अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी रीन्यू भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से मिलने वाले कारोबार के बड़े अवसरों को हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगी और साथ ही सौर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर भी ध्यान देगी। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी सुमंत सिन्हा ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि खास क्षेत्रों में और स्पष्टता मिलने के बाद कंपनी भविष्य में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करने पर भी गंभीरता से विचार करेगी।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के प्रमुख कार्यक्रम मंथन 2026 में सिन्हा ने कहा कि फिलहाल तीन कारक भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की उम्मीद बढ़ा रहे हैं। इनमें बात सुनने-समझने वाली सरकार, ग्रिड प्रबंधन पर नीतिगत योजनाकारों का ध्यान तथा बड़ी कंपनियों द्वारा स्वच्छ ऊर्जा क्षमता निर्माण का तेजी से समर्थन करने का रुझान शामिल है।
सिन्हा ने कहा, ‘आज कई तथा बड़ी कंपनियां क्षमता निर्माण कर रही हैं और बहुत से लोग पूंजी जुटा रहे हैं। यह रफ्तार निश्चित रूप से वित्त के मामले में भी दिख रही है। देश ने दो साल पहले 18 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा की नई क्षमता स्थापित की थी। यह आंकड़ा बीते साल (2024) में 25-30 गीगावाट था और यह 2025 में बढ़कर 50 गीगावाट हो गया है। इसका अर्थ यह है कि अब हम वास्तविक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब हम इस स्तर से आगे बढ़कर 60-65 गीगावाट के स्तर पर पहुंचने वाले हैं।’
उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर निश्चित रूप से कंपनी के लिए बेहद आकर्षक अवसर बनने वाला है। इसका कारण यह है कि भारत में एकल राष्ट्रीय ग्रिड और ऊर्जावान व विशाल घरेलू आईपीपी उद्योग है। उन्होंने कहा, ‘यह अवसर भारत को आगे चलकर ऊर्जा निर्यातक बनने में मदद कर सकता है। हम अब बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने को लेकर काफी चर्चा देख रहे हैं। हमारे लिए न्यूनतम आवश्यकता यही है कि हम इन डेटा सेंटरों को स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति करें। दूसरी तरफ डेटा सेंटरों के लिए वितरण कंपनियों से बिजली खरीदने की तुलना में हमसे बिजली खरीदना कहीं अधिक सस्ता होगा। इसके अलावा हम अन्य प्रकार के साझेदारी अवसरों पर भी विचार करेंगे।’