facebookmetapixel
Advertisement
एथनॉल मिले पेट्रोल पर उठे सवालों का सरकार ने दिया जवाब, माइलेज घटने की बात भी मानीमहिलाओं के काम करने में सामाजिक सोच नहीं बल्कि नौकरियों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा: एस. महेंद्र देवफ्लॉप से सुपरहिट बनी इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’, कैसे दर्शकों ने पलट दी बॉक्स ऑफिस की बाजीEditorial: महिलाओं की नकद हस्तांतरण योजनाओं ने बदली तस्वीर, लेकिन बढ़ा राज्यों पर वित्तीय दबावअगले दो साल में IPO के लिए तैयार होंगी 210 नई कंपनियां, रेडसीर की रिपोर्ट में हुआ खुलासाSBI Funds Management आईपीओ से पहले बेचेगी हिस्सेदारी, प्री-आईपीओ प्लेसमेंट से जुटाए ₹1,655 करोड़शेयर बाजार में हफ्ते भर मची रही हलचल, रिलायंस और बैंकिंग शेयरों की दम पर आखिरी दिन हुई चौतरफा रिकवरीरूफटॉप सोलर स्कीम को मिलेगी बड़ी रफ्तार, विश्व बैंक भारत के लिए जुटाएगा $4.2 अरब का प्राइवेट फंडMSME सेक्टर को बड़ी राहत, अब सभी सरकारी कंपनियों के लिए ट्रेड्स प्लेटफॉर्म से बिल भुगतान जरूरीओयो-जॉस्टल के बीच बढ़ा कानूनी विवाद, दिल्ली HC ने बैकपैकर हॉस्टल श्रृंखला की नई अर्जी को किया खारिज

म्युचुअल फंड NFO पर सख्ती, सेबी उठाएगा और कदम: माधवी पुरी बुच

Advertisement

नियामक और कदम उठाने को है तैयार। इस मसले पर उद्योग निकाय एम्फी से राय देने को कहा

Last Updated- February 21, 2025 | 11:17 PM IST
Madhabi Puri Buch

सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने शुक्रवार को कहा कि बाजार नियामक ने म्युचुअल फंड योजनाओं की पेशकश में बढ़ोतरी की मूल वजह का निवारण करने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के कार्यक्रम में बुच ने जोर देकर कहा कि थीमेटिक फंडों के प्रसार पर लगाम कसने के लिए नियामक और कदम उठाने को तैयार है।

सेबी प्रमुख ने कहा कि न्यू फंड ऑफरिंग (एनएफओ) की समस्या हमारे समझ में आ गई। लिहाजा हमने इसका निवारण किया। अगर आगे और समस्या आती है तो हम इसे देखना चाहेंगे। एम्फी हमेशा से ही सहयोगात्मक रहा है और मैं कहूंगी कि उसे आगे आकर इस पर हमारा मार्गदर्शन करना चाहिए। म्युचुअल फंडों के बीच पिछले एक साल से नई योजनाएं शुरू करने की होड़ लगी हुई है। 2024 में पहली बार एक कैलेंडर वर्ष में एनएफओ की संख्या 200 से ऊपर पहुंच गई। मॉर्निंगस्टार इंडिया के आंकड़ों के अनुसार इसमें इक्विटी में जारी 150 से ज्यादा एनएफओ शामिल हैं जिनमें ऐक्टिव और इंडेक्स फंड दोनों शामिल हैं। 2023 में इक्विटी एनएफओ की संख्या 89 थी।

ऐक्टिव इक्विटी क्षेत्र में इनमें से अधिकांश पेशकश सेक्टोरल और थीमैटिक श्रेणियों में थी, जिन्हें सभी इक्विटी फंड श्रेणियों में सबसे जोखिम वाला माना जाता है। पैसिव फंडों में अधिकांश थीमेटिक और फैक्टर आधारित थे। सेबी ने एक नया नियम पेश किया है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि म्युचुअल फंड गलत समय पर योजना शुरू न करें और वितरकों को अनावश्यक पोर्टफोलियो में बदलाव से रोका जा सके।

अप्रैल 2025 से फंड मैनेजरों को एनएफओ अवधि के दौरान जुटाई गई राशि 30 दिनों के भीतर निवेश करनी होगी। अभी निवेश के लिए कोई समय सीमा नहीं है। वितरकों को अब मौजूदा निवेश को एनएफओ में बदलने पर अधिक कमीशन नहीं मिलेगा। सेबी ने दिसंबर में अपनी बोर्ड बैठक के बाद जारी बयान में कहा था कि एनएफओ में गलत मकसद से की गई संभावित बिक्री के मसले को हल करने के लिए स्विच लेनदेन के मामले में वितरक को दो योजनाओं के तहत मिलने वाले दो कमीशनों में से कम कमीशन मिलेगा।

म्युचुअल फंड स्विच विकल्प प्रदान करते हैं, जिसमें निवेशक अपने निवेश को भुनाने और फिर उसे नई योजना में डालने के बजाय सीधे एक से दूसरी योजना में धन स्थानांतरित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सेबी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फंड हाउस बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही योजनाएं लॉन्च करें और केवल उतनी ही राशि जुटाएं जितनी वे निवेश कर सकते हैं। इस कदम का मकसद जिम्मेदार फंड प्रबंधन को बढ़ावा देना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

बुच ने मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की चिंताओं पर भी काफी कुछ कहा। उन्होंने कहा कि अभी उनके मूल्यांकन पर बयान की कोई आवश्यकता नहीं है। नियामक ने 2024 की शुरुआत में व्यापक बाजार में बहुत ज्यादा तेजी को लेकर आगाह किया था।

Advertisement
First Published - February 21, 2025 | 10:38 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement