facebookmetapixel
Advertisement
CMR Green Technologies की दमदार लिस्टिंग, निवेशकों को पहले दिन मिला 43% तक का मुनाफाMeta भारत में बनाएगी अपना पहला AI डेटा सेंटर, Reliance के साथ मिलाया हाथLock-in Expiry: Meesho से लेकर ICICI Pru AMC तक, 75 कंपनियों का लॉक-इन खत्म होने वाला हैलोग खरीद रहे हैं ज्यादा बीमा पॉलिसियां, फिर भी LIC और कंपनियों की ग्रोथ क्यों पड़ी धीमी?Delhi Weather Update: हीट वेव के बीच दिल्ली पर मेहरबान हुआ मौसम, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्टGold-Silver Price Today: सोना 2,500 रुपये से ज्यादा फिसला, चांदी की चमक भी पड़ी फीकी; जानें ताजा भावजॉब बदलने से पहले पढ़ लें ये रिपोर्ट, इन सेक्टरों में बढ़ रही हैं सैलरी! जानिए अगले साल कितना मिलेगा इंक्रीमेंटभारत में आ सकता है 80 अरब डॉलर का विदेशी निवेश, रुपये को होगा फायदाभारत के करोड़ों घरों में लगी इन्वर्टर बैटरियां बन सकती हैं बिजली संकट का बड़ा समाधानऑनलाइन शॉपिंग का बड़ा खेल! ‘डार्क पैटर्न’ से हर साल 28,000 करोड़ रुपये गंवा रहे भारतीय ग्राहक

SEBI की सख्ती, म्युचुअल फंडों में दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम अधिसूचित

Advertisement

बाजार नियामक ने अप्रैल में अपनी बोर्ड बैठक में इस व्यवस्था को पहली बार मंजूरी प्रदान की थी

Last Updated- August 05, 2024 | 10:30 PM IST
Adani bribery case: Adani Group on SEBI's radar, may investigate violation of disclosure rules SEBI की रडार पर अदाणी ग्रुप, डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन की कर सकती है जांच

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्युचुअल फंडों के लिए ऐसी बहुप्रती​क्षित संस्थागत व्यवस्था को मंजूरी दी है, जो धोखाधड़ी वाले लेनदेन, फ्रंट-रनिंग और अन्य ऐसे उल्लंघनों को रोकने में मददगार ढांचा साबित होगी। यह व्यवस्था बड़ी कंपनियों के लिए तीन महीने में प्रभावी होगी, जबकि छोटे फंड हाउसों को क्रियान्वयन के लिए 6 महीने का समय दिया जाएगा।

सेबी ने स्पष्ट किया है कि 10,000 करोड़ रुपये से कम प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) वाली परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को छह महीने के बाद नई व्यवस्था पर अमल करना होगा।

सेबी ने 2 अगस्त को एमएफ नियमों में संशोधन करते हुए कहा, ‘मुख्य कार्या​धिकारी या प्रबंध निदेशक या समकक्ष या अनुरूप रैंक का कोई अन्य व्यक्ति और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी का चीफ कम्पलायंस ऑफीसर संभावित बाजार दुरुपयोग (जिसमें प्रतिभूतियों में फ्रंट रनिंग और धोखाधड़ी वाले लेनदेन शामिल हैं) की रोकथाम के लिए इस तरह के संस्थागत तंत्र के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होगा।’

बाजार नियामक ने शुरू में अप्रैल में अपनी बोर्ड बैठक में इस व्यवस्था को पहली बार मंजूरी प्रदान की थी। यह कदम डीलरों और दलालों द्वारा म्युचुअल फंडों में फ्रंट-रनिंग के बढ़ते मामले के बाद उठाया गया है।

इस व्यवस्था के लिए, भारत में म्युचुअल फंडों का संगठन (एम्फी) एक मानक परिचालन ढांचा बना रहा है। मौजूदा समय में म्युचुअल फंड निगरानी पर आंतरिक प्रणालियों पर अमल करते हैं जो फर्मों के बीच अलग अलग होती हैं।

एक प्रमुख फंड हाउस के प्रमुख ने कहा, ‘हम एसओपी का इंतजार कर रहे हैं, हमने पहले ही अपनी आंतरिक निगरानी प्रणाली को मजबूत कर लिया है और इस तरह के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं।’सेबी ने फंड हाउसों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों, निदेशकों, ट्रस्टियों और अन्य लोगों के लिए संदिग्ध धोखाधड़ी, शासन संबंधी चिंताओं या अनैतिक प्रणालियों के बारे में चिंता जताने के लिए एक गोपनीय चैनल (जिसे व्हिसलब्लोअर पॉलिसी भी कहा जाता है) उपलब्ध कराएं।

Advertisement
First Published - August 5, 2024 | 10:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement