Representative Image
Travel Insurance: 2025 में भारतीय यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान जोखिम को लेकर अपनी सोच बदल ली है। अब यात्रा बीमा सिर्फ वीज़ा के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं बल्कि हर यात्रा का अहम हिस्सा बन गया है। पॉलिसीबाजार के आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा बीमा की बिक्री में इस साल 15% की वृद्धि दर्ज की गई।
डेटा के अनुसार, जर्मनी सबसे ज्यादा यात्रा बीमा खरीदने वाले देशों में शीर्ष पर रहा, इसका कारण शेंगेन वीज़ा नियम और लंबी यात्राएँ हैं। इसके बाद थाईलैंड का नंबर है, जहां छुट्टियों पर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। महामारी के बाद सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता ने बीमा खरीदने की प्रवृत्ति को मजबूत किया।
यात्रियों ने अब बीमा राशि बढ़ा दी है:
अफ्रीका, एशिया, जापान और यूरोप की यात्रा के लिए $2.5 लाख का कवर सामान्य हो गया।
अमेरिका और कनाडा जैसी महंगी स्वास्थ्य सेवाओं वाली जगहों के लिए $5 लाख का बीमा लेना अब आम है।
यह कदम किसी डर की वजह से नहीं, बल्कि असली खर्चों को ध्यान में रखकर उठाया गया।
यह भी पढ़ें: विदेश घूमने जा रहे हैं? ट्रैवल इंश्योरेंस लेते समय ये गलतियां बिल्कुल न करें, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान
2025 में वरिष्ठ नागरिकों ने बीमा खरीद में 15% हिस्सा लिया। लंबी और बार-बार की छुट्टियाँ तथा स्वास्थ्य जोखिम ने उन्हें व्यापक बीमा लेने के लिए प्रेरित किया। वहीं, छात्र बीमा अभी भी केवल 1% है, लेकिन लगातार बढ़ रहा है।
अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा बीमा खरीदा गया, जो गर्मियों की छुट्टियों और शुरुआती बुकिंग से मेल खाता है। अब यात्रियों ने बीमा को आखिरी समय का काम नहीं बल्कि यात्रा की तैयारी का हिस्सा बनाया है।
क्लेम डेटा में पता चला कि मेडिकल खर्च सबसे ज्यादा होता है, जबकि सामान खोने या देरी होने जैसे मामले सबसे ज्यादा बार होते हैं।
यह भी पढ़ें: क्रूज पर जा रहे हैं? ध्यान दें – साधारण ट्रैवल इंश्योरेंस नहीं देगा साथ
इसी साल निवेश क्षेत्र में 31-40 साल की उम्र के लोग सबसे ज्यादा सक्रिय रहे, जो कुल निवेश का लगभग 50% हैं। रिटायरमेंट प्लान में अब 35 साल से कम उम्र वाले निवेशक भी 25% हिस्सा ले रहे हैं। लंबी अवधि के 20+ साल के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है।
बीमा खरीद में UPI सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम बन गया, जिसमें 64% भुगतान इसके जरिए हुए। क्रेडिट कार्ड 18%, डेबिट कार्ड 8.7% और नेट बैंकिंग 7.25% का योगदान रहा। नई भुगतान विधियों जैसे UPI ऑटोपे और BNPL का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा।