facebookmetapixel
Advertisement
लोन रिकवरी पर RBI सख्त, रात में कॉल और परिवार पर दबाव नहीं बना सकेंगे एजेंटमहंगाई बढ़ी तो रीपो रेट में हो सकता है इजाफा, RBI MPC के सदस्यों ने दिए संकेतक्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर पकड़ना आसान, छेड़छाड़ करने वालों पर होगी कार्रवाई: सेबी चीफसितंबर से महंगी होंगी हुंडई की कारें, कीमतों में 1% तक बढ़ोतरी का ऐलानत्योहारी सीजन से पहले महंगी होगी प्याज? बारिश और कम सप्लाई ने बढ़ाई टेंशनबैलेंस्ड हाइब्रिड फंड: 40-60 का इक्विटी-डेट फॉर्मूला, किसके लिए सही है ये फंड? निवेश से पहले समझें पूरा गणितवेदांता का ग्रीन एनर्जी पर फोकस बढ़ा, कार्बन उत्सर्जन घटाने में 1 अरब डॉलर से ज्यादा निवेशबिहार को ₹3590 करोड़ सौगात, पीएम गतिशक्ति से मजबूत होगी मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा कनेक्टिविटीलिकर सेक्टर करेगा कमाल! ब्रोकरेज को पसंद ये 3 शेयर, UK FTA समेत इन ट्रिगर्स से मिलेगा फायदाअंतरराष्ट्रीय टैक्स मामलों में स्पष्टता लाएगा आयकर विभाग, घटेगी अनिश्चितता

बजट के ऐलान और अमेरिकी मार से सहमे-सहमे हैं शेयरों के खिलाड़ी

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:24 PM IST

दो दिन के आराम के बाद भारत के शेयर बाजार सोमवार को खुलने जा रहे हैं मगर खुलने से पहले ही वे किसी बुरे अंजाम से सहमे हुए हैं। मानों यह दिन उनके लिए कोई कड़ी परीक्षा का हो। यह लाजिमी भी है, क्योंकि शुक्रवार को जहां अमेरिकी शेयर बाजार में एस एंड पी 500 में 2.7 फीसदी की 5 फरवरी के बाद से अब तक की सबसे बड़ी गिरावट हुई, वहीं शुक्रवार को ही बजट में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स बढने और सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) के सितम भी उन पर ढाए गए। अब इन हालात में उनके लिए सोमवार क्या गुल खिलाता है, ये सचमुच गंभीरता से सोचने वाली बात है।
विशेषज्ञों का कयास है कि इस बार अपेक्षित समय से पहले ही सितंबर से नवंबर के बीच किसी समय आम चुनावों की घोषणा हो सकती है। ऐतिहासिक चुनावी चाशनी से लिपटे बजट को देखकर यह कोई आश्चर्य की बात भी नहीं रह गई है। अचानक बदले हालात से घबराए निवेशकों के बीच शेयरों को बेचने की आपा-धापी भी मचने की अटकलें तेज हो गई हैं।
रेलीगेयर सिक्यूरिटीज के प्रेसीडेंट अमिताभ चक्रवर्ती कहते हैं- अंतरराष्ट्रीय बाजार की दशा से भारतीय बाजार की दिशा तय होगी। हालांकि इस बार का बजट उपभोक्ता हितैषी-खपत हितैषी है लेकिन इसका बाजार पर कोई बड़ा फायदा होने के आसार नहीं हैं।
अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को उस वक्त मंदी की मार पड़ गई थी, जब एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि कारोबारी गतिविधि 2001 के बाद के न्यूनतम स्तर पहुंच गई है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े बीमा समूह अमेरिकन इंटरनेशनल ग्रुप को तिमाही में हुए सबसे बड़े नुकसान से भी उपजा भय न सिर्फ स्थानीय शेयर कीमतों पर पड़ा बल्कि इसकी गूंज अन्य क्षेत्रों में भी सुनी गई।
चक्रवर्ती दावा करते हैं- दुनिया में हो रही हलचल भारत में भी अपना अक्स पेश करेगी।
फिलहाल मुनाफे में चल रहे खुदरा निवेशक शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स में हुए इजाफे के चलते इस वित्तीय वर्ष के अंत यानी 31 मार्च तक अपने शेयर बेच सकते हैं। इसका असर जाहिर तौर पर शेयर बाजारों के सूचकांक पर पड़ेगा।
शुक्रवार को ही जब बजट का ऐलान किया जा रहा था, बाजार का दिल उसकी घोषणाओं के साथ ही बैठता जा रहा था। तकरीबन 245 अंकों के नुकसान के साथ सेंसेक्स शुक्रवार को बंद हुआ। निफ्टी में भी 61 अंकों की गिरावट हुई थी।

Advertisement
First Published - March 2, 2008 | 6:41 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement