देश में कोविड-19 के मामलों में भारी वृद्धि और इसकी रोकथाम के लिए कई प्रमुख शहरों में लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ सकती है लेकिन आय को लेकर विश्लेषकों का नजरिया अभी भी खामोशी का बना हुआ है। विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारतीय उद्योग जगत की आय संबंधी अपने अनुमान में फिलहाल किसी तरह की कटौती नहीं की है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी जी चोकालिंगम ने कहा, ‘कॉरपोरेट आय को वास्तव में अभी कोविड-पूर्व स्तर तक पहुंचना बाकी है लेकिन पिछले साल के कमजोर आधार के कारण उसमें वृद्धि दिख रही है। हालिया लॉकडाउन संबंधी उपायों के बावजूद आवश्यक सेवाओं से जुड़ी कंपनियां लगातार परिचालन कर रही हैं। इस प्रकार की पाबंदियां वास्तव में कुछ महीनों के लिए आय में वृद्धि की रफ्तार सुस्त कर सकती हैं। इसलिए मुझे पूरे वित्त वर्ष 2022 के वित्तीय नतीजों पर समग्र रूप से फिलहाल कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिख रहा है।’
जहां तक अर्थव्यवस्था का सवाल है तो नोमुरा ने कोविड के मामलों में तेजी के मद्देनजर वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) संबंधी अपने अनुमान को 13.5 फीसदी से घटाकर 12.6 फीसदी कर दिया है। जेपी मॉर्गन, यूबीएस और सिटी का मानना है कि वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी वृद्धि 10 से 12 फीसदी के दायरे में रहेगी जबकि पिछला अनुमान 11 से 13 फीसदी का था।
विश्लेषकों का कहना है कि आवाजाही पर लगाई गई हालिया पाबंदियों का आर्थिक प्रभाव केवल अगली कुछ तिमाहियों के दौरान तेज दिखेगा लेकिन उसके बाद स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि सबसे बड़ा जोखिम यह दिख रहा है कि आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों से व्यापक अर्थव्यवस्था अधिक प्रभावित होगी। नोमुरा के विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रभाव लघु अवधि (1 से 3 महीने) के लिए होगा और 2020 की दूसरी तिमाही के मुकाबले अपेक्षाकृत कम गंभीर होगा क्योंकि अर्थव्यवस्था ने वैश्विक महामारी को काफी हद तक स्वीकार कर लिया है।
नोमुरा की प्रबंध निदेशक एवं भारत में मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने अरदीप नंदी के साथ तैयार एक हालिया नोट में लिखा है, ‘कुल मिलाकर हम दूसरी तिमाही 2021 में क्रमिक रफ्तार के सुस्त होने की उम्मीद करते हैं लेकिन दूसरी लहर के खत्म होने (जुलाई से सितंबर तक) पर आगामी तिमाहियों के दौरान अटकी हुई मांग दिखनी चाहिए।’
आईडीबीआई कैपिटल के अनुसंधान प्रमुख एके प्रभाकर के अनुसार, इस पृष्ठभूमि में कॉरपोरेट आय ध्रुवीकृत होगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों (मनोरंजन, होटल, विमानन आदि) को कोविड की दूसरी लहर का झटका लगेगा लेकिन अन्य क्षेत्रों से दमदार आय के बल पर नुकसान की भरपाई हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘प्रभावित क्षेत्रों की आय में कमी की भरपाई फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, रसायन एवं धातु जैसे क्षेत्रों में दमदार आय वृद्धि से हो जाएगी। लॉकडाउन के दौरान एफएमसीजी का भी अच्छा प्रदर्शन रहना चाहिए। इसके अलावा कृषि संबंधी क्षेत्र का प्रदर्शन भी बेहतर रहने के आसार हैं।’
हालांकि प्रभुदास लीलाधर का नजरिया लघु अवधि के लिए काफी सतर्क रहने का है। उनका मानना है कि कोविड की उभरती परिस्थिति में आगामी महीनों के दौरान वित्त वर्ष 2022 के लिए प्रति शेयर आय (ईपीएस) में वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।