PFC REC Merger: 6 फरवरी को PFC ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसने REC लिमिटेड में सरकार की 52.63% हिस्सेदारी खरीद ली है। यह कदम दोनों कंपनियों के मर्जर की दिशा में पहला बड़ा कदम है। साल 2026 के बजट में PFC-REC मर्जर की घोषणा हुई थी। अब कैबिनेट कमिटी ने इसे ‘इन-प्रिंसिपल’ मंजूरी दे दी है। PFC ने साफ कहा – “हम मर्जर करेंगे, लेकिन नई कंपनी अब भी सरकार की कंपनी बनी रहेगी।”
एनालिस्ट्स कहते हैं, “यह मर्जर केवल स्ट्रक्चर बदलने वाला है, बिजनेस नहीं।” PFC और REC दोनों ही राज्य विद्युत संस्थाओं और थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स में हैविली एक्सपोज्ड हैं। सिर्फ तब असली फायदा होगा जब राज्य विद्युत कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। फिलहाल, दोनों कंपनियों का कामकाज ‘बिजनेस ऐज़ यूज़ुअल’ ही रहेगा। Emkay Global Financial Services ने कहा कि इस मर्जर से किसी बड़े इफिशिएंसी गेन की उम्मीद नहीं है।
अगर मर्जर शेयर-स्वैप के जरिए हुआ, तो सरकार का स्टेक घटकर लगभग 42% रह जाएगा। लेकिन कानून के अनुसार, गवर्नमेंट कंपनी में 51% से ज्यादा हिस्सेदारी होनी जरूरी है।
एनालिस्ट्स ने तीन रास्ते बताए हैं:
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शेयरहोल्डर्स को इसे स्ट्रक्चरल मर्जर के रूप में देखना चाहिए। तुरंत कोई बड़ा फायदा नहीं मिलेगा। निकट भविष्य में शेयरों की कीमत तय होगी – मर्जर की प्रक्रिया, सरकारी हिस्सेदारी और कैपिटल रणनीति पर। मध्यम अवधि में असली बढ़त पावर सेक्टर में निवेश बढ़ने से होगी। वर्तमान में PFC और REC के शेयर 16-17% RoE और 5% डिविडेंड यील्ड पर ट्रेड कर रहे हैं। एनालिस्ट्स कहते हैं, “यह स्थिति निवेशकों के लिए आकर्षक है, क्योंकि एसेट क्वालिटी मजबूत है।”
Emkay Global ने कहा, “मर्जर के जरिए शेयर स्वैप रेशियो में कोई मौका मिल सकता है, तब तक दोनों कंपनियों का निवेश केस लगभग समान है। हालांकि Q4FY26 से REC के पास पिछले साल की तुलना में ज्यादा AuM बेस होने से ग्रोथ के बेहतर मौके हैं।”