योजना बनाने के दौर तीन से पांच साल तक ज्यादा लंबे हो गए हैं। कुछ महीने पहले तक यह अवधि 18 से 36 महीने थी। पुर्जों, खासकर मेमरी चिप की कीमतों में भारी वृद्धि और मांग की तुलना में सीमित उत्पादन के साथ-साथ पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आने से ऐसा हुआ है। यह कहना है एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल का। उन्होंने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को दूरसंचार उपकरण प्रदान करने के लिए उत्पादन की समय-सीमा बरकरार रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘हमें भविष्य के लिए लंबे समय का पूर्वानुमान लगाने और सही वक्त पर मांग तैयार करने की जरूरत है, ताकि हम बेहतर अंदाजा लगा सकें और किसी भी रुकावट से बचने के लिए बेहतर योजना बना सकें। अब हम तीन से पांच साल की अवधि पर ध्यान दे रहे हैं। इससे पहले हम अपने ग्राहकों को समय पर डिलिवरी सुनिश्चित करने के लिए कम से कम डेढ़ साल या 18 से 36 महीने की अवधि पर ध्यान दिया करते थे।’
बंसल नेटवर्क प्रमुख (दक्षिण पूर्व एशिया, ओशिनिया और भारत) भी हैं। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस बदलाव की वजह केवल पश्चिम एशिया की लड़ाई के बजाय विभिन्न उद्योगों में पुर्जों की आपूर्ति की वजह से पड़ने वाला असर है, जिसने अन्य क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला में भी रुकावट डाली है।
बंसल ने कहा, ‘हम काफी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करते हैं। हमारे पास वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता हैं। हम बेहतर पूर्वानुमानों के साथ भी काम करते हैं। लेकिन हां, जब सहयोग की बात आती है, तो यह ऐसी चीज है जो इस समय चुनौती है। कोई बाधा तो नहीं है लेकिन निश्चित रूप से एक चुनौती है।’ हालांकि उन्होंने कहा कि कंपनी की भारत में विनिर्माण इकाई में उत्पादन अभी तक बाधित नहीं हुआ है।
एरिक्सन भारत में साल 1994 में दूरसंचार उपकरण उत्पादन का आधार स्थापित करने वाली सबसे पुरानी कंपनियों में से एक है। यह स्वीडिश दूरसंचार उपकरण विनिर्माता पुणे में वैश्विक विनिर्माता जॅबिल इंक की इकाई के साथ साझेदारी में 5जी रेडियो, रेडियो ऐक्सेस नेटवर्क कंप्यूट, आधुनिक पैसिव एंटिना और माइक्रोवेव उत्पादों का निर्माण करती है।
कंपनी के चीन, मेक्सिको और रोमानिया में भी उत्पादन संयंत्र हैं। कंपनी ने पिछले साल भारतीय कंपनी वीवीडीएन टेक्नॉलजीज के साथ साझेदारी के जरिये भारत में पैसिव एंटिना उत्पादन का विस्तार किया था। इससे निर्यात बाजारों को भी आपूर्ति की जाएगी।