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पीएमएस को ​डेट का मिला सहारा

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Last Updated- January 03, 2023 | 11:45 PM IST
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धनाढ्य निवेशकों के लिए निवेश गंतव्य इक्विटी के मुकाबले ज्यादा डेट परिसंपत्तियां आकर्षित कर रहा है। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवा (पीएमएस) प्रदाताओं के पास न्यूनतम निवेश 50 लाख रुपये का होता है और मार्च 2022 से इनकी इक्विटी परिसंपत्तियों में 4.4 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि डेट परिसंपत्तियां 11.7 फीसदी बढ़ी हैं। डेट के जुड़ने की स्थिर रफ्तार का मतलब यह है कि पीएमएस की तरफ से प्रबंधित हर पांच रुपये में से चार रुपये का योगदान डेट कर रहा है।

महामारी के दौरान इक्विटी परिसंपत्तियों में काफी उतारचढ़ाव रहा है। कोविड-19 के शुरुआती दिनों में वैश्विक शेयर बाजार में आई गिरावट के बीच मार्च 2019 से मार्च 2020 के दौरान इक्विटी परिसंपत्तियां 16 फीसदी घट गईं। इसके अगले साल सुधार हुआ और ये परिसंपत्तियां मार्च 2021 में 73.1 फीस दी बढ़ गईं।

मार्च 2022 में बढ़त की दर आधी से भी ज्यादा घटकर 32.5 फीसदी रह गई और तब से लगातार सात महीने तक लाल निशान में रही है। इससे संबंधित आंकड़े नवंबर 2022 के जारी किए गए हैं। इनकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां मार्च 2019 के 1.3 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले नवंबर 2022 में 2.4 लाख करोड़ रुपये हो गईं।

डेट परिसंपत्तियों में स्थिर बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2019 से इसकी बढ़त की रफ्तार 10 से 15 फीसदी के दायरे में रही है। सबसे तेज बढ़ोतरी मार्च 2020 में सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ने के सामान्य चलन के बीच देखने को मिली। पीएमएस की डेट परिसंपत्तियां मार्च 2020 में समाप्त वर्ष में 19.5 फीसदी बढ़ी। इक्विटी बाजार में तेजी के बाद भी इसमें स्थिर बढ़ोतरी का मतलब यह है कि कुल ऋण परिसंपत्तियां अब 21.1 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

यह कुल पीएमएस परिसंपत्तियों के 80.4 फीसदी के बराबर है। मार्च के आखिर में परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी के आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 के बाद से (मार्च 2020 की अवधि छोड़कर) डेट की हिस्सेदारी 80 फीसदी से नीचे बनी हुई है। तब डेट की हिस्सेदारी 81.5 फीसदी को छू गई जबकि इक्विटी बाजारों में भी तेज गिरावट आई थी।

पीएमएस बाजार के संस्थापक-निदेशक डेनियल जीएम ने कहा, डेट के बड़े हिस्से की वजह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की तरफ से किया गया निवेश है। परिसंपत्ति प्रबंधक प्रॉविडेंट फंड परिसंपत्तियों की परिसंपत्तियों को पीएमएस के तहत वर्गीकृत करते हैं। नियामकीय आंकड़े बताते हैं कि पीएमएस परिसंपत्तियों के तहत कुल 26.3 लाख करोड़ रुपये में से प्रॉविडेंट फंड की रकम की हिस्सेदारी 19.5 लाख करोड़ रुपये की है।

यह भी पढ़ें: विनिवेश की राह होगी आसान

वे मोटे तौर पर यह पूंजी सरकारी प्रतिभूतियों में लगाते हैं। लेकिन कुछ पीएमएस डेट योजनाएं हैं, जो सूचीबद्ध‍ व असूचीबद्ध‍ ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं, जो निवेशकों के जोखिम के लिहाज से बनाए गए पोर्टफोलियो के तहत होता है। यह इक्विटी पीएमएस योजनाओं के समान है, जहां छोटी या जोखिम वाली कंपनियों को कभी-कभार शामिल किया जाता है, जो ग्राहकों की सहजता पर निर्भर करता है। डेनियल ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, पोर्टफोलियो मैनेजर ग्राहकों की जरूरत व पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड पोर्टफोलियो बनाने में सक्षम होते हैं।

डेट पीएमएस के तहत रकम का प्रबंधन करने वाली ऑल्टरनेट ऐसेट मैनेजमेंट फर्म शाएट कैपिटल के चेयरमैन स्वप्निल पवार के मुताबिक, तात्कालिक भविष्य के लिहाज से पीएमएस डेट योजनाओं का परिदृश्य सकारात्मक रह सकता है। दरों में बढ़ोतरी का चक्र समाप्त होने से अच्छे रिटर्न सृजित करने के मौके मिल सकते हैं, जिसे एमएफ की डायनेमिक डेट योजनाओं के मुकाबले पीएमएस की डेट योजनाएं बेहतर तरीके से हासिल कर सकती हैं।

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First Published - January 3, 2023 | 11:41 PM IST

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