तेल की वैश्विक कीमतों में नरमी से वृहद आर्थिक परिदृश्य बिगडऩे की चिंताएं कम हुई हैं, जिससे बेंचमार्क सूचकांक आज करीब दो फीसदी चढ़ गए। रूस ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में प्रगति का संकेत दिया है। इससे भी रुझान मजबूत हुआ। अपने बाजारों में स्थिरता लाने के चीन के संकल्प से भी वैश्विक बाजारों का रुझान सुधरा है। ब्याज दरों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले यूएस ट्रेजरी और डॉलर में गिरावट दर्ज की गई।
व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी जेन पसाकी ने बयान में कहा कि भारत का रूस से छूट पर कच्चा तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं है। इससे निवेेशकों को राहत मिली।
बेंचमार्क सेंसेक्स कारोबारी सत्र के आखिर में 1,040 अंक या 1.86 फीसदी चढ़कर 56,817 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी 312 अंक या 1.87 फीसदी बढ़त के साथ 16,975 पर बंद हुआ। अब सूचकांक पिछले सप्ताह के निचले स्तरों से करीब 8 फीसदी चढ़ चुके हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में 25 फीसदी से अधिक गिरावट, राज्य विधानसभा चुनावों में अनुकूल नतीजों और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बाजार में भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर लिवाली से बाजार में तेजी आई है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) के साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवशकों (एफपीआई) ने भी आज लिवाली की।
एफपीआई ने आज 312 करोड़ रुपये और डीआईआई ने 772 करोड़ रुपये की लिवाली की। इस साल एफपीआई की बिकवाली एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी पूंजी के प्रवाह की दिशा में पलटाव बाजार के लिए अत्यधिक सकारात्मक है। शेयर बाजार के निवेशकों के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक रही है क्योंकि भारत अपनी जरूरत के एक बड़े हिस्से का आयात करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे लुढ़कने के आसार हैं, इसलिए भारतीय शेयर बाजार वैश्विक शेयर बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग में तेजी के साथ अन्य एशियाई बाजारों में भी तेजी आई है। चीन की राज्य परिषद ने वित्तीय बाजारों और रियल एस्टेट क्षेत्र की मदद के लिए ज्यादा प्रयास करने का वादा किया है, जिससे चीन में शेयरों में तेजी आई है। इसके अलावा चीन की सरकार ने पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का वादा किया है। एवेंडस कैपिटल अल्टरनेटिव स्ट्रेटजीज के सीएफओ एंड्रयू होलैंड ने कहा, ‘चीन के शेयरों और तकनीकी शेयरों में तगड़ी उछाल से पूरे सत्र में एशियाई बाजारों को मदद मिली। तेल की कीमतें नरम बनी हुई हैं। शांति वार्ता भी ज्यादा सकारात्मक बन रही है।’विशेषज्ञों ने कहा कि देखना होगा कि फेड द्वारा 2018 से पहली बार दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी को लेकर बाजार किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं। यूक्रेन में चल रहे युद्ध और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से निवेशकों की धारणा बनी है कि फेड बड़ी बढ़ोतरी कर उन्हें नहीं चौंकाएगा। विश्लेषकों ने कहा कि दर में बढ़ोतरी से ज्यादा फेड प्रमुख के बयान से बाजार की चाल तय होगी। हॉलैंड ने कहा, ‘इस पर कड़ी नजर रहेगी कि फेड के प्रमुख कितने आक्रामक या नरम रहते हैं। वह अगली तिमाहियों में ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी करना चाहते हैं। क्या वह यह कहते हैं कि हम अब कुछ निश्चित कदम उठाएंगे और देखते हैं कि इनका क्या असर होता है?’