मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के तहत लिया गया निवेश जून में लगातार तीसरे महीने बढ़कर रिकॉर्ड 1.33 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की लीवरेज (उधार लेकर निवेश) के जरिए दांव लगाने की रुचि मजबूत बनी हुई है।
24 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, जून में MTF बुक मासिक आधार पर 5.9% बढ़ी। इससे पहले अप्रैल में इसमें 9.7% और मई में 8.8% की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले, फरवरी में लगातार 10 महीने की बढ़ोतरी के बाद पहली बार MTF में गिरावट देखने को मिली थी। मार्च में भी बाजार में सतर्कता और बढ़ती अस्थिरता के बीच MTF बुक घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गई थी।
हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद अक्टूबर 2025 से MTF बुक लगातार 1 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई ब्रोकरेज फर्मों द्वारा मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) की सुविधा शुरू किए जाने से भी इसके उपयोग में तेजी आई है।
MTF के तहत निवेशकों को किसी शेयर की पूरी कीमत एक साथ चुकाने की जरूरत नहीं होती। वे केवल ट्रेड वैल्यू का एक हिस्सा अग्रिम (अपफ्रंट) जमा करते हैं, जबकि बाकी राशि ब्रोकरेज फर्म ब्याज पर उपलब्ध कराती है।
ब्रोकर्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों की धारणा में सुधार आया है, जिससे लीवरेज के साथ निवेश करने का उत्साह बढ़ा है।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के होल-टाइम डायरेक्टर रूप भूतरा ने कहा, “मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़े भले ही रिकॉर्ड स्तर पर दिखाई दे रहे हों, लेकिन कुल बाजार पूंजीकरण और दैनिक कारोबार (डेली टर्नओवर) के मुकाबले इसका आकार अब भी संतुलित है।”
उन्होंने कहा कि MTF के तहत निवेश कई शेयरों में बंटा हुआ है और अच्छी तरह डाइवर्सिफाइड है। किसी एक शेयर में MTF एक्सपोजर करीब 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है। इससे किसी एक शेयर पर अत्यधिक निर्भरता (कंसंट्रेशन रिस्क) का जोखिम काफी कम हो जाता है। निकट भविष्य में भी MTF के जरिए निवेश में बढ़ोतरी का रुझान जारी रहने की उम्मीद है।
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मई में बाजार में आई उथल-पुथल के बाद जून में अब तक प्रमुख शेयर सूचकांक फिर से बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। 24 जून तक सेंसेक्स में 3.1% और निफ्टी में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई है।
पिछले सप्ताह जारी केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि नकद (कैश) बाजार में औसत दैनिक कारोबार (एवरेज डेली टर्नओवर) में सुधार की मुख्य वजह निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी के तहत बढ़ी गतिविधियां रहीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और निवेशकों की धारणा में धीरे-धीरे सुधार आने से आने वाले समय में पूंजी बाजार की गतिविधियां मजबूत बनी रह सकती हैं। इसके चलते निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और बाजार में बढ़ते भरोसे के दम पर मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का आकार आगे भी बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पूंजी बाजार में एक्सपोजर से जुड़े नियामकीय बदलाव लागू होने के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम और बाजार की कुल गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ये नियम पहले अप्रैल से लागू होने वाले थे, लेकिन इन्हें टाल दिया गया था। अब संशोधित नियम 1 जुलाई से प्रभावी होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, MTF सेगमेंट में NSE का दबदबा कायम है और इसकी बाजार हिस्सेदारी 96% है। हालांकि, BSE ने भी सालाना आधार पर इस सेगमेंट में मजबूत वृद्धि दर्ज की है।