मोबाइल फोन पर अनजान नंबरों से आने वाली स्पैम कॉल्स से निपटने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्राई ने साफ कर दिया है कि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) कंपनियों के लिए जारी की गई ‘1600’ नंबर सीरीज को किसी भी हाल में ब्लॉक, फिल्टर या स्पैम के रूप में टैग नहीं किया जा सकता। ट्राई का यह स्पष्टीकरण सीधे तौर पर ट्रूकॉलर और व्हॉट्सकॉल जैसे कॉलर आइडेंटिफिकेशन ऐप्स के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
नियामक ने स्पष्ट किया है कि टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशंस (TCCCPR) के तहत 1600 सीरीज के नंबरों पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाना नियमों के खिलाफ है। इसका मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि ग्राहकों को बैंकों और आर्थिक संस्थानों से आने वाले जरूरी फोन कॉल्स बिना किसी रुकावट के मिल सकें।
दरअसल, देश में धोखाधड़ी को रोकने और जरूरी कॉल्स को विश्वसनीय बनाने के लिए ट्राई ने यह नई व्यवस्था लागू की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), SEBI, IRDAI और PFRDA जैसी सरकारी संस्थाओं से मान्यता प्राप्त बैंक और कंपनियां अपने मौजूदा ग्राहकों को सेवा और लेनदेन (ट्रांजैक्शन) से जुड़ी जानकारी देने के लिए इस सीरीज का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारें भी नागरिकों से संपर्क साधने (G2C) के लिए 1600 सीरीज का उपयोग कर सकती हैं।
ट्राई का कहना है कि इस स्पेशल सीरीज को लाने का मकसद ही यही था कि लोग इस नंबर से आने वाले फोन को असली और भरोसेमंद मानकर उठा सकें। अगर कॉलर ID ऐप्स इन नंबरों को स्पैम या फ्रॉड के रूप में टैग करेंगे, तो इससे ग्राहकों में भ्रम फैलेगा। हालांकि, अगर कोई आम यूजर निजी तौर पर अपने फोन से किसी नंबर को ब्लॉक करना चाहता है, तो उसे इसकी पूरी आजादी होगी।
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बैंकों के अलावा ट्राई ने मार्केटिंग और विज्ञापन (प्रमोशनल) कॉल्स के लिए तय की गई ‘140’ सीरीज पर भी स्थिति साफ की है। नियामक के मुताबिक, इस सीरीज से आने वाले कॉल्स को भी ऐप्स अपनी तरफ से फिल्टर या टैग नहीं कर सकते। कंपनियों के लिए 140 सीरीज के जरिए प्रमोशनल कॉल करने से पहले टेलीकॉम ऑपरेटरों के पास TCCCPR फ्रेमवर्क के तहत रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।
नियामक ने कहा कि ग्राहकों के पास ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ (DND) रजिस्ट्री, ट्राई के DND ऐप या टेलीकॉम ऑपरेटरों की वेबसाइट के जरिए इन कॉल्स को रोकने का विकल्प पहले से मौजूद है। ऐसे में अगर कोई थर्ड-पार्टी ऐप अपनी तरफ से इन नंबरों को टैग करता है, तो यह उन ग्राहकों को गुमराह करने जैसा होगा जिन्होंने स्वेच्छा से DND पर कुछ सेक्टर्स की कॉल्स को मंजूरी दे रखी है।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब कई प्रमुख बैंकों ने ट्राई से शिकायत की कि 1600 सीरीज से किए जाने वाले उनके जरूरी कॉल्स को ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स स्पैम कैटेगरी में डाल रहे हैं। इससे ग्राहकों तक जरूरी जानकारियां नहीं पहुंच पा रही थीं। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ट्राई के उस अनुरोध पर विचार कर रहा है, जिसमें कॉलर ID ऐप्स को रेगुलेट करने के लिए ट्राई को अधिकृत एजेंसी बनाने की मांग की गई है।
दूसरी तरफ, भारत में करीब 35 करोड़ यूजर्स वाले ट्रूकॉलर ने भी इस मामले में ट्राई और सरकार से संपर्क साधा है। कंपनी का तर्क है कि सख्त नियमों के बावजूद कई स्कैमर्स और स्पैमर्स 140 और 1600 दोनों ही सीरीज का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आम यूजर्स को नुकसान हो रहा है।