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मंदी के कगार पर भारतीय बाजार

Last Updated- December 11, 2022 | 8:51 PM IST

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अनुमान से पहले वृद्घि से 2022 के शुरू में वैश्विक वित्तीय बाजारों को झटका लगा। अब रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा युद्घ ने जिंस कीमतों में तेजी ला दी है और ब्रेंट क्रूड तेल दिन के कारोबार में 139 डॉलर प्रति बैरल के 14 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इन सब घटनाक्रम से दुनियाभर के इक्विटी बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
जहां डाउ जोंस गिरावट (2020 में अपने ऊंचे स्तरों से -10.5 प्रतिशत) में है, वहीं नैसडैक में भी बड़ी कमजोरी (-21 प्रतिशत) आई है। जर्मन डैक्स भी मंदी के दायरे में है, जिसमें 2020 के ऊंचे स्तरों से 21 प्रतिशत की कमजोरी आई है, वहीं निक्केई में -19.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। भारत में निफ्टी-50 भी 18,604.45 के अपने 52 सप्ताह के ऊंचे स्तर से करीब 14 प्रतिशत लुढ़का है। ‘बीयर फेज’ यानी गिरावट की स्थिति तब मानी जाती है जब कोई सूचकांक या शेयर अपने ऊंचे स्तरों से 20 प्रतिशत या इससे ज्यादा गिरता है।
विश्लेषकों का कहना है कि ताजा चिंता यूक्रेन संकट को लेकर है और यदि हालात बदतर हुए और तेल कीमतें ऊंचे बनी रहीं तो इसका भारत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत अपनी सालाना तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस वजह से उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा और इससे बाजार में मंदी का दौर आ सकता है।
वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्धन जयपुरिया ने कहा, ‘भारतीय बाजारों में कम गिरावट आई है, क्योंकि घरेलू संस्थान और छोटे निवेशक उस स्थिति में मददगार साबित होते हैं जब विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं। भारत में बड़ा पूंजी प्रवाह उभरते बाजार के फंडों से आता है। भारत के लिए मजबूरी तेल को लेकर है और तेल कीमतों में वृद्घि से धारणा पर प्रभाव पड़ेगा। भारतीय बाजार गिरावट के कगार पर हैं। यदि युद्घ का जल्द अंत नहीं हुआ तो बाजार मंदी के दौर में प्रवेश कर सकते हैं। निफ्टी-50 में 5 प्रतिशत की गिरावट कोई बड़ी बात नहीं है।’
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल कीमतों को अपरिवर्तित बनाए रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि अब चुनाव हो संपन्न हो गए हैं, इसलिए ईंधन कीमतों में तेजी की जा सकती है। उन्हें पेट्रोल और डीजल में 13-26 रुपये प्रति लीटर के दायरे में कीमत वृद्घि की संभावना है।
एवेंडस कैपिटल पब्लिक मार्केट्स अल्टरनेट स्ट्रेटेजीज के सह-मुख्य कार्याधिकारी वैभव सांघवी ने कहा, ‘स्थिति काफी नाजुक है। अभी कुछ बता पाना कठिन है, लेकिन बाजार में मौजूदा स्तरों से और गिरवट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। में कारोबारियों को इस अवधि का इंतजार करने का सुझाव देना चाहूंगा जबकि निवेशकों को मध्यावधि से दीर्घावधि के नजरिये से खरीदारी पर विचार करना चाहिए।’
ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की एक रिपोर्ट में अनुसार, पिछली 10 प्रतिशत से ज्यादा की 17 बाजार गिरावटों से पता चलता है कि बाजार में तेजी से सुधार आया और 3 से 6 महीने की अवधि में पूरे नुकसान की भरपाई हुई।

First Published - March 8, 2022 | 11:30 PM IST

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