत प्रदर्शन सबसे अच्छा रहता है। बांका ने कहा कि वास्तव में गिरावट के दौरान निवेशकों को अपना निवेश बढ़ाना चाहिए।

फंड बदलने में जोखिम

निवेशकों को अपने एसआईपी को एक फंड से दूसरे फंड में लगातार बदलने से बचना चाहिए। इसका एक कारण ‘रिवर्सन टू मीन’ नामक अवधारणा है। बाजार के विभिन्न चरणों में अलग-अलग निवेश शैलियों को प्रमुखता मिलती है।

उदाहरण के लिए साल 2019 से साल 2021 के बीच क्वालिटी स्टाइल ने अच्छा प्रदर्शन किया और उसके बाद वैल्यू का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

बांका ने कहा, ‘हरेक फंड मैनेजर की अपनी निवेश शैली होती है। अगर बाजार उस शैली के अनुकूल नहीं होगा तो उसका प्रदर्शन खराब रहेगा। यदि एसआईपी को खराब प्रदर्शन करने वाले फंड से बेहतर प्रदर्शन वाले फंड में लगातार बदलते रहेंगे तो आप उन फंडों से बाहर निकल जाएंगे जहां जल्द उछाल आने की संभावना होगी। साथ ही आप उन फंडों में निवेश कर सकते हैं जहां जल्द खराब प्रदर्शन का दौर दिख सकता है।’

उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए ऐसा पोर्टफोलियो तैयार करें जिसमें विभिन्न शैलियों को शामिल किया गया हो। हरेक फंड के लिए अनुभवी फंड मैनेजरों का चयन करें और उनके साथ लंबे समय तक बने रहें।

First Published - June 27, 2024 | 10:48 PM IST

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