शेयर बाजार

Market Closing: उतार-चढ़ाव के बीच सपाट बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 31 अंक टूटा, निफ्टी 25986 पर बंद; पीएसबी इंडेक्स 3% गिरा

Market Closing: कारोबार की शुरुआत मजबूती से करने के बाद बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 और सेंसेक्स ज्यादातर समय लाल निशान में रहे।

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जतिन भूटानी   
Last Updated- December 03, 2025 | 4:04 PM IST

Stock Market Closing Bell on Wednesday, December 03, 2025:एशियाई बाजारों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार बुधवार (3 दिसंबर) को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में लगभग सपाट बंद हुए। कारोबार की शुरुआत मजबूती से करने के बाद बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 और सेंसेक्स ज्यादातर समय लाल निशान में रहे। हालांकि, आखिरी आधे घंटे में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली। ऑटो कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली हुई और सरकारी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला। जबकि आईटी शेयर चढ़कर बंद हुए।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) मामूली बढ़त के साथ 85,150 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान यह सिमित दायरे में कारोबार करता दिखा और 85,269.68 अंक के हाई और 84,763.64 अंक के लो लेवल तक गया। अंत में यह 31.46 अंक या 0.04 फीसदी गिरकर 85,106.81 पर बंद हुआ।

वहीं, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) लगभग सपाट रुख के साथ 26,004 अंक पर खुला। खुलने के कुछ ही देर में यह 26 हजार के लेवल से नीचे फिसल गया। अंत में यह 46.20 अंक या 0.18 फीसदी गिरकर 25,986 पर बंद हुआ।

जियोजित इंवेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ”विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निकासी और मौजूदा व्यापार अनिश्चितताओं के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती जारी रही। नवंबर में औद्योगिक गतिविधियों में नरम रही। मेन्यूफेक्चरिंग पीएमआई ने नए ऑर्डरों में कमी, निर्यात मांग में कमी और व्यापार घाटे में वृद्धि का संकेत दिया।”

उन्होंने कहा, ”वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। निवेशक फेड और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति और मुद्रा में उतार-चढ़ाव का आकलन कर रहे हैं। जबकि बैंक ऑफ जापान की सख्ती और सरकारी खर्च में वृद्धि की उम्मीदों के चलते जापानी बॉन्ड यील्ड में उछाल के बाद धारणा सतर्क रही। इस सप्ताह आरबीआई का नीतिगत फैसला महत्वपूर्ण होगा। खासकर बैंकों के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरी तिमाही के मजबूत जीडीपी आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है।”

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सेंसेक्स की कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक, टाइटन और एनटीपीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट लेकर बंद हुए। दूसरी तरफ, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर प्रमुख रूप से बढ़त में रहे।

ब्रोडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.98 प्रतिशत और और निफ्टी स्मॉलकैप 0.71 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी पीएसयू सूचकांक 3.07 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस इंडेक्स लाल निशान में रहे। दूसरी तरफ, निफ्टी आईटी और मीडिया हरे निशान में रहे।

RBI के फैसले से पहले निवेशक सतर्क

पिछले तीन ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी और सेंसेक्स लगभग 0.7 फीसदी गिर चुके हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह दोनों इंडेक्स ने 14 महीनों बाद नए रिकॉर्ड स्तरों को छुआ था। घरेलू निवेशक रिकॉर्ड स्तरों पर भी खरीदारी जारी रखे हुए हैं। लेकिन विदेशी निवेशकों ने लगातार चार सत्रों तक भारतीय शेयर बेचे। मंगलवार को एफपीआई ने 3642 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा और यह कमजोर होकर 90 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

आरबीआई की तीन दिन चलने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज से शुरू हो रही है। यह बैठक 3 से 5 दिसंबर 2025 तक होगी। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति इस बैठक बैठक में मुख्य चर्चा का मुद्दा होगा- क्या रीपो दर में बदलाव किया जाएगा, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की EMI पर असर पड़े।

ग्लोबल मार्केटस

ज्यादातर एशियाई बाजार बुधवार को ऊंचाई पर कारोबार कर रहे थे। वॉल स्ट्रीट में टेक से जुड़े शेयरों में उछाल और क्रिप्टोकरेंसी में तेज रिकवरी का असर एशिया के बाजारों पर भी दिखा। जापान का निक्केई 225 0.76 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि व्यापक टॉपिक्स 0.31 प्रतिशत फिसल गया। दक्षिण कोरिया में कोस्पी 1.06 प्रतिशत चढ़ा। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.32 प्रतिशत मजबूत हुआ।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स एशिया के शुरुआती कारोबार में स्थिर रहे। प्रमुख अमेरिकी बेंचमार्क मंगलवार को उछाल के बाद टिके रहे। डॉव 0.39 प्रतिशत बढ़ा, S&P 500 में 0.25 प्रतिशत की बढ़त हुई और नैस्डैक 0.59 प्रतिशत चढ़ा। निवेशक अमेरिकी सितंबर ट्रेड डेटा, अमेरिकी नवंबर ग्लोबल कंपोज़िट और सर्विस PMI डेटा तथा यूरोप केंद्रीय बैंक के चेयरमैन क्रिस्टीन लगार्ड के कमेंट पर भी नजर रखेंगे।

First Published : December 3, 2025 | 8:06 AM IST