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साप्ताहिक एक्सपायरी खत्म करने की कोई योजना नहीं, सेबी प्रमुख ने चर्चाओं को बताया अटकलबाजी

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नवंबर 2024 से सेबी ने खुदरा निवेशकों के नुकसान और जेन स्ट्रीट जैसे कथित हेरफेर के मामलों के बाद डेरिवेटिव बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए कई उपाय किए हैं।

Last Updated- August 06, 2025 | 9:42 PM IST
Tuhin Kanta Pandey

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने बुधवार को साप्ताहिक ऑप्शन एक्सपायरी को खत्म करने या इस मामले पर वित्त मंत्रालय के साथ किसी भी तरह की चर्चा की खबरों को ‘अटकलबाजी’बताते हुए खारिज कर दिया। मुंबई में भारतीय पोर्टफोलियो प्रबंधकों की एसोसिएशन (एपीएमआई) के वार्षिक सम्मेलन के मौके पर पांडेय ने अलग से बात करते हुए इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में सुधारों की जरूरत को स्वीकार किया। पांडेय ने कहा कि वीकली एक्सपायरी पर सेबी की वित्त मंत्रालय के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।

उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमें कुछ सुधारों की जरूरत है। लेकिन उन सुधारों का स्वरूप क्या होगा और उन्हें कैसे लागू किया जाएगा, इस पर हम बाजारों के साथ चर्चा करेंगे। जब भी हम ऐसे ठोस उपायों की कल्पना करेंगे, हम बाजार को जरूरत बताएंगे और विचार-विमर्श के लिए तैयार रहेंगे।’

शुरुआती कारोबार में बीएसई के शेयरों में 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई। लेकिन आखिर में यह लगभग एक प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,388 रुपये पर बंद हुआ। एक्सचेंज का शेयर 10 जून के अपने ऊंचे स्तर 3,030 रुपये से 21 प्रतिशत नीचे है।

नवंबर 2024 से सेबी ने खुदरा निवेशकों के नुकसान और जेन स्ट्रीट जैसे कथित हेरफेर के मामलों के बाद डेरिवेटिव बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों में साप्ताहिक अनुबंधों को प्रति एक्सचेंज एक सूचकांक तक सीमित करना और अनुबंधों का आकार बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा भारतीय बाजार ओपन इंटरेस्ट की गणना के लिए डेल्टा-आधारित दृष्टिकोण अपना रहा है, साथ ही मार्केटवाइड पोजीशन सीमाओं में संशोधन कर रहा है।

इन नियामकीय कदमों ने एफऐंडओ वॉल्यूम में गिरावट में इजाफा किया है जो सितंबर 2024 में 537 लाख करोड़ रुपये की ऊंचाई से जुलाई 2025 तक घटकर 381 लाख करोड़ रुपये रह गया। सेबी ने लंबी अवधि के अनुबंधों की भी वकालत की है। सेबी ने तर्क दिया है कि अल्पकालिक साधनों पर अत्यधिक निर्भरता पूंजी निर्माण में बाधा बन सकती है।

एपीएमआई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पांडेय ने पोर्टफोलियो प्रबंधक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाल में की गई पहलों का जिक्र किया जिनमें बेंचमार्किंग, प्रदर्शन रिपोर्टिंग, निवेश सीमाएं और खुलासा प्रक्रिया में सुधार शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘एपीएमआई के अनुरोध पर सेबी ने कस्टोडियन, डिपॉजिटरी और अन्य बाजार कारोबारियों की चिंताओं के समाधान के लिए कार्य समूह का गठन किया है।’30 जून तक, सेबी के साथ 479 पोर्टफोलियो प्रबंधक पंजीकृत थे।

पांडेय ने उद्योग को आश्वासन दिया कि 2020 में पीएमएस नियमों में व्यापक बदलाव ‘उपयुक्त नियमन’ की दिशा में आगे के नियामकीय सुधारों को बाधित नहीं करता है। उन्होंने विशेष रूप से पारंपरिक म्युचुअल फंडों से परे अनुकूलित धन प्रबंधन समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए उद्योग से स्पष्ट संचार को प्राथमिकता देने और निवेशक जागरूकता बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने पोर्टफोलियो प्रबंधकों से आग्रह किया कि वे प्रदर्शन संबंधी दावों को जिम्मेदारी के साथ सौंपें तथा किसी भी रणनीतिगत परिवर्तन को औपचारिक रूप से दस्तावेजीकृत करें।

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First Published - August 6, 2025 | 9:35 PM IST

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