शेयर बाजार

चंद्रशेखरन के हटने की खबरों का टाटा समूह के शेयरों पर दिखेगा असर! क्या कहते हैं जानकार

Tata Group Stocks: विश्लेषकों का मानना है कि एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने की स्थिति में समूह के शेयरों में शुरुआती प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- August 12, 2026 | 11:00 AM IST

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (चंद्रा) के 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) से पहले पद छोड़ने की खबरों का टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में संबंधित शेयरों में शुरुआती तौर पर कुछ प्रतिक्रिया जरूर देखने को मिल सकती है, लेकिन इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

विश्लेषकों के मुताबिक, टाटा समूह की प्रत्येक कंपनी के कारोबार की अपनी अलग परिस्थितियां हैं और उनके पास कुशल नेतृत्व टीम है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर बदलाव होने की स्थिति में भी इन कंपनियों के कामकाज में स्थिरता बनी रह सकती है।

बाजार के लिए बड़ा घटनाक्रम नहीं

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोक्कालिंगम का मानना है कि 18 अगस्त की AGM से पहले चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने की खबर बाजार के लिए बहुत बड़ा घटनाक्रम साबित नहीं हो सकती। हालांकि, शुरुआत में शेयरों में अचानक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, टाटा समूह जैसी बड़ी संस्थाएं आसानी से अच्छे और योग्य पेशेवरों को अपने साथ जोड़ सकती हैं।

चोक्कालिंगम ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि उनके नेतृत्व में टाटा समूह की सभी कंपनियों ने बहुत बड़ा प्रदर्शन किया है। ऐसे में अगर वह पद छोड़ते हैं और उनकी दोबारा नियुक्ति नहीं होती है, तो संबंधित शेयरों में बहुत बड़ी प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखरन सभी कारोबारों के प्रदर्शन को बेहतर करने में सफल नहीं रहे हैं। TCS, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स जैसे कई कारोबारों के सामने अब भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

चोक्कालिंगम के मुताबिक, उन्हें टाटा समूह में घरेलू अर्थव्यवस्था पर केंद्रित टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (CV) और टाटा कैपिटल जैसे कारोबार पसंद हैं। वहीं टाइटन के मौजूदा मूल्यांकन में ज्यादातर सकारात्मक पहलू पहले ही शामिल दिखाई देते हैं।

फरवरी 2027 तक है चंद्रा का कार्यकाल

टाटा संस के चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। हालांकि, उनका आगे इस पद पर बने रहना टाटा संस के निदेशक के रूप में उनकी दोबारा नियुक्ति पर निर्भर करता है।

चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। वह 2009 में TCS के मुख्य कार्यकारी ​अधिकारी (CEO) बने और इसके बाद 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला।

फरवरी में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने पर फैसला टाल दिया था। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।

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2026 में टाटा समूह के शेयरों का मिला-जुला प्रदर्शन

साल 2026 में अब तक टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। ACE इ​क्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, नेल्को, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाइटन कंपनी, ओरिएंटल होटल्स, टाटा कैपिटल, टाटा स्टील और ट्रेंट के शेयरों में 2026 में अब तक करीब 7 फीसदी से 39 फीसदी तक की तेजी आई है।

दूसरी ओर, टाटा एलेक्सी, TCS, रैलिस इंडिया, टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र), टाटा केमिकल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में इस अवधि के दौरान 27 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।

इसकी तुलना में निफ्टी 50 इंडेक्स 2026 में अब तक करीब 6 फीसदी नीचे है।

नेतृत्व परिवर्तन आसान नहीं होगा: यू आर भट

अल्फानिटी फिनटेक के सह-संस्थापक और निदेशक यू आर भट का मानना है कि अगर चंद्रशेखरन पद छोड़ते हैं और दोबारा नहीं चुने जाते हैं तो नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि फिलहाल उनकी जगह लेने के लिए कोई स्पष्ट उम्मीदवार दिखाई नहीं देता।

भट के मुताबिक, एयर इंडिया का अधिग्रहण संभवतः एक गलती साबित हो सकता है, हालांकि लंबी अवधि में परिस्थितियां बदल सकती हैं। उनका मानना है कि एयर इंडिया को खरीदने का फैसला पूरी तरह कारोबारी नजरिये के बजाय कुछ हद तक भावनात्मक भी था।

शेयरों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं

भट ने कहा कि कुल मिलाकर चंद्रा ने काफी अच्छा काम किया है और वह इस जिम्मेदारी के लिए सही व्यक्ति दिखाई देते हैं। हालांकि, अगर वह पद छोड़ते हैं तो मुझे टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में बहुत बड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखरन समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के रोजमर्रा के संचालन में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहते हैं।

टाटा संस मुख्य रूप से इन कंपनियों का प्रमोटर है और AGM में मतदान के जरिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करता है, लेकिन वह इन कंपनियों के रोजाना के प्रबंधन से जुड़े फैसले नहीं करता। भट के मुताबिक, चंद्रशेखरन के हटने की स्थिति में निवेशकों की धारणा पर कुछ असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन टाटा समूह के शेयरों पर इसका प्रभाव बहुत बड़ा होने की संभावना नहीं है।

First Published : August 12, 2026 | 11:00 AM IST