facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया की जंग से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट: क्या 7.4% की विकास दर हासिल कर पाएगा भारत?WTO में भारत का बड़ा कदम: डिजिटल ट्रेड पर टैरिफ न लगाने के मोरेटोरियम को दो साल के लिए दी मंजूरीमोदी-ट्रंप की फोन पर बातचीत में मस्क की मौजूदगी को भारत ने नकारा, कहा: सिर्फ दोनों नेता ही शामिल थेApple ने बदला अपना गेम प्लान, भारत में पुराने आईफोन खरीदना अब नहीं होगा इतना सस्ता2026 में आ सकता है फाइनेंशियल क्रैश? रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, बोले: पर ये अमीर बनने का मौका होगाIPL 2026: इस बार बिना MS Dhoni उतरेगी CSK, कौन संभालेगा टीम की कमान?ITR Filing 2026: इस बार नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा या पुराना? एक्सपर्ट से दूर करें सारा कंफ्यूजनIRB इंफ्रा और Triton Valves समेत ये 4 कंपनियां अगले हफ्ते देंगी बोनस शेयर, निवेशकों की बल्ले-बल्लेRentomojo ने सेबी के पास IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए, ₹150 करोड़ फ्रेश इश्यू का लक्ष्य; बाजार में हलचलTVS Motor से लेकर CRISIL तक, अगले हफ्ते ये 7 दिग्गज कंपनियां बांटेंगी मुनाफा; चेक कर लें रिकॉर्ड डेट

पहले सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड की हुई नीलामी

Advertisement

ट्रेडरों का कहना है कि ग्रीन बॉन्ड बिक्री में सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों की तेज रही मांग

Last Updated- January 25, 2023 | 11:01 PM IST
Green bond
BS

सरकार की ग्रीन बॉन्डों की अब तक की पहली बिक्री को निवेशकों की मजबूत मांग का समर्थन मिला है। साथ ही मौजूदा तुलनात्मक परिपक्वता वाले नियमित सॉवरिन बॉन्ड की तुलना में कम प्रतिफल पर प्रतिभूतियां जारी की गईं।

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को सरकार की ओर से ग्रीन बॉन्डों की पहली बिक्री की। इसमें 8,000 करोड़ रुपये की 2 प्रतिभूतियां शामिल हैं, जिसमें एक 5 साल का बॉन्ड और एक 10 साल का बॉन्ड है। जैसा कि नीलामी के पहले ट्रेडरों ने अनुमान लगाया था, इस बिक्री में सरकारी बैंकों की ओर से मांग तेज रही है। डीलरों ने कहा कि डेट की बिक्री में बीमा कंपनियों ने भी मजबूत हिस्सेदारी दिखाई है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप में ट्रेडिंग के प्रमुख नवीन सिंह ने कहा, ‘पीएसयू बैंकों और बीमा कंपनियों की ओर से बेहतर मांग रही है। इसके अलावा एफपीआई ने भी कम से कम 700 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड लिए हैं।’नीलामी के परिणाम से पता चलता है कि 5 साल के पेपर के लिए कटऑफ प्रतिफल 7.19 प्रतिशत था, जबकि 10 साल के ग्रीन बॉन्ड के लिए 7.29 प्रतिशत तय किया गया था। मंगलवार को रेगुलर 10 साल का बेंचमार्ग सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 7.35 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि सबसे ज्यादा तरलता वाला 5 साल के बॉन्ड का प्रतिफल 7.15 प्रतिशत रहा।

नियमित 10 साल का बेंचमार्क पेपर बुधवार को इसी प्रतिफल पर ठहरा, जबकि नियमित 5 साल का बॉन्ड 1 आधार अंक ऊपर बंद हुआ। रिजर्व बैंक के नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम ऑर्डर मैचिंग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के सौदों की रिपोर्ट से पता चलता है कि 10 साल के ग्रीन बॉन्ड में 680 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जबकि 5 साल के ग्रीन बॉन्ड में 225 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। ट्रेडरों ने कहा कि रिपोर्टेड डील सेग्मेंट अक्सर बॉन्डों में एफपीआई गतिविधि का संकेतक होता है।

विदेशी हिस्सेदारी को बढ़ावा देने की कवायद में रिजर्व बैंक ने कहा है कि ग्रीन बॉन्डों को ऐसी प्रतिभूतियों के रूप में चिह्नित किया जाएगा, जिसमें विदेशी निवेशकों की पूरी पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। पिछले सप्ताह बीमा नियामक इरडा ने कहा था कि बीमा कंपनियों के ग्रीन बॉन्ड में निवेश को बुनियादी ढांचे में निवेश माना जाएगा। हिस्सेदीरी बढ़ाने की कवायद में यह घोषणा की गई थी।

सरकार ने अपनी मौजूदा नियमित प्रतिभूतियों की तुलना में 5 साल और 10 साल के ग्रीन बॉन्ड की बिक्री कम प्रतिफलों पर की है। बाजार की भाषा में कहें तो इस प्रीमियम को ग्रीन बॉन्ड के मामले में ग्रीनियम कहा जाता है।

कटऑफ प्रतिफल या बॉन्ड पर कूपन सरकार द्वारा उन निवेशकों को भुगतान की जाने वाली ब्याज दर है, जिन्होंने अपना कर्ज खरीदा था। वैश्विक रूप से ग्रीन बॉन्ड एक प्रीमियम पर जारी इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जो डिजाइन के मुताबिक पर्यावरण के मित्रवत परियोजनाओं को सस्ती पूंजी मुहैया कराने के लिए होते हैं।

यह भी पढ़ें: बजट व फेड की चिंता से टूटे बाजार

डीबीएस बैंक में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका रॉय ने लिखा है, ‘रुचि वाले दो पहलू होंगे। पहला, क्या ये बॉन्ड लागत को लेकर बेहतर हैं, यानी परंपरागत बॉन्डों की तुलना में सस्ते हैं और दूसरे, मांग पूल में जहां घरेलू निवेशकों का दबदबा हो सकता है, रुपये में निर्धारित ग्रीन बॉन्डों पर वैश्विक फंड हाउसों की नजर हो सकती है।’

रिजर्व बैंक के साथ हाल की चर्चा में हिस्सा लेने वाले बॉन्ड बाजार के कुछ हिस्सेदारों ने सरकार द्वारा जारी ग्रीन मसाला बॉन्ड का विचार पेश किया था, जिससे ज्यादा विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।

Advertisement
First Published - January 25, 2023 | 11:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement