facebookmetapixel
Advertisement
MCap: शेयर बाजार में गिरावट का बड़ा असर, टॉप कंपनियों की वैल्यू में भारी उतार-चढ़ावHeatwave Update: दिल्ली में तपिश का तांडव! 45 डिग्री पार पहुंचा पारा, IMD का अलर्ट; कई राज्यों में लू का खतराAdani Green का बड़ा दांव! ₹15,000 करोड़ से बैटरी स्टोरेज में धमाका, अब रात में भी मिलेगी सोलर बिजलीभारत-न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को होगा FTA साइन, व्यापार दोगुना करने का लक्ष्यदुनिया में बजा भारत का डंका! महिंद्रा टॉप 25 में, 8 भारतीय ऑटो ब्रांड्स ने मचाया धमालव्हाइट हाउस डिनर में गोलियों की गूंज! Trump को आनन-फानन में निकाला गया बाहर, हमलावर गिरफ्तारUS-Iran Talks: 10 मिनट में बदला ईरान का रुख! ट्रंप ने ठुकराया पहला ऑफर, नया प्रस्ताव आया तो बढ़ा सस्पेंसहोर्मुज में बारूदी सुरंगों का जाल: समंदर की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर यह क्यों है एक गंभीर खतरा?Gen Z का गुस्सा? राघव चड्ढा का BJP में जाना युवाओं को नहीं आया रास, 24 घंटे में घटे 14 लाख फॉलोअर्स!IDFC First Bank Q4 Results: नेट प्रॉफिट ₹319 करोड़ पर पहुंचा, ₹NII 15.7% बढ़कर 5,670 करोड़ के पार

कमजोर प्रतिफल के बीच इ​क्विटी फंडों में फ्लो दमदार

Advertisement

कुल इ​क्विटी AUM में SIP का योगदान अब 34 फीसदी है जो वित्त वर्ष 2019 के अंत में 25 फीसदी था

Last Updated- April 18, 2023 | 6:57 PM IST
Equirus Wealth's AUM crosses Rs 10,000 crore इक्विरस वेल्थ का AUM 10,000 करोड़ रुपये के पार
BS

पिछले दशक में पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि इ​क्विटी म्युचुअल फंडों (MF) में निवेश फ्लो इ​क्विटी बाजार के पिछले प्रदर्शन से इस मायने में काफी अलग रहा है कि निवेशकों ने सुस्त प्रतिफल के बावजूद निवेश बरकरार रखा है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटीज (KIE) द्वारा किए गए रिसर्च से पता चला है कि कई योजनाओं के लिए कमजोर एक वर्षीय प्रतिफल के बावजूद नवंबर 2022 से इ​क्विटी फंडों में निवेश प्रवाह मजबूत बना हुआ है। अध्ययन से पता चला है कि जनवरी 2021 के बाद से इ​क्विटी बाजार में कमजोर प्रदर्शन के पिछले हरेक दौर में 6 महीने की अव​धि के बाद पूंजी प्रवाह घट गया था।

पिछले रुझान से अलग, इस बार SIP के जरिये किए जाने वाले मजबूत प्रवाह, ऊंचे एकमुश्त निवेश और कम बिकवाली से मदद मिली। खासकर इ​क्विटी योजनाओं से जुड़ा SIP फ्लो अक्टूबर 2022 से 13,000 करोड़ रुपये से ऊपर बना हुआ है।

KIE की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली बार जब इ​क्विटी बाजार ने जुलाई 2018 से जुलाई 2020 की अव​धि में कमजोर प्रदर्शन किया था, इ​क्विटी MF में 6 महीने की कमजोरी के बाद तेजी दर्ज की गई थी। हरेक तेजी के बाद इ​क्विटी प्रवाह में तेजी आती रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पिछले दशक के आंकड़े से 6 महीने बाद के एक वर्षीय प्रतिफल और म्युचुअल फंड के शुद्ध इ​क्विटी प्रवाह के बीच अंतर का पता चलता है। हालांकि हमने पिछले कुछ महीनों में विपरीत हालात दर्ज किए हैं, क्योंकि बाजार प्रतिफल एक अंक में ठहरा रहा, जबकि शुद्ध पूंजी प्रवाह नवंबर 2022 के करीब शून्य से तेजी से बढ़कर मार्च 2023 में 20,000 करोड़ रुपये की ऊंचाई पर पहुंच गया।’

हालांकि इसका अंदाजा लगाना कठिन है कि क्या यह अंतर अस्थायी है या स्थायी, लेकिन यदि बाजार से SIP फ्लो (जैसा कि 2021 के शुरू से देखा गया) को अलग रखकर आकलन किया जाए तो इ​क्विटी बाजार प्रदर्शन और MF फ्लो के बीच संबंध कमजोर माना जा सकता है।

यह भी पढ़ें : भारत में साल 2022 के दौरान रिकॉर्ड डिजिटल पेमेंट, यह शहर रहा सबसे आगे

SIP विकल्प के लिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती पसंद से कुल प्रबंधन अधीन परिसंप​त्तियों (AUM) में SIP की भागीदारी को बढ़ावा मिला है। आंकड़े से पता चलता है कि कुल इ​क्विटी AUM में SIP का योगदान अब 34 फीसदी है जो वित्त वर्ष 2019 के अंत में 25 फीसदी था।

मजबूत SIP प्रवाह के अलावा, निवेशक धारणा में एक सामान्य बदलाव इ​क्विटी में निवेश करने के रुझान से जुड़ा हुआ है। नवंबर 2022 में ICICI डायरेक्ट ने कहा था कि निवेशक पिछले कुछ वर्षों में बाजार में अवसर तलाशने की को​​शिश कर रहे थे और ज्यादा उतार-चढ़ाव के समय में भी निवेश करने को तैयार थे।

अध्ययन के अनुसार, पिछले चार-पांच साल में कम से कम तीन ऐसे उदाहरण देखने को मिले जब निवेशकों ने उस हालात में म्युचुअल फंडों में अपना इ​क्विटी निवेश बढ़ाया, जब बाजार गिर रहा था। इसी तरह, बाजार में तेजी के बाद वे अपना निवेश भुनाते दिखे।

Advertisement
First Published - April 18, 2023 | 6:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement